ऑक्सीजन का उत्पादन:अंबेडकर अस्पताल में रोजाना 700 मरीजों के लिए बन रही ऑक्सीजन, नए प्लॉट से क्षमता बढ़कर 800 से अधिक

रायपुर9 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
पीएम ने नए ऑक्सीजन प्लांट की वर्चुअल ओपनिंग की। - Dainik Bhaskar
पीएम ने नए ऑक्सीजन प्लांट की वर्चुअल ओपनिंग की।

अंबेडकर अस्पताल में अब अस्पताल में ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों के लिए 500 सिलेंडर ऑक्सीजन का उत्पादन होगा। गुरुवार को अस्पताल में पीएम केयर फंड के जरिए बनाए गए नए ऑक्सीजन प्लांट की शुरूआत हो गई है। पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को उत्तराखंड में ऋषिकेश एम्स से देशभर के जिन 35 ऑक्सीजन प्लांट की वर्चुअल ओपनिंग की, उसमें रायपुर के अंबेडकर अस्पताल का भी प्लांट है। अभी अंबेडकर अस्पताल का प्लांट रोजाना 700 मरीजों के हिसाब से आक्सीजन बना रहा था। अब यह 800 मरीजों के लिए आक्सीजन बनाने लगेगा।

पीएसए तकनीक यानी प्रेशर स्विंग एड्जॉर्ब्शन तकनीक के जरिए ये प्लांट एक मिनट में 960 लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन करेगा। ऑक्सीजन की जरूरत वाले करीब 800 से अधिक बिस्तरों तक इस प्लांट के जरिए ऑक्सीजन पहुंचाई जा सकेगी। अंबेडकर अस्पताल का मौजूदा प्लांट 1450 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्पादन कर रहा है।

इसे छत्तीसगढ़ सरकार और एनएचएम ने बनाया है। दोनों प्लांट शुरू होने से रोज 500 ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति हो सकेगी। प्लांट के वर्चुअल उद्घाटन में सांसद सुनील सोनी, विधायक सत्यनारायण शर्मा और कुलदीप जुनेजा, महापौर एजाज ढेबर तथा सभापति प्रमोद दुबे के अलावा आईएएस डॉ. अयाज तंबोली, प्रभारी डीएमई डॉ. विष्णु दत्त और अस्पताल अधीक्षक डॉ. विनीत जैन मौजूद रहे।

ऐसे बनेगी आक्सीजन
पीएसए प्लांट वायुमंडल में मौजूद हवा से ऑक्सीजन बनाता है। विशेषज्ञों के अनुसार पीएसए इस सिद्धांत पर काम करता है कि उच्च दबाव में गैस, ठोस सतह (सॉलिड सरफेस) की तरफ आकर्षित होते हैं और अवशोषित (एब्जॉर्ब) हो जाते हैं। इसमें एक चैंबर के जरिए हवा को गुजारा जाएगा। इससे हवा की नाइट्रोजन एड्जॉर्ब्शन से चिपककर अलग हो जाएगी और ऑक्सीजन बाहर निकलकर प्लांट के ऑक्सीजन टॉवर में एकत्र होगी। वहां इसे फिल्टर किया जाएगा, फिर उपयोग में लाया जाएगा।

एक्सपर्ट व्यू; डॉ. ओपी सुंदरानी, इंचार्ज क्रिटिकल केयर, अंबेडकर अस्पताल

अब ऑक्सीजन के लिए बैकअप भी तैयार
अंबेडकर अस्पताल में विभिन्न विभागों की आईसीयू में 700 से अधिक बिस्तर ऑक्सीजन वाले हैं। नए प्लांट के शुरु हो जाने से अब हम आईसीयू सेटअप में 100 बिस्तरों की अतिरिक्त व्यवस्था और बढ़ा सकेंगे। कोरोना के दौर में भी हमारे पास पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध थी। हम उस दौर में भी अस्पताल में सम्मिलित रूप से 700 बिस्तर वाले आईसीयू चला रहे थे। नया प्लांट बनने से सिलेंडर बाहर से मंगवाने की जरूरत कम होगी।

दोनों प्लांट से एक दिन में 500 से अधिक सिलेंडर का प्रोडक्शन होगा, जो 800 से अधिक मरीजों के लिए ऑक्सीजन आपूर्ति में सहायक होगा। वहीं अगर किन्हीं कारणों से किसी प्लांट में ब्रेकडाउन हुआ तो एक बैकअप प्लांट हमेशा हमारे पास रहेगा। यानी मरीजों के लिए अब आक्सीजन चिंता का विषय नहीं होगा। तीसरी लहर के लिए अस्पताल के आईसीयू में 100 से अधिक बिस्तरों की नई व्यवस्था बनाई जा रही है। उसके लिहाज से नया प्लांट सहायक होगा।