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‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना’ एक जून से:धान के बदले वृक्षारोपण करें, सरकार देगी तीन साल तक प्रति एकड़ 10-10 हजार रुपए; धान की खेती छोड़ने के लिए प्रोत्साहन

रायपुर18 दिन पहले
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छत्तीसगढ़ में धान के बदले वृक्षारोपण को अधिक से अधिक प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार एक जून से ‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना’ लागू करने जा रही है। इसमें हर छत्तीसगढ़िया अपनी निजी भूमि की उपलब्धता अनुसार तथा सभी ग्राम पंचायत एवं संयुक्त वन प्रबंधन समितियां योजना का लाभ लेने के पात्र होंगी।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में 18 मई को मंत्रिमंडल ‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना’ को मंजूरी दी थी। इस योजना में जिन किसानों ने खरीफ वर्ष 2020 में धान की फसल ली है, यदि वे धान फसल के बदले अपने खेतों में वृक्षारोपण करते हैं, तो उन्हें आगामी 3 वर्षों तक प्रतिवर्ष 10 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसी तरह ग्राम पंचायतों के पास उपलब्ध राशि से यदि वाणिज्यिक वृक्षारोपण किया जाएगा, तो एक वर्ष बाद सफल वृक्षारोपण की दशा में संबंधित ग्राम पंचायतों को शासन की ओर से 10 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इससे भविष्य में पंचायतों की आय में वृद्धि हो सकेगी।

इसके अलावा संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के पास उपलब्ध राशि से यदि वाणिज्यिक आधार पर राजस्व भूमि पर वृक्षारोपण किया जाता है, तो पंचायत की तरह ही संबंधित समिति को एक वर्ष बाद 10 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। योजना के तहत नागरिकों द्वारा स्वयं रोपित वृक्षों को परिवहन और कटाई अनुज्ञा की अनिवार्यता से मुक्त करने के लिए भारत सरकार एवं राज्य में लागू प्रावधानों के अनुरूप ही नियम बनाए जाएंगे। राजस्व विभाग नियमों में इसके लिए नियमों में संशोधन किया जाएगा। राज्य में योजना का क्रियान्वयन प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख और कृषि उत्पादन आयुक्त की सहभाागिता से किया जाएगा। पंचायतों की माली हालत सुधरेगी निजी क्षेत्र, कृषकों, शासकीय विभागों एवं ग्राम पंचायतों को भूमि पर ईमारती, गैर-ईमारती प्रजातियों के वाणिज्यिक-औद्योगिक वृक्षारोपण को प्रोत्साहित किया जाएगा।

इसी तरह कृषकों की आय में वृक्षारोपण के माध्यम से वृद्धि करते हुए उनके आर्थिक, सामाजिक स्तर में सुधार लाना है। निजी भूमि पर रोपित तथा पूर्व से खड़ा वृक्षों के पातन तथा काष्ठ के परिवहन नियमों को सुगम बना कर, नागरिकों को निजी भूमि पर रोपण हेतु आकर्षित करना है। इसी तरह निजी तथा सामुदायिक भूमि पर वृक्षारोपण को बढ़ावा देने, काष्ठ का उत्पादन बढ़ाकर काष्ठ के आयात में उत्तरोत्तर कमी लाना तथा वनों में उपलब्ध काष्ठ पर जैविक दबाव को कम करते हुए वनों को सुरक्षित रखना है।

12.80 लाख बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण, संग्राहकों को मिलेंगे 512 करोड़
कोरोना संक्रमण की विपरीत परिस्थितियों के बाद भी 12 लाख 80 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण किया गया। इस तरह 12 लाख 9 हजार संग्राहकों को इसके लिए 512 करोड़ रुपए का पारिश्रमिक प्रदान किया जाएगा। जब पूरे देश में तेंदूपत्ता संग्रहण की दर में कमी आई है तो वहीं दूसरी आेर प्रदेश में यह आंकड़े काफी उल्लेखनीय हैं। मई महीने में बस्तर संभाग में लगातार बारिश के बाद भी 28 मई स्थिति में 4,24,118 मानक बोरा का संग्रहण किया जा चुका है जो कि लक्ष्य का 84 प्रतिशत है। संग्रहण से बस्तर संभाग में 170 करोड़ रुपये संग्रहण पारिश्रमिक का भुगतान किया जा रहा है।

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