यादें / विद्याचरण, अर्जुन सिंह, नंदकुमार पटेल जैसे दिग्गजों से जुड़े सियासी किस्से

Political stories related to veterans like Vidyacharan, Arjun Singh, Nandkumar Patel
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Political stories related to veterans like Vidyacharan, Arjun Singh, Nandkumar Patel

  • 1980 में जोगी ने चुनाव लड़ने के लिए वीसी के पक्ष में फैसला दिया तो जोगी को कहा- थैंक्यू! इस एहसान का बदला चुकाऊंगा
  • 1990 में जब जोगी ने याद दिलाकर मदद मांगी तो वीसी ने कहा- मैंने प्रशासक जोगी को वचन दिया था राजनेता जोगी को नहीं

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 05:56 AM IST

रायपुर. किस्सा कुर्सी का मामले में विद्याचरण अभियुक्त थे
1980 में किस्सा कुर्सी का मामले में संजय गांधी और विद्याचरण शुक्ल अभियुक्त थे। विद्याचरण शुक्ल चुनाव लड़ने योग्य हैं या नहीं, यह तब अजीत जोगी को तय करना था। कई जगह से दबाव आया कि वीसी शुक्ल का कैरियर खत्म हो जाएगा यदि उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया, लेकिन अंतत: अजीत जोगी ने कहा कि फैसला जनता की अदालत करेगी, वे चुनाव लड़ेंगे। वीसी शुक्ल वहीं थे। वे खड़े हुए और थैंक यू बोलकर चले गए। बाद में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अजीत जोगी से कहा कि जीवन में मौका आने पर आपके इस एहसान का बदला चुकाउंगा। अजीत जोगी के इस फैसले को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई, जहां उनके फैसले को सही माना गया।

एक सीट के लिए लड़ रहे थे दोनों
1990 के दशक में अजीत जोगी का राज्यसभा के लिए चुना जाना अप्रत्याशित घटना थी। प्रधानमंत्री नरसिंह राव को फैसला करना था। जोगी, अर्जुन सिंह और सिंधिया के समर्थक माने जाते थे। अर्जुन सिंह से नरसिंह राव की नहीं बनती थी। इधर, वीसी शुक्ल जोगी का प्रखर विरोध कर रहे थे। पीवी नरसिंहराव को बताया गया कि जोगी आईएएस, आईपीएस रहे हैं, आदिवासी हैं, प्रखर वक्ता हैं इत्यादि। नरसिंह राव ने ब्राजील जाकर वहां से नाम भेजा, जिसमें जोगी  का नाम का था।

अर्जुन सिंह से कहा- जो जीता वही सिकंदर
1988 में खरसिया से मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह विधानसभा चुनाव में जशपुर के राजा दिलीप सिंह जूदेव के खिलाफ खड़े हुए। उन्हें लोग बहुत मानते थे। अर्जुन सिंह ने अजीत जोगी से पूछा, क्या स्थिति है। जोगी ने कहा कि स्थिति खराब है। बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। मेहनत की। 8500 वोटो से जीते। अर्जुन सिंह दुखी थे। बोले- हम 10 हजार का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए। जोगी बोले-सर, जीत जीत होती है। चाहे एक वोट से हो। जो जीता वही सिकंदर।

नंदकुमार पटेल के बारे में ये बताया
अर्जुन सिंह के उपचुनाव के दौरान वीसी शुक्ल खिलाफ में प्रचार करने गए थे। तब नंदकुमार पटेल ने पूरे खरसिया में एक भी माइक उन्हें उपलब्ध होने नहीं दी, जिससे वीसी सभा नहीं कर पाए। अर्जुन सिंह ने पूछा, ऐसे कैसे हुआ। तब अजीत जोगी ने उन्हें नंदकुमार पटेल के बारे में बताया। अगली बार विधानसभा चुनाव हुए, तो अर्जुन सिंह,  अजीत जोगी और जगतपाल तीनों नंदकुमार पटेल के नाम पर राजी हुए।

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