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ताबड़तोड़ छापे:सिंडीकेट ने आउटर में 27 जगह रेत के पहाड़ लगाए और शहर में रेट डबल

रायपुरएक महीने पहले
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  • लाइसेंस वाले 17 लोगों का स्टाॅक भी लिमिट से कई गुना, गाड़ियां भी जब्त

राजधानी में जिन आठ घाट से रेत आती है, वह 10 दिन पहले बारिश की वजह से बंद कर दिए गए। उसके तुरंत बाद सिंडीकेट ने नवा रायपुर के आउटर में इतनी रेत इकट्ठा की कि ज्यादातर जगह रेत के पहाड़ लग गए। इतने बड़े स्टाॅक के बाद राजधानी में रेत का रेट जमाखोरी की वजह से तेजी से बढ़ा और तीन दिन में 6500 रुपए का रेत का ट्रैक 10 हजार रुपए से ऊपर हो गया।

भास्कर ने इस सिंडीकेट का खुलासा किया, तब पिछले 24 घंटे में खनिज विभाग ने ताबड़तोड़ छापे मारे और 27 जगह रेत का बड़ा स्टाॅक पकड़ा है। ज्यादातर जगह तीन-चार सौ ट्रक तक रेत मिली। स्टाॅक इतना बड़ा था कि अधिकांश जगह रेत के 25-30 फीट तक ऊंचे पहाड़ बन गए। छापेमारी और स्टाॅक जब्त होने के बाद राजधानी में रेत के रेट में अगले तीन-चार दिन में ही कमी की संभावना जताई जा रही है। राजधानी में जिन घाटों से रेत आती है, उन्हें प्रशासन ने 11 जून को बंद किया था। इसके तीन-चार दिन के भीतर राजधानी से लगे नवा रायपुर के सीमावर्ती इलाकों में रेत की जमाखोरी शुरू कर दी ई।

इसी वजह से राजधानी में 14 जून तक एक ट्रक (हाईवा) का रेट दोगुना हो गया। वजह यह थी कि रेत घाट बंद थे और स्टाॅक सिंडीकेट के पास ही था, जो मूल्य को नियंत्रित करने की स्थिति में हैं। राजधानी में बिल्डरों ने इसका विरोध भी किया। उनका कहना था कि महंगी रेत मिलने की वजह से निर्माण काम प्रभावित हो रहे थे। घरों की लागत बढ़ रही थी इसलिए कई बिल्डरों ने काम ही धीमा कर दिया।

यही नहीं, आम लोगों के मकानों का काम भी रेत के रेट और कम उपलब्धता की वजह से बेहद धीमा हो गया। भास्कर में इस खुलासे के अलावा नए कलेक्टर सौरभ कुमार ने पिछले एक हफ्ते में राजधानी से लगे कुछ गांवों का दौरा किया, तो कुछ जगह रेत के टीले नजर आए। उन्होंने अफसरों से पूछताछ की तो पताा चला कि जिन 17 लोगों को स्टाॅक करने का लाइसेंस मिला हुआ है, उनमें से भी ज्यादातर ने लिमिट से कई गुना स्टाॅक कर लिया। इसके बाद पिछले दो दिन में छापेमारी की भूमिका बनी और गुरुवार को देर रात से छापे शुरू हो गए।

इस वजह से... बिल्डरों के प्रोजेक्ट धीमे, लागत बढ़ने का भार खरीदार पर
छत्तीसगढ़ क्रेडाई के अध्यक्ष मृणाल गोलछा और नेशनल क्रेडाई के उपाध्यक्ष आनंद सिंगानिया के अनुसार रेत घाट बंद होते ही रेत सिंडीकेट के कब्जे में अा जाती है और रेट दोगुने कर दिए जाते हैं। इस बार बिल्डरों के पास सूचना थी कि रेत का रेत का पर्याप्त स्टॉक है। लेकिन घाट बंद होते ही रेट के रेट बढ़े तो जिम्मेदार लोगों ने हाथ खड़े कर दिए। महंगी रेत का असर लगभग सभी बिल्डरों के प्रोजेक्ट पर पड़ा है। सभी के प्रोजेक्ट धीमे हो गए हैं और लागत भी बढ़ रही है। लागत बढ़ने का असर मकानों के रेट पर पड़ेगा और यह बोझ देर-सवेर मध्यवर्ग को उठाना होगा। इसलिए रेत के स्टाॅक पर प्रशासन को बारीक नजर रखनी चाहिए और छापे पड़ते रहना चाहिए, ताकि इस मौसम में भी रेत साढ़े 6 से 7 हजार रुपए के बीच मिलती रहे।

घाट से 3-4 किमी दूर बनाया स्टाॅक
रेत सिंडीकेट ने नवा रायपुर से लगे राटाकाट, पारागांव, लखौली, रसनी और जगदलपुर रोड पर लखना (अभनपुर) लखना घाट से 3-4 किमी के दूरी पर ही रेत डंप कर दी है। प्रशासन की टीमों ने रेत के 27 जगह बड़े टीले पकड़े हैं। जगह ऐसी हैं जहां से अासानी से रेत का परिवहन हो सकता है। यह सभी स्पाॅट जयस्तंभ चौक से 20 किमी के दायरे में हैं। ऐसे में सिंडीकेट के लिए ट्रांसपोर्टेशन में खर्च बढ़ने का मसला भी नहीं था। स्टाॅक करने के बाद रेट बढ़ाया गया था। चूंकि राजधानी के सारे रेत सप्लायर यहीं से रेत उठा रहे थे, इसलिए रेट 10 हजार रुपए से अधिक हो गया।

रोज 100 ट्रक रेत की मांग
राजधानी में रेत की औसत मांग रोजाना 100 ट्रक रेत की है। सभी निर्माण काम के लिए रेत घाटों से पर्याप्त रेत निकाली गई, लेकिन उसे सरकारी रेट में बेचने के बजाय कालाबाजारी शुरू हो गई। यह सवाल उठाया जा रहा है कि इतना बड़ा स्टाॅक हुअा तो खनिज अमले को भनक कैसे नहीं लगी? उधर, संकट बताकर सिंडीकेट ने तीन दिन में रेट डबल कर दिए। छापे नहीं पड़ते तो रेट 15 हजार तक पहुंच सकते थे।

लाइसेंस मुनाफाखोरी रोकने का पर हो रहा उलट असर
आम लोगों को राहत देने और रेत की कीमत न बढ़े, इसलिए खनिज विभाग ने रेत डंप करने के लिए 17 लोगों को लाइसेंस जारी किए। उद्देश्य यही था कि घाट बंद होने के बाद भी रेत की सप्लाई बाधित न हो। लाइसेंसधारियों को उसी रेट पर रेत बेचने की अनुमति है, जो घाट का रहता है। अफसरों ने बताया कि अधिकांश लाइसेंसधारियों ने स्टाॅक की सीमा भी तोड़ी और रेट भी नियंत्रित नहीं रखे।

रेट नहीं बढ़ने देंगे
रेत के दाम सरकारी रेट से ज्यादा नहीं होने दी जाएगी। जो भी अवैध रूप से रेत का संग्रहण करेगा या उसे ऊंची रेट पर बेचेगा, ऐसे सभी लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी।
- सौरभ कुमार, कलेक्टर रायपुर

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