प्रशासन की सख्ती:प्रतिबंधित पाॅलीथिन से सीवेज सिस्टम ही जाम, इसलिए फिर शुरू हुई कार्रवाई

रायपुर3 महीने पहले
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  • त्योहारी सीजन में पाॅलीथिन की बाढ़, इसलिए बाजार-दुकानों पर जुर्माना तेज

राजधानी में पिछले 20 दिन में 3 बार थोड़ी तेज बारिश में ही नाले-नालियों के जाम होने और पानी निकलकर घरों-बस्तियों में घुसने के कारणों की जांच में खुलासा हुआ कि पूरा सीवेज सिस्टम एक बार फिर नाले-नालियों की वजह से जाम हो गया है। नगर निगम ने वाटर लाॅगिंग के बाद तीन बार में तकरीबन 250 नाले-नालियों का कचरा साफ किया तो उसमें 90 फीसदी से ज्यादा पाॅलीथिन निकला है।

शासन से 20 माइक्रान से कम मोटाई का पाॅलीथिन प्रतिबंधित है, इस वजह से नगर निगम ने राजधानी में त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए इसे रोकने की कार्रवाई शुरू कर दी है। पिछले दो दिन में 40 से ज्यादा दुकानदारों पर 100 से 200 रुपए जुर्माना लगाकर चेतावनी दी गई है। अफसरों ने बताया कि अब पाॅलीथिन के खिलाफ बड़े अभियान की रूपरेखा तैयार की जा रही है। राजधानी में वाटर लॉगिंग की बड़ी वजह नालियों का चोक होना है। प्लास्टिक कैरीबैग तथा एक बार इस्तेमाल में आने वाले प्लास्टिक के थैले नाले-नालियों में फंस रहे हैं।

जबकि राजधानी रायपुर में 20 माईक्रान से कम के प्लास्टिक कैरीबैग और एक बार उपयोग होने वाले प्लास्टिक की बिक्री और उपयोग पर राज्य शासन की ओर से 2014 से पूरी तरह प्रतिबंध है। निगम ने तीन साल पहले पूरे महीनेभर तक अभियान चलाया। इसका साकारात्मक असर भी दिखाई देने लगा था। लेकिन इसके बाद अभियान ठंडे बस्ते में चला गया। इस साल बारिश में दो-तीन बार शहर में वाटर लॉगिंग के कारण निगम की जमकर किरकिरी हुई। नालियों पर बने पाटे और अवैध कब्जे को तोड़कर जब नालियों की सफाई की गई तो अफसर भौंचक रह गए। सभी जगह से भारी मात्रा में बैन पाॅलीथिन और कैरीबैग निकले हैं। इसीलिए सभी दसों जोन कमिश्नरों को निर्देश दिया गया है कि उनके स्वास्थ्य विभाग की टीम बाजारों और दुकानों में प्लास्टिक का उपयोग करते मिलने पर उनके खिलाफ जुर्माना लगाने की कार्रवाई करे।

फैक्ट्रियों पर भी पड़े थे छापे
राज्य सरकार के आदेश के बाद निगम ने भी सामान्य सभा में प्रस्ताव पारित कर इसके उपयोग को लेकर प्रतिबंध लगाया और तीन साल पहले ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की। कारोबारियों के यहां से प्लास्टिक कैरीबैग और सामान इत्यादि जब्त किए गए। महीनेभर में निगम ने तीन हजार क्विंटल से ज्यादा प्लास्टिक कैरीबैग, डिस्पोजेबल सामान इत्यादि जब्त किए। शहर के आउटर में चल रही कुछ फैक्ट्रियों पर भी छापेमारी कर उन्हें सील किया गया। उस दौरान जब्त प्लास्टिक कैरीबैग और सामान को नष्ट करने या उपयोग को लेकर एक समस्या आई तो निगम ने कुछ सीमेंट कंपनियों से भी बात की। इंधन बनाने में उसका उपयोग किया जा सकता है। सड़क बनाने में भी प्लास्टिक के उपयोग को लेकर चर्चा हुई। जब्त प्लास्टिक के उपयोग को लेकर पालिसी भी तय की जाने वाली थी, लेकिन उसके बाद शहर में अभियान ही बंद हो गया। अफसरों ने यह मान लिया कि शहर में अब प्लास्टिक का उपयोग ही नहीं हो रहा है। नाले-नालियों की सफाई से निकले कचरे मंे 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं प्लास्टिक का है।

स्टांप पेपर पर लिखवाएंगे
आवास एवं पर्यावरण विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि कोई भी उद्योग, प्लास्टिक कैरी बैग, अल्प जीवन पीवीसी और क्लोरीनेटेड प्लास्टिक से बने विज्ञापन व प्रचार सामाग्री, बैनर, फ्लैक्स, होर्डिंग, फोम बोर्ड और कैटरिंग में प्रयुक्त सामाग्री कप, गिलास, प्लेट, कटोरी, चम्मच का निर्माण, भंडारण, विक्रय, परिवहन, आयात नहीं कर सकेगा। कारोबारियों को 100 रुपए के स्टांप पेपर पर इसके उपयोग नहीं करने का शपथ पत्र देना होगा। जो भी प्लास्टिक के उत्पाद बनेंगे, उस पर निर्माता का नाम, पंजीकरण नंबर और प्लास्टिक का प्रकार लिखना अनिवार्य होगा।

सिंगल यूज प्लास्टिक और प्रतिबंध की स्थिति

कैटेगरी-1. पैकिंग में इस्तेमाल पाॅलीथिन जैसे चिप्स, तेल, हल्दी, मिर्च, नमक की पैकिंग। इनके खिलाफ जागरुकता मुहिम चलेगी।
कैटेगरी-2. प्लास्टिक का सामान डिस्पोजेबल कप, प्लेट, गिलास, कटोरी, चम्मच, कैरीबैग इत्यादि। इन पर भी प्रतिबंध लगा हुआ है।
कैटेगरी-3. ऐसा प्लास्टिक जो रिसाइकिल नहीं किया जा सकता, वह सिंगल यूज है। सरकारें इसे भी प्रतिबंधित करने की सोच रही है।

दूसरे राज्यों से ला रहे प्लास्टिक
प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध है। पता चला है कि दूसरे प्रदेशों से प्लास्टिक लाकर यहां बेचा जा रहा है। इसके लिए छापेमारी की जाएगी और एक बार फिर शहर में पाॅलीथिन के खिलाफ जल्द मुहिम शुरू करेंगे।
- एजाज ढेबर, महापौर रायपुर

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