सड़क पर छत्तीसगढ़ का बेरोजगार:नौकरी मिलती तो आज सब इंस्पेक्टर होते, लेकिन अब भीख मांग रहे; कहा- ये रुपए सरकार को देंगे ताकि उससे रुकी भर्ती शुरू हो सके

रायपुर6 महीने पहले

वक्त पर भर्ती हो जाती तो कंधों पर दो सितारे होते। कानून व्यवस्था संभालने का जिम्मा होता, लेकिन अब रायपुर की सड़क पर लोगों के सामने हाथ फैला रहे हैं। ये सभी सब इंस्पेक्टर भर्ती के कैंडिडेट हैं। 2018 की भर्ती प्रक्रिया रुकी होने की वजह से नाराज हैं। भीख मांग कर सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा निकाल रहे हैं। युवकों ने ये भी कहा कि भीख में मिले रुपयों को सरकार को भेजेंगे, जिससे रुकी भर्ती प्रक्रिया शुरू हो सके और उन्हें रोजगार मिले।

सभी ने सब इंस्पेक्टर भर्ती रुकी होने का पोस्टर पहन रखा था।
सभी ने सब इंस्पेक्टर भर्ती रुकी होने का पोस्टर पहन रखा था।

कैंडीडेट्स सोमवार को रायपुर के घड़ी चौक पर जमा हुए। एक उम्मीदवार अभिषेक चौबे ने बताया कि आवेदन करने के बाद से ही पुलिस भर्ती रुकी है। इसकी तैयारी के लिए बहुत से युवकों ने पुरानी नौकरी छोड़ दी। फिजिकल फिटनेस बनाने और रिटर्न एग्जाम की तैयारी करने लगे। आलम ये है कि कई लड़कियों की शादी हो गई, बच्चे हो गए, पर भर्ती नहीं हो सकी। अब आस में लड़कियां मैदान में सेल्फ ट्रेनिंग करती हैं। कई युवकों की उम्र बढ़ रही है। आर्थिक रूप से भी कई परिवार परेशानी झेल रहे हैं।

युवकों ने बताया कि कई बार शिकायत की मांग का ज्ञापन सौंपा किसी ने नहीं सुनी।
युवकों ने बताया कि कई बार शिकायत की मांग का ज्ञापन सौंपा किसी ने नहीं सुनी।

भाजपा सरकार में निकली थी भर्ती, 1.27 लाख ने किया था आवेदन

भाजपा शासनकाल में 2018 में 655 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें सूबेदार, सब इंस्पेक्टर, प्लाटून कमांडर जैसे अलग-अलग पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इसके लिए 1 लाख 27 हजार से ज्यादा युवकों ने आवेदन किया था। कुछ महीने बाद ही चुनाव होने की वजह से प्रक्रिया अटक गई। फिर सरकार बदली तो भर्ती पर रोक लगा दी गई। कारण क्या है ये भी उम्मीदवारों को नहीं बताया गया। अगस्त 2021 में इस भर्ती के आवेदन जमा किए तीन साल हो जाएंगे।

भीख में मिले रुपए सरकार को दिए जाएंगे।
भीख में मिले रुपए सरकार को दिए जाएंगे।

मंत्री मिलते नहीं, मिलते हैं तो कहते हैं, देखते हैं... करते हैं
पुलिस भर्ती के इन उम्मीदवारों ने बताया कि सरकार के हर छोटे-बड़े मंत्री से मुलाकात कर चुके हैं। मगर कोई इनकी जायज मांग की तरफ ध्यान नहीं देता। मुलाकात मुश्किल से हो भी जाए तो मंत्री बस यही कहते हैं देखते हैं...करते हैं। ये पहली ऐसी भर्ती है, जो बिना किसी वाजिब कारण के रोक दी गई है। ऐसा भी नहीं है कि इस भर्ती से कोई विवाद जुड़ा हो या कोई शिकायत हाईकोर्ट में हुई जो जैसा कि कई भर्ती प्रकरणों में होता है। सभी अभ्यर्थी अब आश्वासन नहीं जल्द से जल्द भर्ती चाहते हैं।

कब मिलेगी वर्दी जल्दी करो भर्ती ।
कब मिलेगी वर्दी जल्दी करो भर्ती ।
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