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कंटेनमेंट जोन की निगरानी के लिए स्टाफ की कमी:केवल बांस-बल्ली और एक पोस्टर लगाकर इलाका सील, बाहर घूम रहे कंटेनमेंट जोन के लोग

रायपुरएक महीने पहले
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  • शहर के ज्यादातर इलाकों में अब सैंपल देने में ही आनाकानी
  • मोबाइल टेस्टिंग में रुचि नहीं कई तो पाजिटिव होते ही गायब

राजधानी में कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और शहर तथा इलाके में कंटेनमेंट जोन की संख्या 400 से ऊपर चली गई है। इतने कंटेनमेंट जोन बन गए हैं कि प्रशासन बांस-बल्ली लगाकर तथा कंटेनमेंट का बड़ा सा पोस्टर रखकर संबंधित सड़क या गली को सील तो कर देता है, लेकिन पुलिस तथा अन्य कर्मचारी इतने नहीं बचे कि निगरानी के लिए उनकी ड्यूटी लगाई जा सके। प्रशासन के पास भी कर्मचारी इसलिए कम हैं क्योंकि अधिकतर विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी कांटेक्ट ट्रेसिंग दल में लगी हुई है। यही वजह है कि कंटेनमेंट जोन में बार के लोग तो घुसने से घबराते हैं, लेकिन भीतर वाले आराम से बाहर निकल रहे हैं। नई समस्या ये है कि लोग कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल देने से ही बच रहे हैं। कई बार तो पाजिटिव आने के बाद गायब भी होने लगे हैं। राजधानी में पहला मरीज मिला था, तब एक किमी एरिया को सील करके लाॅकडाउन किया था। अब इतने मरीज मिल रहे हैं कि कंटेनमेंट के नाम पर मरीज के मकान के आसपास का इलाका ही सील किया जा रहा है। संबंधित इलाके की एक सड़क या गली बांस-बल्ली लगाकर बंद की जा रही है। कंटेनमेंट एरिया का एक बड़ा पोस्टर रखा जा रहा है। कुछ दिन पहले तक एक-दो कर्मचारियों की ड्यूटी लगती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। यहां कौन आ रहा है, कौन बाहर निकल रहा है, इसकी निगरानी नहीं हो रही है क्योंकि स्टाफ ही नहीं है। प्रशासन-पुलिस को यह बात पता है, लेकिन वे तैनाती नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उतना स्टाफ नहीं है।

सैंपल देने में आनाकानी
कलेक्टर के पास शिकायत पहुंची है कि कंटेनमेंट जोन में रहने वाले लोग सैंपल देने में भी आनाकानी कर रहे हैं। दरअसल कंटेनमेंट जोन में आने वाले सभी लोगों के सैंपल लेकर जांच करनी है, ताकि संक्रमण का फैलावा रोका जा सके। शहर में कई जगह कंटेनमेंट जोन में सैंपल लेने गए कर्मचारियों का विरोध हो चुका है और उन्हें सैंपलिंग बंद कर लौटना भी पड़ा है।
पाजिटिव मिलते ही गायब
कई बार स्वास्थ्य विभाग अपनी मेडिकल और मोबाइल यूनिट को कंटेनमेंट जोन में सैंपल लेने के लिए भेजता है, लेकिन कुछ जगह अजीब हालात होने लगे हैं। कुछ जगह लोगों ने यह कहकर विरोध किया कि सैंपल लेने के बाद पाजिटिव आते ही उन्हें कोविड सेंटरों में भेजा जा रहा है, जहां पहले से कोरोना मरीज भर्ती हैं। इससे संक्रमण और अधिक होने का खतरा बढ़ जाता है।

अस्पताल फुल, इसलिए पाजिटिव आने के बाद भी दो दिन घर में ही
राजधानी के कोरोना अस्पतालों में बेड की कमी के कारण रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद नए मरीजों को तत्काल भर्ती करने में दिक्कत हो रही है। थोक में मरीज मिलने के कारण ऐसा हो रहा है। हेल्थ अफसरों के मुताबिक किस अस्पताल में बेड खाली हैं, यह पता करना अभी कठिन है। बेड खाली होता है, तब नए मरीज भर्ती होते हैं। तब तक उन्हें घर में आइसोलेटेड किया जाता है। इसमें दिक्कत इसलिए हो रही है कि कई के घर छोटे हैं, इसलिए अस्पताल जाने तक परिजनों में संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। राजधानी में 4 हजार से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। इनमें 1562 से ज्यादा लोगों का एम्स, अंबेडकर अस्पताल, माना समेत विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इसके अलावा इनडोर स्टेडियम, आयुर्वेद कॉलेज, ईएसआई अस्पताल, लालपुर, फुंडहर को मिलाकर 1700 बेड है। एम्स व अंबेडकर में गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। बाकी अस्पतालों में बिना व हल्के लक्षण वाले मरीजों का इलाज चल रहा है। रोज औसतन 150 से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं। शहर में तीन मुख्य अस्पताल के साथ आठ कोरोना केयर सेंटर हैं, इसलिए यह जानकारी मिलने में देर हो रही है कि नए मरीज को कहां भर्ती करना है। इससे भी मुश्किल कुछ बढ़ी है। सीएमएचओ डॉ. मीरा बघेल ने भी माना कि अस्पताल भेजने तक मरीज को घर में आइसोलेट करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

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