जॉइंट को-ऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक:साइबर क्राइम की रोकथाम के लिए राजधानी में जुटेगी 6 राज्यों की पुलिस

रायपुर15 दिन पहले
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छत्तीसगढ़ में पहली बार साइबर को-ऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक होने वाली है। - Dainik Bhaskar
छत्तीसगढ़ में पहली बार साइबर को-ऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक होने वाली है।

साइबर अपराध पर रोकथाम के लिए 23 अक्टूबर को राजधानी में छत्तीसगढ़ सहित छह राज्यों की पुलिस जुटेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों के समन्वय में होने वाली इस महत्वपूर्ण मीटिंग में जामताड़ा और उसी की तरह अन्य गिरोहों को खत्म करने की रणनीति बनाई जाएगी।

इसकी तैयारियों के संबंध में स्पेशल डीजी आरके विज ने बुधवार को पुलिस मुख्यालय में सभी जिलों के साइबर सेल के अधिकारियों की बैठक ली। इस दौरान अब तक दर्ज किए गए अपराध और अपडेट रिपोर्ट पर बात की। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा देश के सभी राज्यों को अलग-अलग जॉइंट साइबर को-ऑर्डिनेशन टीमों में बांटा गया है।

छत्तीसगढ़ के साथ-साथ उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और वेस्ट बंगाल जामताड़ा रीजन में आते हैं। इन सभी राज्यों के नोडल अधिकारी राजधानी में जुटेंगे। गृह मंत्रालय के भी कुछ अधिकारी शामिल होंगे। इस दौरान सभी राज्यों के अफसर अपनी रिपोर्ट रखेंगे। केस स्टडी के साथ अपराध की रोकथाम पर बात की जाएगी।

स्पेशल डीजी विज ने इस संबंध में सभी जिलों के साइबर सेल के प्रभारियों की मीटिंग लेकर रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जिले में एफआईआर दर्ज करने में देरी पर नाराजगी जताई। इसके विपरीत दूरदराज के जिलों द्वारा ठगी के तत्काल बाद एफआईआर दर्ज कर जांच करने पर तारीफ भी की।

साइबर कैडर की नियुक्तियों में भी छत्तीसगढ़ पीछे, सिर्फ अभी तीन एसआई
साइबर अपराध की रोकथाम के लिए पुलिस गंभीर है, लेकिन नियुक्तियों के मामले में गंभीर नहीं है। छत्तीसगढ़ में फिलहाल साइबर कैडर के तीन सब इंस्पेक्टर हैं। पुलिस मुख्यालय स्थित एकलौते साइबर थाने में कम्प्यूटर कैडर के इंस्पेक्टर की नियुक्ति की गई है, जबकि पात्रता के बावजूद तीनों सब इंस्पेक्टर को प्रमोट नहीं किया जा सका है। पुलिस मुख्यालय द्वारा बार-बार गृह विभाग को प्रस्ताव दिया जाता है, लेकिन इस पर कोई कार्यवाही नहीं हो पाती।

शासन से मंजूरी नहीं, अटके सभी रेंज के साइबर थाने
छत्तीसगढ़ में पहली बार साइबर को-ऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक होने वाली है, जबकि यहां शासन की मंजूरी नहीं मिलने के कारण पांच रेंज में साइबर थाने नहीं खुल पाए हैं। सीएम भूपेश बघेल ने बजट में इसकी घोषणा की थी, लेकिन वित्तीय और प्रशासकीय स्वीकृति, सेटअप आदि के लिए अब तक ये शुरू नहीं हो पाए हैं। ज्यादातर जगहों पर यह शिकायतें हैं कि थानों में अपराध दर्ज करने के बजाय लिखित शिकायत ली जाती है, जबकि साइबर ठगी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है।