4.41 लाख भूमिहीनों ने मांगा न्याय:छत्तीसगढ़ में ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के लिए 4,41,658 आवेदन; मिलने हैं 6 हजार रुपए

रायपुर7 महीने पहले
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सरकार की इस योजना से गांव के भूमिहीन परिवारों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई है जो कृषि मजदूरी, पारंपरिक व्यवसाय अथवा पौनी-पसारी का काम करते हैं। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
सरकार की इस योजना से गांव के भूमिहीन परिवारों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई है जो कृषि मजदूरी, पारंपरिक व्यवसाय अथवा पौनी-पसारी का काम करते हैं। (फाइल फोटो)

छत्तीसगढ़ में 4 लाख 41 हजार से अधिक भूमिहीन खेतिहर मजदूरों ने सरकार से न्याय मांगा है। बात राज्य सरकार के राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना की हो रही है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की इस योजना में अभी तक 4 लाख 41 हजार 658 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। आवेदन की अंतिम तारीख में केवल एक दिन बचा है। सरकार ने एक सितंबर से 30 नवंबर तक आवेदन मंगाए थे।

अधिकारियों ने बताया, अभी तक मिले आवेदनों से पंजीयन का काम जनपद पंचायत के स्तर पर किया जा रहा है। वहीं तहसील स्तर पर आवेदनों का परीक्षण खुद तहसीलदार कर रहे हैं। बताया गया, आवेदनों का परीक्षण कर पात्र लोगों की सूची तैयार कर ग्राम सभा में प्रदर्शित की जाएगी। वहां इस सूची पर दावा-आपत्ति मांगा जाएगा। दावा-आपत्ति के निराकरण के बाद पात्र लोगों की अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी। इस सूची में आये लोगों को राज्य सरकार इस योजना के तहत सालाना 6 हजार रुपए का भुगतान करेगी। जिन लोगों ने अब भी आवेदन नहीं किया है, वे मंगलवार तक अपनी ग्राम पंचायत में ही आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

क्या है यह न्याय योजना

इसी साल शुरू राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर योजना का उद्देश्य खेतिहर मजदूरों को आर्थिक अनुदान सहायता उपलब्ध कराना है। इस योजना के लिए पात्र पाये गये लोगों को सालाना 6 हजार रुपए दिये जाएंगे। यह रकम सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जानी है। सरकार का तर्क है, इस आर्थिक सहायता से मजदूरों की आमदनी बढ़ेगी और वह अपने परिवार की जरूरतों को पूरा कर सकेंगे।

इन शर्तों पर मिलेगा योजना का फायदा

योजना का लाभ छत्तीसगढ़ के ऐसे मूल निवासियों को मिलेगा। जिन परिवारों के पास कृषि भूमि नहीं है, ऐसे परिवारों में चरवाहा, बढई, लोहार, मोची, नाई, धोबी और पुरोहित जैसे पारंपरिक काम से जुड़े लोगों को भी इस योजना में शामिल किया गया है। पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े परिवार, वनोपज संग्राहक तथा शासन द्वारा समय-समय पर नियत ऐसे अन्य वर्ग भी पात्र होंगे जिनके परिवार के पास कृषि भूमि नहीं है।

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