अंबेडकर अस्पताल में दवा खरीदी में देरी से सबक:लोग भटकें न इसलिए 6 माह पहले बताना होगा अस्पतालों को कि कौन-कौन सी दवाएं चाहिए

रायपुर17 दिन पहले
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अंबेडकर अस्पताल - Dainik Bhaskar
अंबेडकर अस्पताल

अंबेडकर अस्पताल में दवाओं की जबरदस्त कमी को लेकर मचे बचाल के बीच दवा खरीदी करने वाली एजेंसी सीजीएमएससी ने सप्लाई का सिस्टम ही बदलने का निर्णय लिया है। अब अंबेडकर अस्पताल प्रबंधन को मार्च नहीं अक्टूबर में ही बताना पड़ेगा, उन्हें अगले साल कौन-कौन सी और कितनी-कितनी मात्रा में दवाओं की जरूरत पड़ेगी। इससे दवाओं की कमी के कारण जो लोग बाहर भटकते हैं, उसमें राहत मिलेगी।

दरअसल सीजीएमएससी को दवा खरीदी के बाद टेस्टिंग फिर सप्लाई में 150 से 160 दिन लग जाते हैं। इस वजह से दवा का स्टॉक अस्पतालों तक पहुंचने में देरी होती है। अभी तक मार्च-अप्रैल में लिस्ट जाती थी। अंबेडकर अस्पताल में पिछले छह महीने से दवाओं की जबरदस्त कमी बनी हुई है। यहां सर्दी-जुकाम और गैस की सामान्य दवाएं तक छह महीने से नहीं है।

यही व्यवस्था पूरे प्रदेश में करेंगे लागू
सीजीएमएससी के अफसरों का कहना है कि पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में यही सिस्टम लागू करेंगे। सभी हेल्थ सेंटरों को पत्र लिखकर उनसे अगले के अंत तक दवाओं तक लिस्ट और जरूरत का स्टॉक मांगा जाएगा। सीजीएमएससी के एमडी अभिजीत सिंह का कहना है दवाओं की लिस्ट जितनी जल्दी मिल जाएगी, हमें प्रक्रिया पूरी करने के लिए उतना समय मिल जाएगा।

अंबेडकर में 25 करोड़ की दवा
अंबेडकर अस्पताल में हर साल औसतन 25 से 27 करोड़ तक की दवाओं की जरूरत पड़ती है। इसमें कैंसर की 10 करोड़ से ज्यादा की दवा शामिल है। बाकी अस्पतालों और हेल्थ सेंटरों में अौसतन 80 से 100 करोड़ की दवाओं की जरूरत पड़ती है।

सूचर और बैंडेज तक का स्टॉक खत्म
सूचर और बैंडेज तक का स्टॉक खत्म हो चुका है। इसके खुलासे के बाद बवाल मचा और स्वास्थ्य मंत्री से लेकर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने हस्तक्षेप किया और तुरंत दवा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। तात्कालिक राहत के लिए अस्पताल प्रबंधन को 2 करोड़ दिए गए हैं। उन पैसों से मरीजों की दवाएं लोकल पर्चेस से खरीदी जा रही है, लेकिन ये पर्याप्त नहीं है।

सीजीएमएससी के पत्र के बाद तैयार की जा रही लिस्ट: डीएमई
चिकित्सा शिक्षा संचालक डा. विष्णु दत्त का कहना है सीजीएमएससी से चिट्‌ठी आने के बाद दवाओं की लिस्ट तैयार की जा रही है। सभी विभागों को पत्र भेजकर कह दिया गया है कि अगले साल की जरूरत की दवाओं की सूची उपलब्ध कराएं। अक्टूबर में लिस्ट भेज दी जाएगी।

ऐसे लग जाते हैं दवा खरीदी की प्रक्रिया पूरी करने में 150 से 160 दिन

  • दवा का बजट मिलने पर पहले अस्पतालों से दवाओं की लिस्ट मांगी जाती है।
  • फिर टेंडर जारी कर उसे भरने कंपनियों को 30 दिन का समय दिया जाता है।
  • टेंडर जमा होने पर 15 दिन सीजीएमएससी में उसका परीक्षण किया जाता है।
  • किसी के दस्तावेज कम होने पर दवा-आपत्ति मंगवाते हैं। इसमें 7 दिन लगते हैं।
  • दावा आपत्ति का निराकरण करने के 2-3 दिन बाद प्राइस बीट खोली जाती है।
  • फिर 15 दिन में ये पता लगाते हैं यहां डाली गई कीमत अन्य राज्यों से ज्यादा तो नहीं?
  • कीमत स्पष्ट होने पर कंपनी को सप्लाई के लिए 60 दिन का समय दिया जाता है।
  • दवाओं की सप्लाई के बाद अलग-अलग वेयर हाऊस से सैंपल लैब भेजे जाते हैं।
  • सरकारी और प्राइवेट लैब से टेस्टिंग रिपोर्ट आने में 25 से 30 दिन लग जाते हैं।
  • दवा की रिपोर्ट ओके होने के बाद ही अस्पतालों में स्टॉक पहुंचाया जाता है।
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