उपलब्धियां बेशुमार, विवाद भी लगातार / सीएसईबी बनाकर छत्तीसगढ़ को दी अपनी बिजली, धान-तेंदूपत्ता खरीदा, शक्कर फैक्ट्री खोली

Purchased its power paddy-tendu leaves, made sugar factory by opening CSEB, opened sugar factory
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Purchased its power paddy-tendu leaves, made sugar factory by opening CSEB, opened sugar factory

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 05:36 AM IST

रायपुर. छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बनने के बाद अजीत जोगी ने छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड का गठन कर लोगों को अपनी बिजली दी तो अटल सरकार के सामने बाल्को विनिवेश का विरोध भी किया। छत्तीसगढ़ में धान और तेंदूपत्ता खरीदी की शुरुआत जोगी ने ही की थी। खस्ताहाल और घाटे में चल रहे राज्य परिवहन निगम को बंद करने का भी अहम फैसला लेकर राज्य के लिए बड़ी राशि बचाई।

  • केंद्र से लड़कर नई विधानसभा के लिए राजीव गांधी जल अनुसंधान केंद्र का भवन लिया। 
  • चंडीगढ़ जैसी 21वीं सदी की नई राजधानी बनाने की शुरुआत कर बड़ा सपना देखा। शिलान्यास किया।
  • काम में तेजी क्या होती है, खमतराई आरओबी बनवाकर दिखाया।
  • रायपुर-बिलासपुर सड़क की दुर्दशा को दूर किया।
  • धान खरीदी की शुरुआत की।
  • तेंदूपत्ता खरीदी की भी शुरुआत की।
  • त्रिवर्षीय चिकित्सा पाठ्यक्रम का नया कांसेप्ट लाया। इसे बाद में केंद्र ने भी मंजूर किया।
  • एक मुख्यमंत्री के रूप में बालको विनिवेश को लेकर तत्कालीन अटल सरकार का लंबा विरोध किया।
  • मध्यप्रदेश से बंटवारे में मिले राज्य परिवहन निगम को घाटे में देखकर बंद करने का फैसला लिया। इस तरह भविष्य की सरकारों की बड़ी चिंता दूर कर दी।
  • भू-अभिलेख के कम्प्यूटरीकरण के लिए भुइयां।
  • मुख्यमंत्री चिह्नित मार्ग नाम देकर ऐसी सड़कों का निर्माण किया गया, जिनकी स्थिति खराब थी। इसके अंतर्गत 4248 किलोमीटर सड़कें बनाई गईं।
  • भोपाल के भारत भवन की तर्ज पर पुरखौती मुक्तांगन की परिकल्पना की गई। 
  • कवर्धा में पहला शक्कर कारखाना शुरू किया गया।
  • नए राज्य के लिए नई उद्योग नीति, खनिज नीति, ऊर्जा नीति, संस्कृति नीति, महिला नीति, सड़क नीति, आवास नीति, पर्यावरण नीति, वन नीति, जल संसाधन विकास, श्रम, बंदी कल्याण व पुनर्वास, परिवहन, खेल और स्वास्थ्य नीति बनाई।

खुद को आदिवासी साबित करने की लंबी लड़ाई, अक्सर राजनैतिक आरोपों के घेरे में
संत कुमार नेताम ने सबसे पहले 27 जनवरी 2001 में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग में जोगी की जाति की शिकायत की थी।

  • आयोग ने 16 अक्टूबर 2001 में जोगी को आदिवासी नहीं मानते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे।
  • जोगी ने 22 अक्टूबर 2001 को आयोग के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने उसी दिन आयोग के फैसले पर रोक लगा दी थी।
  • हाईकोर्ट ने 15 नवंबर 2006 को आयोग के फैसले को यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि आयोग को जाति निर्धारित करने का अधिकार नहीं है।
  • संतकुमार नेताम ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में छत्तीसगढ़ सरकार को उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति बनाने और जांच करने के निर्देश दिए।
  • आईएएस मनोज पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट नए सिरे से जांच कराने सरकार ने वापस ले ली थी।
  • इसके बाद आईएएस रीना बाबा कंगाले की कमेटी ने जोगी को आदिवासी नहीं माना। इस आधार पर बिलासपुर कलेक्टर ने 2017 में जोगी का आदिवासी प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया था।
  • जोगी ने कंगाले की रिपोर्ट को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद डीडी सिंह की अध्यक्षता में एक और कमेटी बनाई गई। इस कमेटी ने भी जोगी को आदिवासी नहीं माना। इस फैसले को जोगी ने कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें फैसला नहीं आया है।

अपनों को आगे बढ़ाने पर भी विवाद
अजीत जोगी अपनों को आगे बढ़ाने के लिए कई बार लीक से हटकर भी फैसला लेते थे, इसलिए कई बार विवादों में रहे। उन्होंने अपने समर्थकों के लिए कई बार पार्टी के बड़े नेताओं की राय को भी दरकिनार किया। पूरे राजनीतिक जीवन में कई ऐसे दौर आए जब वे विवादों में रहे। भाजपा विधायकों के दलबदल का भी आरोप उन पर लगा था।

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