ऑनलाइन ठगी का मामला:रिटायर्ड प्राचार्य से 39 लाख की ठगी 3 माह बाद बिहार गिरोह के 3 दबाेचे

रायपुर16 दिन पहले
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ठगी  का मामला - Dainik Bhaskar
ठगी का मामला

बंद बीमा पॉलिसी का पैसा वापस दिलाने का झांसा देकर देशभर में ठगी करने वाला बिहार का गिरोह फूटा है। पुलिस ने दिल्ली में छापा मारकर तीन ठगों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने डंगनिया के रिटायर्ड प्राचार्य उदय रावले से 39 लाख की ठगी की थी।

तीन माह से पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही थी। गिरोह का सरगना गोविंद सिंह फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। पकड़े तीनों आरोपियों से 15 पासबुक, मोबाइल, एटीएम जब्त हुआ है। आरोपियों की पासबुक में सवा करोड़ का ट्रांजेक्शन दिख रहा है।

एडिशनल एसपी तारकेश्वर पटेल ने बताया कि मूलत: बिहार निवासी आयुष सिंह (24), मनीष सिंह उर्फ मंटू (45) और राघवेंद्र सिंह (30) तीनों रिश्तेदार है। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में किराए पर रहते है। तीनों गोविंद सिंह के लिए कमीशन पर काम करते हैं।

गोविंद जिनकी भी बीमा पॉलिसी लंबे समय से बंद है, जिसमें पैसा जमा नहीं हो रहा है, उन्हें फोन करता है। उनका पैसा वापस करने का झांसा देता है। जब लोग झांसे में आ जाते है। उन्हें आयुष, मनीष और राघवेंद्र के खाते का नंबर देता है। प्रोसेसिंग के नाम से खातो में पैसा जमा कराता है।

जब खाते में पैसा आ जाता है, तो उसे निकाल लेते थे। उसका तीन प्रतिशत रखकर बाकी पैसा गोविंद को देते थे। आरोपी पिछले दो साल से लोगों को ऐसे ही ठग रहे हैं। पुलिस ने बताया कि डंगनिया के रिटायर्ड प्राचार्य उदय रावले से आरोपियों ने 39 लाख की ठगी की थी।

रिटायर्ड प्राचार्य ने पकड़े के तीनों आरोपियों के खाते में पैसा जमा किया है। उसी आधार पर पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया है। हालांकि पुलिस तीनों आरोपियों से एक भी पैसा जब्त नहीं कर पाई है। उनकी 15 बैंक पासबुक जब्त की है, जिसमें सवा करोड़ का ट्रांजेक्शन दिख रहा है। पुलिस ने बैंक से आरोपियों की खाते की जानकारी मांगी है। पुलिस के अनुसार गोविंद ही लोगों से बात करता है। वह दूसरों के खाते में पैसा जमा करता है।

15 हजार में खरीदा बीमा कंपनी से डेटा
पड़ताल में पता चला है कि गोविंद ने बीमा कंपनी और बैंक से जुड़े लोगों से 10-15 हजार रुपए में डेटा खरीदा है। दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में डेटा बेचने वाला गिरोह है। जो फायनेंस और बैंक का डेटा बेचते है। प्रति व्यक्ति डेटा 25-50 पैसे में मिलता है।

एक बार में किसी भी कंपनी का 12-14 हजार लोगों का डेटा खरीदा जाता है। उसमें व्यक्ति का नाम, पता, खाता नंबर, बीमा पॉलिसी की जानकारी और नंबर होता है। उसी आधार पर ठग लाइन से लोगों को फोन करते है। उन्हें झांसा देते है, जो उनकी बातों में फंस गया। उसने पैसा ठग लेते है। डेटा बेचने वाले दिल्ली में बहुत सारे बिचौलिए है, जो एक से खरीदकर दूसरे को बेच देते है। रिटायर्ड प्राचार्य की जानकारी भी ठगों को ऐसे ही मिली है।

रिश्तेदारों की पासबुक ले रखी है ठग ने
पुलिस ने बताया कि आयुष, मनीष और राघवेंद्र ने अपने रिश्तेदारों की पासबुक अपने पास रखी है। उन्हें इसका किराया दिया जाता है। जितना भी पैसा जमा होता है, उसकी एक निश्चित राशि खाते वालों को दी जाती है। आरोपियों के पास ऐसे कई खाते है, जिसमें पैसा जमा करते है। जैसे ही पैसा जमा होता है। उसे अलग-अलग जगह से निकाल लेते है।

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