भास्कर पड़ताल:लेडी तालाब पर बना शास्त्री बाजार, इसे स्मार्ट करने खुदाई की तो 3 मीटर तक कीचड़, प्रोजेक्ट खतरे में

रायपुर2 महीने पहले
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  • बेसमेंट के लिए खोद रहे थे, सतह से ठीक नीचे इतना पानी कि नहीं खड़े हो सकते काॅलम​​​​​​​

करीब 40 साल पहले बांसटाल और बैजनाथपारा के बीच बड़े इलाके में फैले लेडी तालाब को पाटकर वहां तीन दशक पहले शास्त्री बाजार शुरू किया गया। तीन साल पहले इसे राजधानी का पहला स्मार्ट बाजार बनाने का प्रोजेक्ट आया और करीब 14 करोड़ रुपए की लागत से योजना तैयार कर ली गई। लेकिन बेसमेंट के लिए जैसे ही परीक्षण के तौर पर खुदाई शुरू की गई, बड़ी मुसीबत यह खड़ी हो गई कि बाजार की सतह के ठीक नीचे काफी पानी है और वहां मिट्टी न होकर कीचड़ निकल रही है।

मिट्टी ऐसी है कि उसपर काॅलम खड़े ही नहीं किए जा सकते। ऐसे में स्मार्ट शास्त्री बाजार बनाने का प्रोजेक्ट ही खतरे में आ गया है। स्मार्ट सिटी की तकनीकी टीम ने बाजार बनाने वाली एजेंसी को एक-एक मीटर और गहरे गड्ढे खोदकर मिट्टी का दोबारा टेस्ट करने के लिए कहा है, ताकि बनने वाला भवन जल्दी क्रैक न होने लगे। शास्त्री बाजार को स्मार्ट हाईजीन मार्केट में तब्दील किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट बेसमेंट पार्किंग समेत 4 फ्लोर का है। इसी का पिलर और बेस बनाने के लिए खुदाई की जा रही थी, तब सतह के नीचे से पानी निकलने लगा। एजेंसी के इंजीनियरों ने तीन मीटर तक खुदाई की, ताकि भीतर की मिट्टी ठीक निकले लेकिन वहां भी कीचड़ ही है।

इंजीनियरों का कहना है कि सतह के नीचे की मिट्टी की पकड़ बिलकुल ढीली है, ऐसे में इतने बड़े ढांचे को खड़ा करना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा। इसीलिए तकनीकी टीम ने एजेंसी को अब एक-एक मीटर और गड्ढे खोदकर मिट्टी का दोबारा टेस्ट करने के लिए कहा गया है। अफसरों का कहना है कि अगर नीचे से मिट्टी ठीक निकली, तभी काम आगे बढ़ाया जा सकता है। नहीं तो इस प्रोजेक्ट को लेकर नई रणनीति बनेगी।

तालाब पाट रहे थे 1972 से
लेडी तालाब को पाटने का सिलसिला 1972 में शुरू किया गया। 1978 तक पूरा तालाब पाट दिया गया और यह मैदान में तब्दील हो गया। हालांकि प्राकृतिक गड्ढा बना रहा। 1984-85 में नगर निगम रायपुर ने यहां शास्त्री बाजार बसाया। यहीं विजेता कांप्लेक्स भी बनाया गया। इसके पीछे की दुकानें सब्जी कारोबारियों को आबंटित की गईं। अभी यह रायपुर और प्रदेश की सबसे बड़ी सब्जी मंडी है, जहां 500 से ज्यादा चिल्हर कारोबारी हैं।

कोरोना काल में वर्कऑर्डर 1 साल बाद शुरू हुआ काम
कोरोना काल शुरू होने से पहले यानी 2020 के शुरू में स्मार्ट शास्त्री मार्केट प्रोजेक्ट का वर्कऑर्डर कर दिया गया था। कोरोना की वजह से पिछले साल एजेंसी ने काम ही शुरु नहीं किया। उस वक्त प्रोजेक्ट की लागत 11 करोड़ रुपए थी। बाद में इसे बढ़ाकर 14 करोड़ रुपए कर दिया गया। इस साल जून के अंत में बारिश के सीजन से ठीक पहले इसका काम शुरु किया गया। करीब ढाई माह के दौरान एजेंसी ने केवल पिलर के लिए गड्ढे ही खोदे। ये सभी गड्ढे पानी से लबालब हो चुके हैं।

84 दुकानों का 4 मंजिला मार्केट, बेसमेंट पार्किंग भी
स्मार्ट सिटी ने तीन करोड़ की लागत बढ़ाने के बाद इस प्रोजेक्ट की जो रूपरेखा बनाई है, उसके मुताबिक यहां बेसमेंट में स्मार्ट पार्किंग समेत चार फ्लोर में 21-21 दुकानों के हिसाब से कुल 84 दुकानें निकाली जाएगी। कंस्ट्रक्शन की पूरी जगह करीब 18 हजार वर्गफीट है। शास्त्री मार्केट को इसी तरह टुकड़ों में डेवलप किया जाना है। पहले हिस्से के तौर पर दुकानों का कांपलेक्स बनाया जा रहा है। उसके बाद ही हाइजीन मार्केट के अनुरूप सब्जी बाजार और अन्य सुविधाएं चरणबद्ध तरीके से यहां डेवलप की जाएंगी।

भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट

तालाब सा नजारा, मार्केट बन रहा है लगता ही नहीं
भास्कर टीम ने शास्त्री बाजार परिसर में बनाए जा रहे स्मार्ट सिटी के इस प्रोजेक्ट की साइट का मुआयना किया। इलाके के लोगों ने बताया कि काम शुरु होने के बाद पिलर और बेस के लिए जब गड्ढे किए गए, तभी से स्थिति यही है। बारिश में तो गड्ढे और भर गए हैं। जहां गड्ढे हैं, वहां आसपास भी पानी भर रहा है, इसलिए इसे मौजूदा बाजार के डंपिंग यार्ड के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया गया है। इस बाजार को स्मार्ट हाईजीन मार्केट में तब्दील करने के लिए स्मार्ट सिटी ने करीब 9 माह का वक्त तय किया था। लेकिन जो हालात अभी हैं, उनसे यह संकेत मिल रहे हैं कि प्रोजेक्ट काफी लंबा खिंचेगा।

खुदाई में कीचड़ निकला है, इसलिए एक मीटर और खोदकर मिट्टी का टेस्ट करने के लिए कहा गया है। बहुत गीली मिट्टी में भवन बनाना ठीक नहीं होगा, इसलिए स्मार्ट सिटी की तकनीकी टीम बारीकी से मॉनिटरिंग कर रही है।
-इंजीनियर अमित कुमार, प्रोजेक्ट इंचार्ज

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