राजधानी में अब वेंटिलेटर पर सिर्फ 253 मरीज:रेमडेसिविर का एक डोज 30 हजार में बिका अब जरूरत कम, 80 हजार इंजेक्शन जाम

रायपुर6 महीने पहलेलेखक: पीलूराम साहू
  • कॉपी लिंक
इंजेक्शन के लिए सरकार को सिस्टम बनाना पड़ा, मारपीट तक हुई, उसी की मांग नहीं। - Dainik Bhaskar
इंजेक्शन के लिए सरकार को सिस्टम बनाना पड़ा, मारपीट तक हुई, उसी की मांग नहीं।

कोरोना के गंभीर मरीजों के कम होते ही डेढ़ माह पहले ब्लैक में प्रति इंजेक्शन 25 से 30 हजार में बिक रहे रेमडेसिविर की पूछपरख कम हो गई है। राजधानी में इस समय रेमडेसिविर के 80 हजार इंजेक्शन जाम हैं, जिनकी कीमत 3 करोड़ रुपए बताई गई है। प्रदेश में रेमडेसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता 1.25 लाख हो गई है, जबकि जरूरत नहीं के बराबर है।

ताजा हालत ये है कि राजधानी में रोजाना केवल 150 से 200 इंजेक्शन का उपयोग हो रहा है। रायपुर में बुधवार की रात 9 बजे तक केवल 253 गंभीर मरीज थे जिनका वेंटिलेटर पर अंबेडकर अस्पताल, एम्स व निजी अस्पतालों के एचडीयू और आईसीयू में इलाज चल रहा है।

प्रदेश में ऐसे 770 मरीज हैं और दवा कारोबारियों का दावा है कि पूरे प्रदेश में रेमडेसिविर के 50 हजार से ज्यादा इंजेक्शन जाम हो गए हैं, यानी उनकी जरूरत ही नहीं है। रेमडेसिविर इंजेक्शन को केंद्र सरकार ने कभी भी कोरोना के इलाज के लिए जारी प्रोटोकाॅल में नहीं रखा, इसके बावजूद अधिकांश बड़े अस्पतालों ने विदेशों के अनुभव के आधार पर ज्यादा इंफेक्शन वाले मरीजों को यह इंजेक्शन लगाया और अधिकांश मामलों में नतीजे भी अच्छे आए।

कम गंभीर, गंभीर व अतिगंभीर मरीजों को यह इंजेक्शन अनिवार्य रूप से लगाए गए। राजधानी में अप्रैल से मई के तीसरे हफ्ते तक कोरोना के गंभीर मरीजों की तादाद इतनी ज्यादा थी कि बेड नहीं मिल रहे थे, उस वक्त रेमडेसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता बड़ी समस्या के तौर पर सामने आई थी।

अंबेडकर अस्पताल में पीक में जहां 85 से 90 इंजेक्शन रोज मरीजों को लग रहे थे। राजधानी के अस्पतालों में रोजाना 2500 से ज्यादा इंजेक्शन की जरूरत होती थी। ऐसे में लोग ब्लैक में इंजेक्शन खरीदने के लिए मजबूर थे। हालात यह थे कि इसके 6 वायल लगाए जा रहे थे तथा एक का एमआरपी 900 रुपए से कम का है, लेकिन तब यह 30-30 हजार रुपए में ब्लैक में बिके।

सिर्फ रायपुर या छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे प्रदेश में इस इंजेक्शन की मारामारी और ब्लैक का यही हाल था। यहां तक कि नकली रेमडेसिविर तक बिक रहे थे। अप्रैल के पहले, दूसरे व तीसरे हफ्ते में रेडक्रास मेडिकल स्टोर से लेकर थोक दवा बाजार में लोगों की भारी भीड़ उमड़ती थी। इंजेक्शन नहीं मिलने पर अंबेडकर अस्पताल स्थित रेडक्रास स्टोर में मारपीट भी हो गई थी।

इंजेक्शन के लिए सरकार को सिस्टम बनाना पड़ा, मारपीट तक हुई, उसी की मांग नहीं

जरूरत से कहीं ज्यादा इंजेक्शन
गंभीर मरीजों की संख्या लगातार कम होने से रेमडेसिविर इंजेक्शन का उपयोग कम हो गया है। अंबेडकर अस्पताल में ही रोज 2 या 3 इंजेक्शन की जरूरत पड़ रही है, जबकि स्टॉक में 350 से ज्यादा इंजेक्शनहैं। सीएमएचओ कार्यालय से इंजेक्शन मंगाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। अंबेडकर में रोज तीन के औसत से भी इंजेक्शन लगे, तो रेमडेसिविर का 116 दिन यानी लगभग 4 महीने का स्टाक है।

राजधानी के अंबेडकर, एम्स व निजी अस्पतालों में एचडीयू बेड में 38, आईसीयू में 108 व वेंटीलेटर में 107 मरीज ही भर्ती हैं। दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर, रायगढ़, राजनांदगांव के सरकारी व निजी अस्पतालों में भी इक्का-दुक्का मरीज ही गंभीर हैं, जिन्हें इस इंजेक्शन को लगाने की जरूरत पड़ रही है।

टाेसिलिजुमैब की मांग भी कम
रेमडेसिविर की तरह टोसिलिजुमैब इंजेक्शन की पूछपरख कम हो गई है। गंभीर मरीजों को ये इंजेक्शन दिया जाता है। इस इंजेक्शन की कीमत प्रति वायल 35 हजार रुपए से अधिक है। ये भी ब्लैक में 60 से 75 हजार रुपए में बेचा जा रहा था। अब इंजेक्शन का स्टॉक है। दवा कारोबारियों के अनुसार राजधानी में इसके 20 से 25 हजार से ज्यादा इंजेक्शन जाम है।

निजी अस्पतालों में ज्यादातर इस इंजेक्शन का उपयोग किया गया। अंबेडकर में गिने-चुने मरीजों को ये इंजेक्शन दिया गया। इस इंजेक्शन की डिमांड वही लोग कर रहे थे, जिनके मरीज काफी गंभीर हो। डॉक्टरों के अनुसार कई गंभीर मरीजों की जान इस इंजेक्शन लगाने के बाद बची है।

सरकार के पास 50 हजार
राजधानी में छत्तीसगढ़ दवा कार्पोरेशन (सीजीएमएससी) के गोदामों व रायपुर सीएमएचओ कार्यालय के पास ही 50 हजार से ज्यादा इंजेक्शन है। सीएमएचओ कार्यालय में 6 हजार इंजेक्शन है। इंजेक्शन के लिए मारामारी बढ़ने के बाद सीएमएचओ ने एक डॉक्टर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। मरीजों की भर्ती के अनुसार रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा था। अब निजी अस्पतालों से मांग काफी कम आ रही है। यही कारण है कि इंजेक्शन जाम हो गए हैं।

तीसरी लहर आई, तभी उपयोग
मरीज कम हाेने से निजी अस्पतालाें में जाम रेमडेसिविर का उपयाेग कैसे हाेगा, संचालकाें काे इसकी चिंता सताने लगी है। हालांकि ज्यादातर इंजेक्शन की एक्सपायरी डेट 2022 तक है, इसलिए कहा जा रहा है कि अगर तीसरी लहर अाई, तभी रेमडेसिविर का उपयोग हो सकता है। एक खतरा और है, केंद्रीय संस्थानों ने इस इंजेक्शन को इलाज के प्रोटोकाॅल के हटा दिया है। अगर आईसीएमआर भी ऐसा करता है तो फिर पूरा स्टाक ही बेकार हो जाएगा। हालांकि इसे लाैटाने का विकल्प भी है।

  • अंबेडकर अस्पताल में प्रतिदिन केवल 2 से 3 रेमडेसिविर इंजेक्शन का उपयोग हो रहा है। पीक में यह संख्या 85-90 इंजेक्शन रोजाना था। अभी दो-तीन महीने का स्टाॅक बचा है। - डॉ. ओपी सुंदरानी, क्रिटिकल केयर प्रभारी अंबेडकर
  • गंभीर मरीजों की संख्या लगातार घट रही है, इसलिए रेमडेसिविर इंजेक्शन का उपयोग कम हुअा है। इसका उपयोग नहीं होना अच्छा है, क्योंकि संक्रमण काफी कम हो गया है। - डॉ. युसूफ मेमन, डायरेक्टर निजी अस्पताल