पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

रायपुर में वेंटिलेटर पर कानून व्यवस्था:नाइट कर्फ्यू और लॉकडाउन के बीच नशे का सामान चाहिए तो जय स्तंभ चौक आइए, सब मिलेगा

रायपुर25 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
तस्वीर में दिख रही कारें नशे की चीजों के लिए रुकी हैं। इसी तरह की अड्डे बाजी यहां सड़क पर और अंदर गली में होती रहती है। - Dainik Bhaskar
तस्वीर में दिख रही कारें नशे की चीजों के लिए रुकी हैं। इसी तरह की अड्डे बाजी यहां सड़क पर और अंदर गली में होती रहती है।

रायपुर का जय स्तंभ चौक शहर की पहचान है। अब इस स्मारक के पास नशेड़ियों का जमावड़ा रहता है। लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू के बीच शहर के सबसे बड़े कॉम्प्लेक्स रवि भवन के पास की गली के बाहर आधी रात को लग्जरी कारें रूकती हैं। अंधेरी गली से एक युवक कार के पास आकर जरूरत पूछता है और फिर गली के अंदर से लाकर नशे का सामान, सिगरेट, बीड़ी गुटखा, पान, तंबाकू लाकर देता है। ये सिलसिला हर रोज रात 12 से 1 बजे तक चलता रहता है।

स्कूटी के पैर रखने की जगह पर रखे इसी झोले से सामान बेचा जाता है।
स्कूटी के पैर रखने की जगह पर रखे इसी झोले से सामान बेचा जाता है।

शनिवार की रात भी रवि भवन के पास की गली पर यही नजारा था। ये हालात तब हैं जब शहर में प्रशासन की तरफ से चाक-चौबंद व्यवस्था के दावे किए जाते हैं। फिलहाल रायपुर में नाइट कर्फ्यू के नियम का पालन करवाया जा रहा है। शाम 6 बजे से अगले दिन सुबह 6 बजे तक बाजार और दुकानें पूरी तरह से बंद रखने के निर्देश हैं। मगर यहां अब नियमों को पालन होता नहीं दिखता। हालांकि इसकी जानकारी दिए जाने पर सिटी SP लखन पटले ने कहा कि वो जांच कर कार्रवाई करेंगे।

जय स्तंभ चौक के पास ही देर रात असमाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है।
जय स्तंभ चौक के पास ही देर रात असमाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है।

एक तरफ पुलिस निगरनी, दूसरी तरफ थाना
जय स्तंभ चौक पर बिना रोक-टोक चल रहा नशे का कारोबार इस कदर बेपरवाह है कि पुलिस का यहां किसी को डर ही नहीं। शहर के पॉश इलाकों से रातभर तफरी करने निकलने वाले युवकों की अड्‌डेबाजी की ये पसंदीदा जगह है। खास बात ये है कि रविभवन के पास वाली गली जहां आधी रात तक नशे के सामान का सौदा होता है, इससे 200 मीटर की दूरी पर सिटी SP दफ्तर, पुलिस का टैफिक मैनेजमेंट सिस्टम कंट्रोल रूम है। दूसरी तरफ गोल बाजार थाना भी। पुलिस की गश्त भी होती रहती है और नशे का सामान खरीदने-बेचने वाले अपना काम भी करते रहते हैं।

क्या है जय स्तंभ चौक का महत्व

कुछ इतिहासकारों का मानना है कि अंग्रेजों के जमाने में इस चौराहे पर लाकर क्रांतिकारियों को सजा दी जाती थी। भारत आजाद हुआ तो आजादी की 50वीं सालगिरह पर इसे बनाया गया। 10 दिसंबर 1857 को शहीद वीरनारायण सिंह को यहां फांसी की सजा दी गई थी। बीते एक सदी से भी ज्यादा लंबे समय से आजादी की लड़ाई का प्रतीक रहा है।

खबरें और भी हैं...