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भास्कर लगातार:स्मार्ट ड्रेन की याेजना फ्लॉप, नाली चौड़ी करने का दूसरा अस्थायी प्लान भी चौपट

रायपुर15 दिन पहले
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दिन में इस तरह से नालियों का पानी खाली करते हैं, बारिश के बाद फिर इलाका डूब जाता है। तस्वीर श्यामनगर की। - Dainik Bhaskar
दिन में इस तरह से नालियों का पानी खाली करते हैं, बारिश के बाद फिर इलाका डूब जाता है। तस्वीर श्यामनगर की।
  • अक्टूबर से पहले पूरा नहीं होगा काम इस बार भी डूबता रहेगा जलविहार

राजधानी का पहला स्मार्ट ड्रेन (नाली) प्रोजेक्ट अक्टूबर से पहले पूरा नहीं हो पाएगा। स्मार्ट सिटी का 4 करोड़ का स्मार्ट ड्रेन का प्लान फ्लॉप हो गया है। तेलीबांधा श्यामनगर और जलविहार कॉलोनी के निचले इलाकों को बारिश में डूबने से बचाने के लिए स्मार्ट सिटी ने करीब डेढ़ साल पहले इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था।

स्मार्ट ड्रेन प्लान के चौपट होने के बाद अब वैकल्पिक रूप से इलाके को डूबने से बचाने के लिए नालियों को बारिश के सीजन में अस्थायी रूप से चौड़ा किया जा रहा है। एक हफ्ते पहले ये कवायद शुरू की गई। मंगलवार और बुधवार की बारिश में वैकल्पिक प्लान भी धराशायी हो गया। इलाका फिर भी डूब रहा है और नालियां चौड़ी हो जाने से इलाके के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जलविहार कॉलोनी के एंट्री प्वाइंट पर सड़क किनारे बनी नालियां पहले संकरी थी। जिनको अस्थायी रूप से निर्माण एजेंसी चौड़ा करने के साथ गहरा भी कर रही है।

ये प्लान इसलिए भी लाया गया ताकि संकरी नाली होने की वजह से बारिश में जो पानी लोगों के घरों में जाता है, कम से कम वो जाने से रुके। इतना ही नहीं नाली की खुदाई से निकलने वाले मलबे से सड़क भी बर्बाद हो गई है। इलाकों के लोगों के मुताबिक बीच बारिश में किए जा रहे काम के कारण हादसे की आशंका बनी रहती है। बारिश का पानी पूरी सड़क पर आ जाने से लोगों की आवाजाही तक बाधित हो जाती है।

दो चरण के काम पूरे नहीं और तीसरा शुरू
भास्कर पड़ताल में पता चला है कि स्मार्ट ड्रेन प्रोजेक्ट के लिए स्मार्ट सिटी ने दो चरणों की प्लानिंग की। इसमें पहले चरण के तहत श्यामनगर, सुभाष नगर, जलविहार कॉलोनी और तेलीबांधा के करीब 75 एकड़ के हिस्से में छोटी छोटी नालियों का तंत्र बनाया जाना था। उसके बाद जमीन से साढ़े 8 फीट गहरी में पाइप लाइन के जरिए पानी की निकासी का सिस्टम बनाना था।

दोनों चरणों के इस काम का एक हिस्सा तेलीबांधा तालाब परिसर के अंदर जा रहा है, वो भी अधूरा ही है। इस बीच, यहां तीसरा चरण भी शुरू कर दिया गया है। इसके तहत पहले अस्थायी और बाद में स्थाई नालियां बनानी है। इसमें श्यामनगर के वृद्धाश्रम के पीछे की बस्ती वाले इलाके में भी नाली को चौड़ा किया जाना है।
बीच बारिश में नए काम, इससे भी असुविधा
स्मार्ट ड्रेन प्रोजेक्ट के लिए वैसे तो स्मार्ट सिटी ने 6 माह का समय तय किया था। पहले के काम ही गति नहीं पकड़ सके। इस बीच, बारिश में नए काम की वजह से लोगों को असुविधा हाे रही है। राजधानी में इस माह में जितनी बार भी बारिश हुई है, उतनी बार ही ये इलाका डूब की जद में आया है। नए काम की वजह से हफ्तेभर से एक नई मुसीबत और बन गई है।

भास्कर टीम ने इस पूरे इलाके का मुआयना किया तो यहां पुरानी नालियों का तंत्र ही ठीक तरीके से नहीं बना है। ज्यादातर नालियों में पानी के उतार चढ़ाव का सिस्टम ही मानक तरीकों से नहीं बनाया गया। उससे नालियों का फ्लो नहीं बन पाता है। ढलान वाले इलाके में बहुत ऊंचाई से पानी आने के कारण लोगों के घरों में नालियों का गंदा पानी भर जाता है।