छत्तीसगढ़ के निलंबित एडीजी जीपी सिंह का मामला:सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, कहा नाैकरशाह और पुलिस अफसराें का बर्ताव आपत्तिजनक

रायपुर2 महीने पहले
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  • पहले भी कहा था- ‘सरकार के करीब थे ताे वसूली शुरू कर दी, ऐसे अफसरों को संरक्षण क्याें?’

सुप्रीम काेर्ट के चीफ जस्टिस (सीजेआई) एनवी रमना ने कहा है, ‘देश में नाैकरशाह और पुलिस अफसर जिस तरह का बर्ताव कर रहे हैं, उसकाे लेकर मुझे आपत्ति है। खास ताैर पर पुलिस अफसराें के व्यवहार काे लेकर।’ सीजेआई ने शुक्रवार काे कहा कि एक समय ताे वह इस संबंध में आने वाली शिकायताें की जांच के लिए हाईकाेर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्थाई समिति बनाने पर विचार कर रहे थे।

लेकिन फिलहाल वह ऐसा करना नहीं चाहते। छत्तीसगढ़ के निलंबित एडीजी (अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक) गुरजिंदर पाल सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान उन्होंने यह बातें कहीं। सिंह ने उनके खिलाफ दायर आपराधिक मामलाें में संरक्षण की मांग काे लेकर याचिका दायर की है। इसके पूर्व इसी मामले में सीजेआई ने यह भी कहा था, ‘देश में नया चलन चल रहा है। अफसर सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में हाे जाते हैं। जब विपक्ष की सरकार बनती है ताे सरकार उनके विरुद्ध कार्रवाई करती है।’ एडीजी के खिलाफ वसूली मामले में सीजेआई ने कहा था, ‘आप सरकार के करीब थे ताे आपने वसूली शुरू कर दी। यदि आप सरकार के करीब हैं और इस तरह के काम कर रहे हैं ताे एक दिन अापकाे इसे अदा करना हाेगा। हम ऐसे अफसरों को संरक्षण क्याें दें?’

राजद्राेह, वसूली सहित कई मामले दर्ज
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के नजदीकी अफसर गुरजिंदरपाल सिंह के खिलाफ राजद्रोह, आय से अधिक संपत्ति और जबरन वसूली के मामले दर्ज हैं। गुरजिंदर पाल सिंह अभी फरार हैं। उक्त मामलों को रद्द करने की याचिका हाईकाेर्ट से खारिज हाेने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शीर्ष काेर्ट ने राजद्रोह व आय से अधिक संपत्ति के मामले में गुरजिंदर पाल सिंह पर किसी भी तरह की ठोस कार्रवाई पर आठ सप्ताह की रोक लगा दी है। हालांकि तीसरे मामले जबरन वसूली में राहत देने से इंकार करते हुए कहा कि ये मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। इस निर्णय वहीं होगा। इस साल एक जुलाई काे राज्य पुलिस ने उनके घर पर छापा मारा था। उसके बाद आराेप लगाया कि उनके घर के पीछे नाले में फटे हुए कागजात पाए गए। इनको जाेड़कर पड़ताल करने के बाद पुलिस ने उन पर राज्य सरकार के खिलाफ नफरत फैलाने का आराेप लगाया।

कोर्ट रुम लाइव; गटर में फाड़कर फेंके डायरी के पन्ने कोर्ट में पढ़े
सली अरीमन (जीपी सिंह के वकील): जीपी सिंह पर गलत तरीके से राजद्रोह का केस लगाया गया है।

सरकारी वकील मुकुल रोहतगी और सुमेर सोढ़ी: हम बहस के लिए तैयार हैं। हम जीपी सिंह के बंगले के पीछे गटर से जब्त डायरी के पन्ने पेश करने से पहले पढ़ना चाहते हैं।
एक पन्ने में लिखा था ‘.... गैंग रेप की घटना के बाद लोगों को उकसाया जा सकता है। ....सतनामी समाज के लोगों को नाराज करने के लिए उनके गुरु के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की जा सकती है। .....हिंदू और मुस्लिम के बीच भी तनाव पैदा किया जा सकता है। ...सीएए एनआरसी का भी उन पन्नों में जिक्र था।

मुकुल रोहतगी ने जीपी सिंह पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोप लगाया, तो जीपी सिंह के वकीलों ने गलत बताया। इस पर मुकुल रोहतगी ने कहा कि अभी तक उनकी 20 करोड़ से अधिक की आय से ज्यादा संपत्ति का पता चल चुका है, जबकि उन्हें अब तक की सर्विस में 2 करोड़ से ज्यादा सैलेरी नहीं मिली है।

सरकारी वकीलों की ओर से कोर्ट में ये भी बताया गया कि राजद्रोह के केस में 164 के तहत गवाहों का बयान हो चुका है। गवाहों ने बयान दिया है कि लोगों को भड़काने और उकसाने की सामग्री कई जगह बांटी जा चुकी है। कोर्ट में उनके खिलाफ सुपेला में दर्ज वसूली के केस की भी सुनवाई हुई। कोर्ट ने राजद्रोह और सुपेला वाले केस में हाईकोर्ट को केस डिसाइड करने के लिए 8 हफ्ते का समय दिया, जबकि आय से अधिक संपत्ति के मामले में पूर्व में लगाई गई गिरफ्तारी पर रोक हटा ली। ईओडब्लू अब आय से अधिक मामले में उन्हें कभी भी गिरफ्तार कर सकती है।

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