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चार सौ में से 254 की सर्जरी करनी पड़ी:रायपुर में डेढ़ दर्जन, तो बिलासपुर में 4 मरीजों को दोबारा हुआ ब्लैक फंगस

रायपुर17 दिन पहले
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पोस्ट कोविड में खतरनाक बीमारी के रूप में सामने आया ब्लैक फंगस अब और घातक रूप ले चुका है तथा प्रदेश में तकरीबन दो दर्जन ऐसे मरीज सामने आ गए हैं, जिन्हें एक बार ठीक होने के बाद दोबारा ब्लैक फंगस ने घेर लिया। राजधानी में पिछले तीन-चार दिन में ऐसे डेढ़ दर्जन तथा बिलासपुर में चार मरीज मिले हैं।

जो ब्लैक फंगस से ठीक होकर घर जाने के बाद दोबारा इसी शिकायत के साथ अस्पतालों में भर्ती हुए हैं। ब्लैक फंगस रिपीट होने के मामलों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को अलर्ट कर दिया है। यही नहीं, सब मिलाकर प्रदेश में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या 400 के करीब पहुंच गई है। इनमें से 254 अापरेशन के बाद ही ठीक हो पाए हैं और 39 इस बीमारी से जीत नहीं सके।

केवल राजधानी में अभी ब्लैक फंगस के 109 एक्टिव मरीजों का इलाज चल रहा है। प्रदेश में इस बीमारी के सक्रिय मरीजों की संख्या 161 है। ब्लैक फंगस से जितनी मौतें हुई हैं, उनमें से 21 लोगों को दूसरी बीमारियां भी थीं। इस बीमारी के सबसे ज्यादा मरीज फिलहाल रायपुर एम्स में हैं। वहां 86 मरीजों का इलाज चल रहा है। राजधानी के ही डॉ. अंबेडकर अस्पताल में 19 और सेक्टर 9 में 14 मरीज भर्ती हैं।

रायपुर एम्स में इस बीमारी के सर्वाधिक ऑपरेशन हुए हैं।

एक्सपर्ट व्यू- शुगर अहम कारण, कंट्रोल नहीं होने तथा कुछ और कारणों से यह दोबारा

ब्लैक फंगस की बीमारी में एम्स रायपुर में चार से पांच मरीज ऐसे आए हैं, जिनको दूसरी बार संक्रमण हुआ है। मरीज दोबारा संक्रमित न हों, इसके लिए बहुत जरूरी है कि मरीज की डायबिटीज कंट्रोल में रहे। दूसरी अहम बात ये है कि मरीजों को एंटी फंगल दवाओं का कोर्स दिया जाता है।

बहुत से मरीज 4 से 6 हफ्ते तक इस कोर्स को कोमॉर्बिडिटी यानी दूसरी गंभीर बीमारियों जैसे किडनी लीवर, हार्ट और डायबिटीज के कारण नहीं कर पाते हैं। ऐसे मरीजों में दोबारा इंफेक्शन के चांस बढ़ते हैं। ऐसे मरीज जिनकी डायबिटीज कंट्रोल में नहीं रहती है उनकी आंख ब्रेन या जबड़े की सर्जरी की नौबत भी आती है। कुछ मरीजों की आंख भी गई है।

हालांकि सबसे ज्यादा सर्जरी एम्स में ही हो रही है। ब्लैक फंगस से रिकवर हुए मरीजों को हम हिदायत दे रहे हैं कि दवा के साथ-साथ डायबिटीज को कंट्रोल में रखें। शुरू में दवाओं की दिक्कत भी रही, लेकिन अब स्थिति में लगातार सुधार हुआ है। इसलिए ठीक होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। डॉ. नितिन एम नागरकर, डायरेक्टर-एम्स रायपुर

प्रदेश में अब तक 156 स्वस्थ भी
स्वास्थ्य विभाग के एपिडेमिक कंट्रोल डायरेक्टर डॉ. सुभाष मिश्रा के मुताबिक दूसरे राज्यों में ब्लैक फंगस के मरीज प्रदेश की तुलना में ज्यादा हैं। यहां 156 से अधिक मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। 10 मई को इस बीमारी का पहला मरीज मिला था। उसके बाद से अब तक हर दिन 6 मरीज सामने अाए हैं।

ब्लैक फंगस के मामले युवाओं में भी मिले हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो कोरोना की तरह ब्लैक फंगस का खतरा भी टला नहीं है।

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