एनआईटी का 12वां दीक्षांत समारोह:सीखने का मौका देती हैं महामारी जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएं

रायपुर2 महीने पहले
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एनआईटी का 12वां दीक्षांत बुधवार को वर्चुअली रखा गया। समारोह में 832 स्नातकों, 222 पोस्ट ग्रेजुएट्स और 75 पीएचडी रिसर्चर सहित कुल 1129 छात्रों को डिग्री दी गई। 28 स्टूडेंट्स को गोल्ड और 23 को सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया। बीटेक की ओवरआल टॉपर कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट की हर्षिता शर्मा काे दो मेडल से नवाजा गया।समारोह के मुख्य अतिथि इसरो के चीफ और अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. के. शिवन रहे। उन्हाेंने स्टूडेंट्स को बधाई दी और उनकी जिम्मेदारियां समझाईं।

उन्होंने कहा, वर्तमान में आपके सामने घातक महामारी, कठोर जलवायु परिवर्तन और आर्थिक संकट जैसी चुनौतियां हैं। ये समस्याएं युवाओं को परिस्थितियों से ऊपर उठने के लिए सीखने का अवसर देती हैं। समारोह में एनआईटी के निदेशक डॉ. एएम रावाणी ने इंस्टीट्यूट के अचीवमेंट बताए। इस मौके पर डीन अकादमिक डॉ श्रीश वर्मा, कुलसचिव डॉ आरिफ खान और सीनेट मेंबर सहित अन्य मौजूद रहे।

ओवरऑल टाॅपर हर्षिता को मिले दो गोल्ड टाॅपर हर्षिता शर्मा को 9.99 सीजीपीए मिले हैं। वे 12वीं में 98.2% के साथ देशभर में 6वे स्थान पर थीं। मूलरूप से आगरा की रहने वाली हर्षिता ने बताया, टीचर्स, सीनियर्स और फ्रेंड्स के सपोर्ट से पढ़ाई की। सुबह 9 से शाम 6 बजे तक कॉलेज जाती और शाम 7 बजे से सेल्फ़ स्टडी करती। मेरा इंडिया यूथ डेलिगेशन के लिए सलेक्शन हुआ था, लेकिन कोरोना के कारण वो कैंसल हो गया। कोविड के दौर में रोज ऑनलाइन क्लास अटैंड की। अभी हायर स्टडी और रिसर्च पेपर की तैयारी कर रही हूं। फाउंडेशन डे पर उन्हें केके सुगंधि अवाॅर्ड भी मिला। पिता पवन शर्मा प्रोजेक्ट मेनेजर हैं। मम्मी रंजना होममेकर हैं।

अमृतमय ने बनाया ड्रोन, ये 2 किलो वजनी साामान डिलीवर कर सकता है, थ्रीडी प्रिंटर भी किया तैयार बायो मेडिकल डिपार्टमेंट के अमृतमय बिस्वास को डिपार्टमेंटल गोल्ड मेडल मिला। उन्होंने बताया, शुरू से ही पढ़ाई पर फोकस किया। प्रैक्टिकल स्टडी भी की। पढ़ाई के दौरान मेडिसिन जैसे छोटे सामान डिलीवर करने ऑटोमेटिक ड्रोन बनाया था। ये 2 किलो तक का सामान ले जा सकता है। कैंपस के मेकर स्पेस में 3डी प्रिंटर भी बनाया, जो अभी यूज भी किया जा रहा है। अभी आईआईटी कानपुर से पीएचडी कर रहा हूं।

इस तिकड़ी से भारत बन सकता है आत्मनिर्भर

इसरो चीफ डॉ. के. शिवन ने कहा, स्टार्टअप्स, इन्क्यूबेटर्स और एकेडमी की तिकड़ी आत्मनिर्भर भारत को आकार देने में प्रमुख भूमिका निभा सकती है। रिसर्च और सतत विकास के लिए भारी निवेश, क्रांतिकारी इनोवेशन और तकनीकी क्षमता का निर्माण महत्वपूर्ण है। अर्थव्यवस्था संचालित करने के लिए इनोवेशन हमारा मूल मंत्र होना चाहिए। जो लोग इनोवेटर बनना चाहते हैं या स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं उनके लिए अपार अवसर हैं। उन्हें एयरोस्पेस, रक्षा, साइबर सुरक्षा और आईटी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

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