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  • Special On World Heart Day If Corona Infection Damaged The Lungs, Then The Blood Also Thickened, Due To This Reason, The Risk Of Heart Diseases And Myocarditis In 10% Of The Positive People Recovered

वर्ल्ड हार्ट डे पर विशेष:कोरोना ने फेफड़ों को खराब किया तो खून भी हुआ गाढ़ा, स्वस्थ हुए 10 फीसदी पॉजिटिव लोगों में इसी वजह से दिल की बीमारियां और मायोकार्डिटिस का खतरा भी

रायपुर2 महीने पहलेलेखक: अमिताभ अरुण दुबे
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स्वस्थ होने के चार-पांच माह बाद भी कई मरीजों में गंभीर लक्षणों पर राजधानी के एसीआई हार्ट इंस्टीट्यूट में रिसर्च। - Dainik Bhaskar
स्वस्थ होने के चार-पांच माह बाद भी कई मरीजों में गंभीर लक्षणों पर राजधानी के एसीआई हार्ट इंस्टीट्यूट में रिसर्च।

कोरोना से संक्रमित होकर स्वस्थ हुए ऐसे लोग जिनका ऑक्सीजन सेचुरेशन 95 फीसदी से नीचे चला गया था और फेफड़ों में ज्यादा संक्रमण था, ठीक होने के चार-पांच माह बाद भी उनमें चेस्टपेन यानी सीने में दर्द जैसी शिकायतें कम नहीं हुई हैं। राजधानी के एसीआई यानी एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट में कोरोना और दिल की बीमारियों को लेकर हुई स्टडी और चल रहे रिसर्च में यह बात सामने आई कि जिन लोगों को पोस्ट कोविड लक्षण हैं, उनमें से 10 प्रतिशत में दिल की बीमारियां देखी जा रही हैं।

इनमें से कुछ साधारण हैं, लेकिन कुछ क्रिटिकल भी हैं। इसकी एकमात्र वजह यही है कि कोरोना में मरीजों के फेफड़े डैमेज हुए थे और ऑक्सीजन सेचुरेशन तथा अन्य कारणों से खून भी गाढ़ा हो रहा था। किस तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ा है, किन मुद्दों पर स्टडी हुई, रिसर्च किस प्रवृत्ति पर हो रही है और शुरुआती तौर पर क्या नतीजे सामने आए हैं, इसका ब्योरा एसीआई के एचओडी डॉ. कृष्णकांत साहू ने भास्कर के पाठकों के लिए लिखा-

पोस्ट कोविड में दिल की नसें फूलने या दूसरी नसों में खून जमने के कई केस

डाॅ. कृष्णकांत साहू की कलम से

कोरोना काल के दौरान यह दूसरा वर्ल्ड हार्ट डे होगा। दिल की बीमारियां और इलाज के लिहाज से भी कोरोना हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है। दरअसल श्वसन तंत्र यानी रेस्पिरेटरी सिस्टम के जरिए होने वाले इस संक्रमण का असर फेफड़े और दिल पर सबसे ज्यादा पड़ता है। कोविड मरीज के फेफड़े कमजोर पड़ने पर दिल को शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह संतुलित करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। इससे दिल भी कमजोर होता है।

आप कह सकते हैं कि कोरोना के कारण दिल और इसका सुरक्षा चक्र कहीं न कहीं गंभीर स्थिति में फंसता है। कोरोना काल में कोमॉर्बिडिटी यानी दूसरी गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों की जितनी मौतें हुईं, उनमें अधिकांश दिल की बीमारी वाले थे। प्रदेश में हुई साढ़े 13 हजार से अधिक मौतें हुईं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों का हार्ट फेल हुआ। लिहाजा, अहम बात यही है कि कोरोना मरीजों में दिल की बीमारियों का खतरा कायम है।

पोस्ट कोविड बीमारियों में तीन से चार माह बाद भी कई सारे मरीज सीने में दर्द जैसी शिकायतों के साथ चेकअप के लिए आ रहे हैं। जांच करने पर दिल की बीमारियां और नसों में खून जमना डायग्नोस हो रहा है। इससे नसें ब्लाॅक होने की आशंका भी बढ़ गई है। कोरोना के ऐसे मरीज जिनमें ऑक्सीजन सेचुरेशन का स्तर कुछ दिन 95 से कम रहा, उनके लंग्स काफी खराब हुए हैं। ऐसे मरीजों में से ज्यादातर रिकवरी के बाद भी सांस की तकलीफ से पीड़ित हैं और दिल की समस्या आ गई है।

ऐसे लोग जिन्हें पहले से कई गंभीर बीमारियां थीं जैसे डायबिटीज या अस्थमा वगैरह, अगर वे संक्रमित हुए थे तो उन्हें सतर्क रहना चाहिए। रिसर्च और स्टडीज बता रही हैं कि इनमें 10 से 20 फीसदी लोगों में कोरोना से रिकवर होने के बाद मायोकार्डिटिस जैसी गंभीर बीमारी के संकेत मिल रहे हैं। मायोकार्डिटिस के कारण दिल की मांसपेशियों में सूजन आती है।

इससे दिल को खून पंप करने में दिक्कत आती है और धड़कनें अनियमित हो जाती हैं। कोरोना की वजह से खून गाढ़ा होने के कारण बहुत से मरीजों को रिकवर होने के बाद नसों में ब्लॉकेज होने के कारण सर्जरी भी करनी पड़ी है। कुछ में शहर के अन्य हिस्से की नसों में क्लाटिंग भी आई, जिस वजह से वह अंग काटना पड़ा।

जिंदगी और दिल मुस्कुराता रहे, इसके लिए ये सब करें

  • जिस डाॅक्टर ने कोविड का इलाज किया, उसके संपर्क में रहें।
  • हर दो-तीन महीने में नियमित रूप से हार्ट का चेकअप करवाएं।
  • एक्सरसाइज के साथ ब्रीदिंग एक्सरसाइज भी करना बेहद जरूरी।
  • लो कॉलेस्ट्रॉल, लो साल्ट, लो शुगर... नियम का कड़ाई से पालन।
  • अगर स्मोकिंग, तंबाकू जैसे बुरे व्यसन हैं, तो इन्हें छोड़ना चाहिए।
  • अपनी मर्जी से खून पतला करने वाली दवा न खाएं। डाॅक्टर से पूछें।
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