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भूपेश कैबिनेट की बैठक:आठ राज्यों की स्टडी, शिक्षकाें का सर्वे, तब 2 से स्कूल और कॉलेज खोलने का फैसला

रायपुर16 दिन पहले
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यह तस्वीर बिलासपुर के देवकीनंदन स्कूल की है, जहां मोबाइल के जरिए इस तरह ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। लगभग सभी सरकारी स्कूलों में फिलहाल यही हाल है। - Dainik Bhaskar
यह तस्वीर बिलासपुर के देवकीनंदन स्कूल की है, जहां मोबाइल के जरिए इस तरह ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। लगभग सभी सरकारी स्कूलों में फिलहाल यही हाल है।
  • 15 महीने बाद स्कूल जाएंगे छात्र, फिलहाल 50 फीसदी छात्रों को ही अनुमति, प्राथमिक और मिडिल स्कूल खोलने का फैसला कोरोना केसेस को देखते हुए शाला विकास समितियां करेंगी

राज्य सरकार 2 अगस्त से पूरे प्रदेश में स्कूल और कॉलेज खोलने जा रही है। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसलों के साथ ये फैसला भी लिया गया। 15 महीने बाद स्कूल और कॉलेज खुलेंगे। इन्हें खाेलने का फैसला आठ राज्यों की स्टडी के बाद लिया गया है। इतना ही नहीं, स्कूल खोलने से पहले प्रदेश के शिक्षकों का वैक्सीनेशन सर्वे भी कराया गया है। जिसमें यह बात सामने आई कि 1 लाख 15 हजार शिक्षक यानी 87 फीसदी टीका लगवा चुके हैं, सिर्फ 13 फीसदी बचे हैं।

पिछले साल कोरोना की पहली लहर के बाद प्रदेश के स्कूल और कालेज 1 अप्रैल 2020 से बंद कर दिए गए थे। छत्तीसगढ़ में 2 अगस्त से बच्चों की 50 फीसदी उपस्थिति के साथ स्कूल-कॉलेज खुलेंगे। प्राथमिक और मिडिल स्कूल खोलने का फैसला कोरोना केसेस को देखते हुए शाला विकास समितियां करेंगी।

कृषि मंत्री और कैबिनेट के प्रवक्ता रविंद्र चौबे ने बताया कि शहरों में 50 फीसदी क्षमता के साथ 9-11 वीं कक्षाएं खुलेंगी। प्राथमिक और मिडिल स्कूलों को खोलने को लेकर गाइडलाइन बनाया जायेगा। बच्चों की संख्या को देखते हुए उसका गाइडलाइन तैयार किया जायेगा। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि जिन स्कूलों में ज्यादा बच्चे होंगे, वहां एक-एक दिन के गैप में बच्चों को बुलाया जायेगा।

जिन गांवो में कोरोना शून्य पर पहुंच गया है वहां प्राथमिक स्कूल ग्राम पंचायत की सहमति से और शहरी क्षेत्रों में पार्षद, शाला विकास पालक समिति और स्कूल प्रबंधन स्थानीय स्तर पर लिया जाएगा। बता दें कि पिछले लंबे अर्से से निजी स्कूल संचालक स्कूल खोलने को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए थे। एसोसिएशन के सदस्य स्कूल शिक्षा मंत्री से लेकर सीएम बघेल से मिलकर मांग करते रहे हैं।

वहीं चौबे के मुताबिक नर्सिंग, मेडिकल, इंजीनियरिंग सहित आईटीआई की कक्षाएं भी 1 अगस्त के बाद यानि 2 अगस्त से खोले जायेंगे। कालेजों में अंतिम वर्ष की कक्षाएं पहले लगेंगी। इसके 20 दिन बाद प्रथम और द्वितीय वर्ष के क्लास खोले जाएंगे। कालेजों में छात्रों का आना जरुरी नहीं होगा।

कैबिनेट के अन्य अहम फैसले

  • 16 फीसदी कम में हाउसिंग बोर्ड के मकानों की बिक्री
  • दवा उद्योगों को भारी छूट, 50% दवा खरीदेगी सरकार
  • जमीनों, मकानों की रजिस्ट्री में छूट मई 2022 तक जारी

ऐसे लिया गया स्कूल खोलने का फैसला
शिक्षा विभाग की टीम की रिपोर्ट ने सुझाया मार्ग

जॉन राजेश पॉल | रायपुर. शिक्षामंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने एक विशेष टीम बनाई। इस टीम ने देश के आठ राज्यों के हालात का जायजा लिया। सबसे पहले तेलंगाना ने 1 जुलाई से स्कूल खोलने का ऐलान किया। फिर पुडुचेरी ने घोषणा की, लेकिन पीछे हट गया। छत्तीसगढ़ में इस मसले को बल तब मिला, जब मध्यप्रदेश ने स्कूल खोलने की घोषणा कर दी। इसके पहले बिहार, गुजरात, हरियाणा, ओडिशा, पंजाब, कर्नाटक समेत उन आठ राज्यों से वो प्रक्रिया हासिल की जिसके तहत वहां या तो स्कूल खोल दिए, या खोलने वाले हैं। इसमें महाराष्ट्र का प्रस्ताव सबसे अहम था।

खबर है कि लगभग ऐसा ही पैटर्न छत्तीसगढ़ ने भी अपनाया है। इस दौरान शिक्षा विभाग की स्पेशल टीम ने प्रदेश में शिक्षकों के वैक्सीनेशन का भी सर्वे किया। कैबिनेट में यह प्रस्ताव ले जाने से पहले शिक्षामंत्री, शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला, सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह के बीच लंबी चर्चा हुई। प्रस्ताव कैबिनेट में आया तो खुद सीएम ने इस पर बात शुरू कर दी। लगभग सभी मंत्रियों ने चर्चा में भाग लिया। कुछ मंत्रियों ने तीसरी लहर को लेकर आशंका भी जताई। हालांकि शिक्षामंत्री ने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं से संबंधित कक्षाएं खोल सकते हैं।

आशंकाओं के बीच है ये तैयारी: बच्चों के लिए मेडिकल कॉलेजों में 100 व जिला अस्पतालों में 30 बेड
तीसरी लहर में बच्चों के ज्यादा संक्रमित होने की आशंका के बीच मेडिकल कॉलेजों में 100, जिला अस्पतालों में 30 व सीएचसी में 6 बेड का आईसीयू बनाए जाएंगे। अंबेडकर अस्पताल के अलावा रायगढ़, राजनांदगांव व जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में बच्चों के लिए अलग आईसीयू तैयार किया जा रहा है। मंगलवार को तीसरी लहर की तैयारियों की समीक्षा की गई। इसमें बच्चों के इलाज संबंधी व्यवस्था जल्द पूरी करने को कहा गया। तय किया गया कि हर अस्पतालों में कुल बेड का 10 फीसदी बेड बच्चों के लिए सुरक्षित रहेगा।

अभी सरकारी व निजी मिलाकर 33 हजार के आसपास बेड हैं। निजी अस्पतालों को भी शामिल करने पर बच्चों के लिए 3300 बेड रहेंगे। विशेषज्ञों के हिसाब से ये पर्याप्त हो सकता है। अंबेडकर अस्पताल में पिछले डेढ़ साल में केवल 51 कोरोना संक्रमित बच्चों का इलाज किया गया। पूरे प्रदेश में 4 फीसदी के आसपास बच्चे संक्रमित हुए, जिसमें ज्यादातर होम आइसोलेशन में ठीक हो गए।

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