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एक्मो गंभीर मरीजों की जान बचाने में मदद करता है:फेफड़े-हार्ट फेल होने पर वेंटिलेटर से ज्यादा उपयोगी एक्मो मशीन, एसीआई में लगाने की चल रही तैयारी

रायपुर2 महीने पहले
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कोरोना के गंभीर मरीजों के फेफड़े और हार्ट फेल होने के बाद वेंटीलेटर काम नहीं करता। ऐसे समय में एक्मो (एक्स्ट्रा कॉर्पोरियल मेंबरेन ऑक्सीजनेटर)मशीन बहुत कारगर साबित होती है। विशेषज्ञों के अनुसार मरीज को वेंटीलेटर में रखने के बाद भी कई बार ऑक्सीजन सेचुरेशन 60-70 से ऊपर नहीं जाता, उस समय में एक्मो ज्यादा बेहतर साबित होता है।

एक्मो गंभीर मरीजों की जान बचाने में खासी मदद करता है। जिन दूसरे राज्यों में एक्मो मशीन है, वहां गंभीर मरीजों के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है। वहां रिजल्ट भी बेहतर आ रहा है। प्रदेश में कोरोना से अब तक 9,938 से ज्यादा मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें ज्यादातर मरीजों की फेफड़े और हार्ट फेल होने व पल्मोनरी एंबोलिज्म के कारण हो रही है। कोरोना मरीजों की मौत के लिए यही तीनों कारण जिम्मेदार है। डॉक्टरों का कहना है कि वेंटीलेटर कारगर तो है, लेकिन जब मरीज के दोनों फेफड़े व हार्ट काम करना बंद कर देता है, तब एक्मो की उपयोगिता बढ़ जाती है। जब ऑक्सीजन सेचुरेशन 60-70 से नीचे कम हो जाता है, तब मरीज के लिए वेंटीलेटर की जरूरत होती है।

खरीदने का प्रस्ताव
अंबेडकर अस्पताल के एसीआई में एक्मो मशीन खरीदने का प्रस्ताव दिया है। चूंकि यहां फेफड़े, हार्ट व खून की नसों की सर्जरी हो रही है इसलिए इस मशीन की जरूरत है। एक्मो मशीन की कीमत 70 लाख रुपए के आसपास है। इसे चलाने के लिए कार्डियो थोरेसिक एंड वेस्कुलर सर्जन व परफ्यूजिनिस्ट की जरूरत होती है।

जहां फेफड़े व हार्ट फेल हो जाते हैं, वहां एक्मो मशीन काम आती है। काेरोना में ज्यादातर मरीजों के फेफड़े व हार्ट फेल हो रहे हैं। इसलिए इस मशीन के सपोर्ट से कई मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
डॉ. कृष्णकांत साहू, एचओडी कार्डियो थोरेसिक एंड वेस्कुलर सर्जरी एसीआई

मरीजों की मौत कार्डियक अरेस्ट, लंग फेल व पल्मोनरी एंबोलिज्म के कारण हो रही है। कोरोना खून काे गाढ़ा करता है, जिससे हार्ट व फेफड़े की नसें ब्लॉक हो जाती है। इसलिए खून पतला करने दवा दी जाती है।
डॉ. आरके पंडा, एचओडी रेस्पिरेटरी मेडिसिन नेहरू मेडिकल कॉलेज

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