त्रिपुरा के बाद अब झारखंड भेजे गए बैस:7 बार रायपुर के सांसद रहे रमेश बैस पड़ोसी राज्य के राज्यपाल होंगे; छग की राजनीति पर असर के सवाल पर बोले- भविष्य कोई नहीं जानता

रायपुर4 महीने पहले

छत्तीसगढ़ के रायपुर संसदीय सीट से 7 बार सांसद रहे रमेश बैस अब पड़ोसी राज्य झारखंड के राज्यपाल होंगे। दो साल तक त्रिपुरा के राज्यपाल रहे बैस को राष्ट्रपति ने नई नियुक्ति दी है। अब वे छत्तीसगढ़ जैसी ही सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों वाले झारखंड में सरकार के संविधानिक प्रमुख होंगे। दैनिक भास्कर ने उनके रायपुर आवास में हुई बातचीत में पूछा कि इसका कुछ असर छत्तीसगढ़ की स्थानीय राजनीति पर होगा? तो उन्होंने जवाब दिया- इस बारे में तो कुछ बोल ही नहीं सकते। आगे क्या होगा, भविष्य कोई नहीं जानता।

लंबी राजनीतिक पारी के बाद पहले त्रिपुरा और फिर झारखंड जैसे राज्य के राज्यपाल की जिम्मेदारी को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में रमेश बैस ने कहा, "पहले तो लगा था कि राजनैतिक और संविधानिक काम में क्या अंतर है। दो साल त्रिपुरा में काम करने के बाद संविधानिक पद की जानकारी हो गई है। वहां के अनुभवों के आधार पर झारखंड में उससे भी अच्छा काम करेंगे। ऐसा मुझे विश्वास है। राज्य सरकार के साथ मिलकर झारखंड का विकास हो, वहां के ट्राइबल्स का विकास हो इसकी चिंता करके ज्यादा से ज्यादा केंद्र सरकार की योजनाओं को ले जाकर विकास करेंगे।"

राज्यपाल रमेश बैस दो दिन पहले ही त्रिपुरा से रायपुर अपने घर आए हैं। उन्होंने बताया, त्रिपुरा से हटाकर झारखंड भेजे जाने से पहले उनसे केंद्र सरकार ने कोई बात नहीं की थी। उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं थी। अभी झारखंड जाने का कार्यक्रम तय नहीं हुआ है। जल्दी ही उसको तय कर लिया जाएगा।

गैर भाजपा शासित झारखंड की चुनौतियों से जुड़े सवाल पर राज्यपाल रमेश बैस ने कहा, अभी मैं वहां गया नहीं हूं तो पता नहीं है कि क्या परिस्थितियां हैं। लेकिन, एक राज्यपाल की जो भूमिका होती है उसमें मुझे नहीं लगता कि कोई प्रॉब्लम आएगी। मुख्यमंत्री के साथ बैठकर काम करेंगे। वह हमें सहयोग करेंगे हम उनको सहयोग करेंगे। यह हर सरकार चाहेगी, हर मुख्यमंत्री चाहेगा कि गवर्नर के साथ मिलकर रहेंगे, काम करेंगे तो प्रदेश का विकास होगा। हर कोई चाहेगा कि विकास होना चाहिए।

2019 में राजभवन भेजा गया था
2 अगस्त 1948 को रायपुर में पैदा हुए रमेश बैस 1989 में पहली बार चुनकर संसद पहुंचे थे। तब से वे लगातार 2019 तक रायपुर का प्रतिनिधित्व करते रहे। अटल विहारी वाजपेयी की सरकार में उन्हें वन एवं पर्यावरण मंत्री बनाया गया था। 2014 से पहले तक वे लोकसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक रहे। 2019 में भाजपा ने उनका टिकट काट दिया। इसको लेकर उनके समर्थकों ने खूब हंगामा किया। बैस शांत रहे। जुलाई 2019 में राष्ट्रपति ने उन्हें त्रिपुरा के राजभवन में भेज दिया। इस तरह संसदीय राजनीति में भाजपा के दिग्गज रमेश बैस की भूमिका बदल गई। 29 जुलाई 2019 को उन्होंने कप्तान सिंह सोलंकी की जगह त्रिपुरा के राज्यपाल की जिम्मेदारी संभाली।

एक दिन पहले ही मुलाकात करने पहुंचे थे रमन सिंह
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह एक दिन पहले ही रमेश बैस से मुलाकात करने उनके रायपुर स्थित आवास पर गए थे। इस दौरान प्रदेश की राजनीति पर भी चर्चा हुई। बाद में रमन सिंह ने कहा, राज्यपाल काफी दिनों बाद घर आए थे तो उनके यहां चाय पीने चला गया। यह एक शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान देश-प्रदेश के विभिन्न विषयों पर बात हुई है। झारखंड का राज्यपाल बनाए जाने की सूचना के बाद भी रमेश बैस के निवास पर भाजपा नेताओं की भीड़ लगी रही। कांग्रेस विधायक कुलदीप जुनेजा भी उनसे मिलने पहुंचे थे।

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