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पहल:स्मार्ट सिटी के काम की ऑडिट अब लोग करेंगे, देश में ऐसा करने वाला पहला स्मार्ट शहर होगा रायपुर

रायपुरएक महीने पहले
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फाइल फोटो।

स्मार्ट सिटी रायपुर के अब तक बनाई गई सारी परियोजनाओं का ऑडिट अब शहर की जनता की करेगी। जनता बताएगी कौन सा काम शहर के लिए उपयोगी रहा है कौनसा नहीं? पूरे देश के सौ स्मार्ट शहरों में पहली बार ये पहल रायपुर स्मार्ट सिटी करने जा रही है। जिसके जरिए बीते चार साल के सभी कामों का आंकलन जनता से करवा जाएगा। इसकी रूपरेखा अभी शुरूआती चरण में है, जिस पर विस्तृत एक्शन प्लान जल्द ही बनाया जाएगा। सोमवार को मेयर एजाज ढेबर ने रायपुर स्मार्ट सिटी के आला अधिकारियों को तलब कर रायपुर स्मार्ट सिटी का वर्क प्लान मांगा है। गौरतलब है, सिटी वर्क प्लान के जरिए ही देश के शहरों में स्मार्ट सिटी बनाने के लिए रायपुर को चुना गया। सिटी वर्क प्लान में दिए गए काम अब तक पूरे क्यों नहीं हो पाए हैं। कहां और क्या दिक्कत आ रही है, मेयर ने इसका ब्योरा भी मंगवाया। मिली जानकारी के मुताबिक मेयर ने अधिकारियों को तालाब के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की योजना जमीन पर क्यों नहीं उतारी जा सक रही है। इसके बारे में भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। दरअसल, शहर में सौ से ज्यादा तालाबों के लिए करीब डेढ़ साल पहले एक बड़ा प्लान बनाया गया था। इस प्लान को बाद में बदल दिया गया। मेयर एजाज ढेबर के मुताबिक स्मार्ट सिटी की योजनाओं में बार बार बदलाव क्यों हो रहा है। पानी, सड़क, पार्किंग, बाजारों के रेनोवेशन, चौपाटी, तालाब की साफ सफाई जैसे कामों के टेंडर बार बार क्यों निकाला जा रहे हैं। इसके बारे में भी विस्तार से रिपोर्ट देने के लिए मैंने अधिकारियो से कहा है।

कामकाज का तरीका बदलेगा
स्मार्ट सिटी में बीते कुछ सालों से बहुत सारे काम बीओडी यानी अधिकारियों की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठकों के जरिए हो रहे हैं। मेयर एजाज ढेबर ने इस तरीके को बदलने के लिए कहा है, उन्होंने कहा है कि बीओडी में जाने से पहले प्लान का अप्रूवल जनप्रतिनिधियों और जनभागीदारी वाली फोरम की मंजूरी लेने का सिस्टम बनाया जाए, इसके लिए भी कहा गया है। ताकि कोई भी काम ऐसा न हो सके जिसके बारे में आमलोगों और जनप्रतिनिधियों को पता ही न हो।

रायपुर स्मार्ट सिटी में अब तक कुल जमा 57 काम

  • 20 प्रोजेक्ट पूरे
  • 15 प्रोजेक्ट काम चल रहा
  • 22 नए प्रोजेक्ट टेंडर आदि प्रक्रिया से गुजर रहे

63 हजार लोगों की रायशुमारी से प्रतियोगिता जीती ,बाद में आम जनता को ही भूल गए
स्मार्ट सिटी रायपुर ने चार साल पहले शहरों के बीच स्मार्ट सिटी मिशन के लिए की गई प्रतियोगिता में 63 लोगों से रायशुमारी की, लेकिन स्मार्ट सिटी मिशन हासिल के बाद धीरे धीरे इसमें जनता की भूमिका को समेट दिया गया। जनता की भूमिका केवल जागरूकता अभियान और समय समय पर होने वाली विभिन्न प्रतियोगिताओं जैसे स्वच्छ भारत मिशन, ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स जैसे कामों तक समेट कर रख दिया गया।

एनजीओ कर रहे प्रतिनिधित्व
रायपुर स्मार्ट सिटी की जनता की भागीदारी वाली फोरम में जनता का हिस्सा नहीं के बराबर है। इसमें जनप्रतिनिधियों के अलावा जनता की आवाज के प्रतिनिधित्व के लिए केवल एक ही गैर सरकारी संगठन यानी एनजीओ को रखा गया है। स्मार्ट सिटी में इस तरह के नियम क्यों बनाए गए। इसको लेकर भी अब सवाल उठ रहे हैं। जानकार भी कहते हैं कि जनता के लिहाज से उपयोगी प्रोजेक्ट तभी बन सकते हैं जबकि जनता से राय को तरजीह दी जाए।

"बूढ़ातालाब हो या गंज मंडी का प्रोजेक्ट जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप से ही विवाद टला है। आखिर कोई भी प्रोजेक्ट जनता और जनप्रतिनिधियों की राय जाने बिना कैसे उपयोगी बन सकता है। जनता बताएगी कि कौन का काम सही हुआ, कौन सा नहीं।"
-एजाज ढेबर, महापौर रायपुर

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