ब्रिटेन से लौटे 4 लोगों के सैंपल भेजने में लापरवाही:सैंपल माइनस 70 डिग्री में भेजना था पुणे, ड्राई आइस के इंतजाम में 3 दिन बर्बाद

(पीलूराम साहू) रायपुर2 वर्ष पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।
  • पुणे लैब से आएगी स्ट्रेन-2 की रिपोर्ट, शनिवार को सैंपल भेजते तो अब तक आ जाती
  • केवल इसी देरी के कारण 4 दिन का और इंतजार

ब्रिटेन से लौटे 4 लोगों के पॉजिटिव सैंपल एम्स से नेशनल वायरोलॉजी लैब समय पर इसलिए नहीं भेजे जा सके, क्योंकि प्रदेश में ड्राय आइस (लिक्विड कार्बन डाइऑक्साइड) आसानी से नहीं मिलता। ब्रिटेन से लौटे ये चारों पाजिटिव पाए गए थे और स्ट्रेन-2 का पता लगाने के लिए उनके सैंपल शुक्रवार की रात सुरक्षित कर लिए गए थे, ताकि शनिवार को पुणे भेजा जा सके।

सैंपल जितने जल्दी पुणे भेजे जाते, रिपोर्ट मिलने का टाइम कम होता जो कारगर रहता। लेकिन इसे भेजने के लिए जरूरी ड्राई आइस तीन दिन तक प्रदेश में नहीं मिला। एम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने 7 से ज्यादा केमिकल प्लांट से बात की। तब जाकर सोमवार को दोपहर ड्राई आइस उपलब्ध हो पाया।

सैंपल सोमवार को दोपहर पैक कर पुणे भेजे गए हैं, लेकिन इस खामी ने प्रदेश में कोरोना के नए स्ट्रेन को लेकर किए गए सतर्कता के दावों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में शुक्रवार को ब्रिटेन से लौटे चार लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। सैंपलों की जांच एम्स में हुई थी।

वायरस का स्ट्रेन नया है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए सैंपल पुणे भेजा जा रहा है। शुक्रवार को जांच हुई तो अगले दिन सैंपल पुणे भेजा जाना था। एम्स प्रशासन सैंपल सुरक्षित भेजने के लिए ड्राई आइस की खोजबीन की। कई वेंडर से संपर्क किया और 7 आइस प्लांट में भी पूछताछ की।

सूत्रों के मुताबिक ज्यादातर लोगों ने यही कहा कि ड्राई आइस चाहिए था तो 10 दिन पहले बताना था। किसी तरह सोमवार को ड्राई आइस उपलब्ध हुआ और सैंपल फ्लाइट से पुणे भेजे गए। दरअसल यह ड्राइ आइस लिक्विड से रैपर बन जाता है इसलिए इसमें सैंपल भेजने में आसानी होती है। दरअसल, इससे पहले राज्य में ड्राई आइस की जरूरत महसूस नहीं की गई। इसलिए किसी काे इसका आइडिया भी नहीं था।

इतना ठंडा कि खून जम जाए
ड्राई आइस का तापमान माइनस 70 डिग्री होने के कारण यह मनुष्य के लिए खतरनाक है। अगर इसमें धोखे से हाथ चला जाए तो नसों का खून जम सकता है। यही नहीं, पूरे शरीर में इंफेक्शन का खतरा हो जाता है। गौरतलब है कि कई कोरोना वैक्सीन को इतने ही तापमान में सुरक्षित बताया जा रहा है। हालांकि छत्तीसगढ़ में माइनस 25 डिग्री वाले फ्रीजर की व्यवस्था की गई है।

क्यों जरूरी है ड्राई आइस
स्वाब का सैंपल पुणे पहुंचने तक खराब न हो, इसलिए इसे सुरक्षित पहुंचाने के लिए ड्राई आइस की जरूरत थी। यह करीब 500 रुपए किलो मिलता है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉक्टरों के अनुसार ड्राई आइस का तापमान माइनस 70 डिग्री होता है। इसमें सैंपल सुरक्षित रह पाता है।

सैंपल वापस न आए, या खराब होने के कारण इसकी जांच टल जाए, इन परेशानियों से बचने के लिए ड्राई आइस जरूरी ही था। सैंपल खराब होने पर संबंधित व्यक्ति का दोबारा सैंपल लेना होगा। इसमें देरी होती चली जाएगी, जिससे बाकी लोग भी खतरे में रहेंगे।

इधर, रायपुर में 191 केस व प्रदेश में 1188 संक्रमित, 26 माैतें भी
छत्तीसगढ़ में सोमवार को 1188 नए कोरोना संक्रमित मिले हैं। इसमें रायपुर जिले के 191 पॉजिटिव शामिल हैं। पिछले 24 घंटे में राजधानी में तीन समेत 26 मौत हुई है। प्रदेश में एक्टिव मरीजों की संख्या में लगातार कमी दर्ज हो रही है। सक्रिय मरीजों की संख्या अब 12962 हो गई है। अस्पताल से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या एक लाख के पास पहुंच रही है। फिलहाल 94 हजार से ज्यादा मरीज अस्पताल में इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं।

आयरलैंड से लौटे दंपती के संपर्क में आए 6 संक्रमित
आयरलैंड से जांजगीर के एक विवाह समारोह में शामिल होने आए तीन लोगों के संपर्क में आए 6 लोग जांच में संक्रमित मिले हैं। नवागढ़ बीएमओ डॉ. विजय श्रीवास्तव ने बताया कि उनके कांटेक्ट में आए लोगों की जानकारी मांगी गई है।

छोटे बच्चों को कोरोना के गंभीर लक्षणों से बचा सकता है निमोनिया का देसी टीका
दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन मैन्युफैक्चरर सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने निमोकोक्कल (निमोनिया) से बचाने वाली भारत की पहली स्वदेशी वैक्सीन ‘निमोसिल’ लॉन्च की है। कंपनी ने बताया कि कोरोना के गंभीर लक्षणों में से निमोनिया भी एक है। अभी दुनियाभर में कोरोना की जो वैक्सीन बन रही हैं, उनके टेस्ट छोटे बच्चों पर नहीं किए गए हैं।

ऐसे में निमोनिया से बचाने वाली वैक्सीन छोटे बच्चों को कोरोना के गंभीर लक्षणों से भी बचा सकती है। निमोकोक्कल ऐसा इन्फेक्शन है, जो बैक्टीरिया की वजह से होता है। यह निमोनिया होने की बड़ी वजहाें में शामिल है। सीरम के कार्यकारी निदेशक डॉ. राजीव ढेरे ने कहा, ‘हम उम्मीद कर सकते हैं कि निमोकोक्कल वैक्सीन बच्चों में गंभीर निमोनिया को रोकने में अहम रोल निभाएगी।’

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