अब अमृत सरोवर बनेगा:मनरेगा से हर जिले में 75 तालाब बनाने की कोशिश, पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार भी हाेगा

रायपुर6 महीने पहले
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मिशन अमृत सरोवर के तहत ऐसे तालाबों के निर्माण की कवायद देश भर में शुरू हुई है। - Dainik Bhaskar
मिशन अमृत सरोवर के तहत ऐसे तालाबों के निर्माण की कवायद देश भर में शुरू हुई है।

बरसाती पानी के संरक्षण और भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए अब अमृत सरोवर योजना पर काम शुरू हुआ है। योजना है कि हर जिले में ऐसे 75 तालाब बनाए जाएंगे। इसके निर्माण और रखरखाव का खर्च महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून और ग्रामीण विकास की दूसरी योजनाओं की मदद से पूरा किया जाना है।

राज्य मनरेगा आयुक्त मोहम्मद कैसर अब्दुलहक ने बताया, अमृत सरोवर के निर्माण के लिए सभी जिलों के कलेक्टर-सह जिला कार्यक्रम समन्वयक (मनरेगा) को निर्देशित किया गया है। उनको जारी दिशा-निर्देशों में यह रेखांकित है, मिशन अमृत सरोवर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कम से कम एक एकड़ क्षेत्रफल में बनाए जाने वाले अमृत सरोवर के लिए चिन्हांकित किए जा रहे गांवों में उन गांवों को प्राथमिकता देनी है जो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी या शहीदों से संबंधित हों। तालाब बन जाने के बाद उसका शुभारंभ भी स्वाधीनता संग्राम सेनानियों या उनके पारिवारिक सदस्यों या आजादी के बाद शहीद हुए सैनिकों के परिजनों या पद्म पुरस्कार से सम्मानितों कराया जाएगा। यदि अमृत सरोवर के निर्माण के लिए चयनित गांव में ऐसा कोई नागरिक उपलब्ध नहीं है, तो उस ग्राम पंचायत के सबसे वरिष्ठ नागरिक से यह काम कराया जाएगा।

तालाब के पास, पीपल-बरगद के पेड़ लगेंगे

मनरेगा आयुक्त ने बताया, अमृत सरोवर की आधारशिला रखने के लिए कार्यस्थल पर ही नीम, पीपल और बरगद जैसी प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे। प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस पर यहां ध्वजारोहण होगा। यह ध्वजारोहण संबंधित गांव के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी या उनके परिवार के सदस्य, शहीद के परिवार या पद्म पुरस्कार से सम्मानित स्थानीय व्यक्ति के द्वारा कराया जाएगा। जहां ऐसे व्यक्ति नहीं हैं वहां पंचायत के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति से ध्वजारोहण कराने के निर्देश हैं।

यह तालाब बहुद्देशीय होंगे

बताया जा रहा है, अमृत सरोवर मिशन के तहत बने ये तालाब बहुउद्देशीय होंगे। यानी इसमें कई मकसद हैं। ये तालाब वर्षा जल संरक्षण और भू-जल स्तर को ठीक रखने में मददगार होंगे ही। साथ ही इनको सिंचाई और मछली पालन के काम में भी लिया जाएगा। छत्तीसगढ़ में तालाबों की समृद्ध परंपरा रही है। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि इस नई पहल से वह मकसद में कामयाब होगी।

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