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सरकार और बस ऑपरेटर के बीच गतिरोध:संचालक बोले- 6 माह का टैक्स माफ होगा तभी राज्य में चल सकेंगी बसें; दूसरे राज्यों में टैक्स का परीक्षण कराएगी सरकार, इसके बाद ही निर्णय

रायपुरएक महीने पहले
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फाइल फोटो।
  • परिवहन मंत्री अकबर से मिले यातायात महासंघ के 60 से अधिक प्रतिनिधि
  • 104 दिन बाद 14 दिन चली बस पर यात्री नहीं मिले इसलिए छूट की मांग

राज्य सरकार और बस आपरेटर के बीच गतिरोध बना हुआ है। बस संचालक 6 माह की टैक्स माफी को लेकर अड़े हुए हैं। दूसरी तरफ सरकार भी आनन फानन में निर्णय लेने के मूड में नहीं है। छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के सभी जिलों से आए 60 से अधिक पदाधिकारियों ने सोमवार को परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने संघ की बातों को ध्यान से सुना और दूसरे राज्यों में टैक्स की स्थिति का अध्ययन करने और अफसरों से चर्चा के बाद निर्णय लेने का आश्वासन दिया। यातायात महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश देशलहरा ने कहा कि उन लोगों ने सितंबर से मार्च 2021 तक टैक्स में छूट देने, डीजल का रेट जितना बढ़ा है उसी अनुपात में बसों का किराया बढ़ाने, दिल्ली सरकार की तर्ज पर डीजल के वैट टैक्स में कमी करने और फार्म के एवं फार्म एम की साल में दो माह की बाध्यता समाप्त करने व फीस कम करने सहित 8 मांगे सरकार के सामने रखी हैं। मंत्री ने आश्वासन दिया है कि दूसरे राज्यों में टैक्स की स्थिति का परीक्षण कराने के बाद ही सरकार संघ की मांगों पर कोई निर्णय लेगी। दूसरी तरफ, परिवहन विभाग के अफसर ने भी कहा कि बसों के संचालन के संबंध में शासन स्तर पर ही निर्णय लिया जाएगा। कोरोना के कारण 21 मार्च को लॉकडाउन के कारण राज्य में बसों के पहिए थम गए। 104 दिनों बाद लॉकडाउन समाप्त हुआ तो संघ की मांग पर सरकार ने तीन माह का टैक्स माफ कर दिया। इसके बाद विभिन्न रूटों पर कुछ बसें चलीं तो लेकिन यात्रियों की संख्या इतनी कम थी कि खर्चा नहीं निकल पा रहा था। 14 दिन बाद 22 जुलाई को फिर से लॉक डाउन लग गया। इसके साथ ही बसों के पहिए फिर से थम गए। संघ के पदाधिकारियों प्रमोद दुबे, भावेश दुबे, अनवर, अजय सिंह, नवरतन सिंह का कहना है कि प्रदेश में लगभग 13 हजार बसें हैं। बसों का परिचालन नहीं हो रहा है इसके बावजूद हर माह वे प्रति बस 1 हजार रुपए का टैक्स देते हैं। यानि बस संचालक हर माह लगभग एक करोड़ 30 लाख रुपए का केवल टैक्स दे रहा है। बसों के परिचालन पर किलोमीटर और बसों की केपेसिटी के आधार पर टैक्स बढ़ जाएगा। यह लगभग साढ़े 5 करोड़ होने का अनुमान है। यही वजह है कि बस आपरेटर टैक्स छूट जैसी मांग पर अड़े हुए हैं।

टैक्स छूट सहित चार प्रमुख मांगे
बस संचालकों की तीन प्रमुख मांगे हैं। इसमें सितंबर से मार्च 2021 तक टैक्स में छूट देने, डीजल का रेट जितना बढ़ा है उसी अनुपात में बसों का किराया बढ़ाने, दिल्ली सरकार की तर्ज पर डीजल के वैट टैक्स में कमी करने और फार्म के एवं फार्म एम की साल में दो माह की बाध्यता समाप्त करने के साथ फीस कम करने की मांग की गई है। इसके अलावा टोल टैक्स में छूट और यात्री किराया में वृद्धि की स्थायी नीति बनाने, स्लीपर कोच पर लगने वाले डबल टैक्स को समाप्त करने, फिजिकल वेरिफिकेशन के आधार पर वाहनों के पंजीकरण करने की मांग की गई है।

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