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रायपुर की 80 किमी सड़कों पर 40 से ज्यादा गड्ढे:एबीडी एरिया की सूखी सड़कों पर दिख जाते हैं गड्ढे लेकिन बारिश में ऐसे लबालब कि कारें आधी डूब जाएं

रायपुर2 दिन पहले
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खालसा स्कूल तिराहा में बीच सड़क में है यह हाल। - Dainik Bhaskar
खालसा स्कूल तिराहा में बीच सड़क में है यह हाल।

राजधानी की 777 एकड़ के एबीडी एरिया की लगभग 80 किमी की सड़कों 40 से ज्यादा जगहों पर छोटे-बड़े गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं। ये गड्ढे सरकारी एजेंसियों ने ही छोड़े हैं। कोई गड्ढा इसलिए छोड़ा कि वाटर सप्लाई का कनेक्शन करना है। कुछ गड्ढे टेलीकाम एजेंसियों ने केबल के लिए छोड़े हैं। कुछ अमृत मिशन की पाइपलाइन टेस्टिंग के गड्ढे भी हैं। ये गड्ढे हालांकि सालभर खतरनाक हैं, लेकिन बारिश के पानी में डूबकर आफत बन गए हैं। इनमें गाड़ियां तो फंस ही रही हैं, पानी भरा हो तो पैदल लोग भी गिरने लगे हैं।

नगरीय प्रशासन विभाग के भीतर ही राजधानी में तीन एजेंसियां काम कर रही हैं। स्मार्ट सिटी, अमृत मिशन योजना और खुद नगर निगम। तीनों ही एजेंसियां वाटर सप्लाई से संबंधित काम कर रही हैं। एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, लेकिन कामों में कनेक्शन का अभाव है। इसलिए एक एजेंसी खोदकर गड्ढा भरती है, कुछ दिन में दूसरी भी वहीं खुदाई कर देती है।

इसीलिए शहर की सड़कों पर खतरनाक गड्ढे नजर आ रहे हैं।दैनिक भास्कर की टीम ने मंगलवार को शहर के एबीडी एरिया में आने वाली लगभग 80 किलोमीटर सड़क का मुआयना कर गड्ढे देखे। इनमें कुछ नाले भी हैं, जो सड़क के बीच से गुजर रहे हैं और कवर लगे थे, लेकिन निकल गए।

शहर की सड़कों पर पांच साल में 60 करोड़ खर्च, फिर भी गड्ढे और खुले चैंबर

स्मार्ट रायपुर के नाम पर राजधानी में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के लिए सरकारी एजेंसियों ने करोड़ों रुपए फूंक दिए। लेकिन सड़क जैसी मूलभूत सुविधा की स्थिति ने रायपुर स्मार्ट सिटी की हकीकत बयां कर दी। पिछले पांच सालों में शहर की सड़कों पर 60 करोड़ से ज्यादा खर्च करने का दावा सरकारी एजेंसियों की ओर से किया जा रहा है लेकिन जगह-जगह उखड़ी सड़कें एजेंसियों की दावे उधेड़ रही हैं।मोतीबाग रोड में सड़क की ऊपरी परत बारिश में पूरी तरह धुल गई हैं।

संतोषी नगर रोड, आमापारा, विवेकानंद आश्रम के पास, फाफाडीह से मोदहापारा जाने वाली केके रोड में कई जगहों पर धूल उड़ रही है। इन्हीं सड़कों में ढाई साल पहले डामरीकरण किया गया था और उसके बाद कई बार मरम्मत के नाम पर डामर की परत चढ़ाई गई थी। शहर में नालों के खुले कवर हादसों को बुलाने के लिए मुंह फाड़े हुए हैं। खालसा स्कूल के पास चैंबर खुला हुआ है। जीई रोड में बांबे मार्केट के पास का चैंबर खुला है।

बारिश न हो तो भी खतरा, अगर हो जाए तो गाड़ियां भी न बचें

पंडरी कपड़ा मार्केट। शहर का सबसे व्यस्त और व्यावसायिक इलाका। बलौदाबाजार रोड से देवेंद्र नगर, आफिसर्स कालोनी जाने वाली इस सड़क में ठीक पंडरी कपड़ा मार्केट के पास बडा गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है। कारोबारियों का कि कुछ दिन पहले यहां पर पाइपलाइन का कुछ काम किया गया था। काम होने के बाद गड्ढे को भरे बगैर वैसे ही छोड़ दिया गया है। रात में आते-जाते लोग यहां गिरते रहते हैं। अभी बारिश में पानी भरने के बाद तो कई लोग गाड़ियों समेत गिर रहे हैं।

अफसरों को इस संबंध में शिकायत की गई, अब तक गड्ढे को बंद ही नहीं किया गया। यहां से आगे बढ़कर पंडरी पकड़ा मार्केट, हाट बाजार होते हुए सिटी सेंटर मॉल के सामने देवेंद्र नगर वाली रोड में भी एक जगह गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है। रात के समय में कई बार गड्ढा नहीं दिखने की वजह से लोग यहां पर गिरते रहते हैं। दैनिक भास्कर की टीम सिटी सेंटर से आगे बढ़ते हुए देवेंद्र नगर चौराहा, फाफाडीह, स्टेशन रोड अंडरब्रिज होते हुए गुढ़ियारी पहुंची।

यहां भी कदम-कदम पर गड्ढे हैं। अमृत मिशन के तहत इस इलाके में पाइपलाइन बिछाई गई है। गुढ़ियारी मेन रोड, जनता कालोनी, भारत माता चौक, कोटा में कई जगहों पर गड्ढे अब तक नहीं भरे गए हैं। भारतमाता चौक से टीम भैंसथान होकर अग्रसेन चौक के पास पहुंची। यहां पर चौक से ठीक पहले बड़ा सा गड्ढा है। इस गड्ढे के कारण चौक के पास आए दिन जाम के हालात रहते हैं। लोगों ने बताया कि टेलीकाॅम एजेंसी ने केबल के लिए खोदा।

बारिश होने लगी तो छोड़ दिया। यहां से टीम जीई रोड होते हुए इंडियान काफी हाउस के पास पहुंची। पुराने काफी हाउस के सामने कई दिनों से गड्ढा खुला छोड़ दिया गया है। निगम अफसरों के मुताबिक बारिश का पानी निकल जाए, इसलिए खोदना पड़ा। तेज बारिश में यहां और आसपास इतना पानी भरता है कि यह गड्ढा दिखता ही नहीं। टीम यहां से कालीबाड़ी, टिकरापारा होते हुए संतोषी नगर अंडरब्रिज के पास पहुंची। यहां पर भी दो-तीन जगहों पर छोटे-छोटे गड्ढे नजर आए।