रेजिडेंट डाक्टरों ने मृत्यु पर मांगा शहीद का दर्जा:गवर्नर को लिखे पत्र, डॉक्टरों का आरोप- प्रशासन कर रहा है आइसोलेशन नियमों का उल्लंघन

रायपुर8 महीने पहले
रायपुर मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर इसी प्रारूप में पत्र लिख रहे हैं। इसमें उनकी मृत्यु के बाद शहीद का दर्जा देने की मांग की गई है।

रायपुर स्थित जवाहर लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टरों ने कोरोना ड्यूटी के दाैरान उनकी मृत्यु होने पर शहीद का दर्जा मांगा है। मेडिकल कॉलेज में अधिकतर जूनियर डॉक्टर राज्यपाल को संबोधित ऐसा पत्र लिख रहे हैं। इस पत्र में उन्होंने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर अस्पताल के प्रशासन पर इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के बनाये आइसोलेशन नियमों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया है।

जूनियर डॉक्टर डॉ. गौरव सिंह परिहार ने बताया, नियमों के मुताबिक कोविड ड्यूटी के बाद सात दिनों का आइसोलेशन देना होता है। लेकिन यहां कोविड ड्यूटी के बाद सामान्य ड्यूटी लगा दी जा रही है। इसकी वजह से कोरोना संक्रमण के साथी डॉक्टरों और मरीजों में भी फैलने की प्रबल संभावना होती है। अब तक 110 से अधिक जूनियर डॉक्टर संक्रमित हो चुके हैं। इसके बाद भी सरकार और प्रशासन किसी तरह का इंसेटिव भी नहीं दे रही है।

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता डॉ. प्रेम चौधरी ने बताया कि रेजिडेंट डॉक्टर खुद को बेहद मजबूर पा रहे हैं। ऐसे में अब मेडिकल कॉलेज के डीन, स्वास्थ्य मंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति को पत्र भेज कर अपनी मजबूरी बताएंगे। रायपुर मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार से हड़ताल पर हैं।

हर पत्र व्यक्तिगत हैसियत से

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने राज्यपाल को संबोधित पत्र का मजमून तैयार किया गया है। इसको व्यक्तिगत हैसियत से ही लिखा जाना है। इसमें कहा गया है, “इस वैश्विक महामारी के दौरान मेरे द्वारा अपने स्वास्थ्य व सुरक्षा को प्राथमिकता न देते हुए समाज व देश हित में निरंतर काम किया जा रहा है। अगर जनता और देश हित में काम करते हुए मेरी मृत्यु हो जाती है तो मुझे एक कोविड वॉरियर के तौर पर शहीद का दर्जा देते हुए उनके समकक्ष सम्मान दिया जाये। मेरे परिवार की सामाजिक, नैतिक और आर्थिक सुरक्षा को भी संज्ञान में रखा जाये।”

एक साल में बहुत कुछ कर सकती थी सरकार, लेकिन कुछ नहीं किया

रेजिडेंट डॉक्टर गौरव सिंह ने कहा, एक साल से हम लोग कोरोना से लड़ रहे हैं। सरकार के पास पर्याप्त समय था। इस एक साल में वह एक नया कोविड डेडिकेटेड हॉस्पिटल बना सकती थी। उसके लिये अलग से लोगों की भर्ती कर सकती थी। लेकिन इस एक साल में शासन-प्रशासन की ओर से ऐसा कुछ नहीं किया गया।

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