पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

फर्जीवाड़ा रिपोर्ट का खुलासा:निजी अस्पताल से कोरोना मरीज की रिपोर्ट चुराई, फिर नाम बदलकर किसी को भी पॉजिटिव और निगेटिव बताया

रायपुर3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

मंदिरहसौद के एक निजी लैब तकनीशियन ने ढाई-ढाई हजार कमाने के चक्कर में कोरोना की फर्जी रिपोर्ट देकर लोगों की जिंदगी ही दांव पर लगा दी। उसने अपने दोस्त की मदद से एक निजी अस्पताल से कोरोना मरीजों की निगेटिव-पॉजिटिव रिपोर्ट चुराई। उसके बाद वही रिपोर्ट नाम बदल-बदलकर लोगों को देता रहा।

जिसे कम लक्षण होते उसे निगेटिव और जिसे ज्यादा नजर आते उसे पॉजिटिव रिपोर्ट थमा देता था। झांसा देने के लिए वह लोगों के सामने बाकायदा सारी प्रक्रिया करता था, लेकिन जांच कभी नहीं की। एक बुजुर्ग की हालत गंभीर हुई तब उसका भांडा फूटा। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

मंदिर हसौद स्थित रिम्स मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करायी है। आरोपी रेशम मंगेशकर रिम्स मेडिकल कॉलेज के नाम से ही रिपोर्ट दे रहा था। पुलिस को उसके कुछ साथियों के नाम मिले हैं। उनके बारे में पड़ताल की जा रही है। टीआई अश्वनी राठौर ने बताया कि रिम्स अस्पताल के लैब प्रभारी डॉ. विवेक कुमार की रिपोर्ट पर मोवा के लैब टेक्नीशियन रेशम मंगेशकर(29) के खिलाफ जालसाजी, दस्तावेज में छेड़खानी का केस दर्ज किया है। आरोपी रमेश मूलत: मुंगेली खपरी का रहने वाला है।

वह दुबे कॉलोनी में किराए में रहता है। वह आनंदी लैब में काम करता है। आरोपी का दोस्त रिम्स अस्पताल में टेक्नीशियन है। उसी ने मरीजों की पॉजिटिव और निगेटिव रिपोर्ट की कॉपी उसी चुराकर दी है। पुलिस के अनुसार आरोपी रेशम ने सोशल मीडिया में अपना प्रचार किया था कि वह घर आकर कोरोना की जांच कर रहा है। टाटीबंध समेत कई इलाकों के लोगों ने आरोपी से कोरोना जांच के लिए संपर्क किया।

आरोपी एक सैंपल लेने का दो से ढाई हजार लेता था। वह सामान्य लक्षण जैसे सर्दी, खांसी या बुखार देखकर पॉजिटिव रिपोर्ट देता था। जिनमें लक्षण नहीं होते थे वह उन्हें निगेटिव रिपोर्ट देता था। आरोपी ने कभी किसी के सैंपल की लैब में जांच नहीं करवायी। इसके बावजूद वह सभी को रिम्स के नाम से रिपोर्ट देता था।

ऐसे फूटा फर्जीवाड़ा

आरोपी रेशम ने टाटीबंध की एक महिला को कोरोना पॉजिटिव की फर्जी रिपोर्ट दी है। महिला की हालत नाजुक है। महिला का पचपेड़ी नाका के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। महिला को रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत थी। महिला ने रिम्स अस्पताल की रिपोर्ट अस्पताल में जमा की। उस रिपोर्ट की ऑनलाइन जांच की गई, तो उसमें मरीज का नाम नहीं था।

अस्पताल प्रबंधन की ओर से महिला के परिजनों को बताया गया कि उनकी रिपोर्ट ऑनलाइन दिखाई नहीं दे रही है। तब परिजनों ने रिम्स में संपर्क किया। वहां जांच करने के बाद बताया कि उनके यहां टेस्ट नहीं हुआ है, जो रिपोर्ट क्रमांक है। वह गलत है। तब आरोपी को बुलाया गया और पुलिस में शिकायत की गई।

खबरें और भी हैं...