18+ टीकाकरण:सिस्टम ऑफ; 70 हजार काे सर्टिफिकेट नहीं, क्योंकि एंट्री ऑफलाइन हुई थी

रायपुर4 महीने पहलेलेखक: अमिताभ अरुण दुबे
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स्पेलिंग गड़बड़ या मोबाइल नंबर दर्ज नहीं, 4 हफ्ते बाद भी सूचना नहीं। - Dainik Bhaskar
स्पेलिंग गड़बड़ या मोबाइल नंबर दर्ज नहीं, 4 हफ्ते बाद भी सूचना नहीं।

राजधानी में 18 प्लस की श्रेणी में टीका लगवाने वाले 70 हजार से अधिक युवाओं को वैक्सीन सर्टिफिकेट के लिए भटकना पड़ रहा है। 1 से 18 मई के बीच शहर में टीका लगवाने वाले इन सभी युवाओं की एंट्री रजिस्टर के जरिए ऑफलाइन की गई थी। बाद में इनके नाम सीजी पोर्टल में फीड किए जाने थे। लेकिन नामों की एंट्री में बहुत सारे नाम या तो छूट गए या पूरी जानकारी ही नहीं भरी गई।

इसके चलते 70 हजार से ज्यादा लोगों के पास वैक्सीन लगवाने के साढ़े 3 हफ्ते बाद भी कोई मैसेज नहीं आया। कुछ युवाओं के पास वैक्सीन लगवाने का मैसेज आया लेकिन उनका सर्टिफिकेट डाउनलोड नहीं हो सका। भास्कर ने जब पूरे मामले की पड़ताल की तो सर्टिफिकेट नहीं मिलने के पीछे वैक्सीनेशन का लेखाजोखा रख रहे अमले की कई सारी गलतियां सामने आ गई। रायपुर समेत प्रदेश के हर जिले में शुरूआती दौर में युवाओं के वैक्सीनेशन के लिए चार श्रेणियों का सिस्टम बनाया गया था। उस वक्त सीजी टीका पोर्टल भी पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया, इसलिए शुरूआत के दौर में टीके की एंट्री रजिस्टर में ऑफ लाइन तरीके से की गई। बाद में इस पूरे डेटा को पोर्टल में एंट्री करने का काम शुरू किया गया।

भास्कर नॉलेज : जबकि टीका सर्टिफिकेट अभी सबसे जरूरी दस्तावेज

कहीं बाहर यात्रा करने वाले खासतौर पर विदेशों में, स्कूल-कॉलेज में एडमिशन के इच्छुक या नौकरीशुदा लोगों से उनके दफ्तरों में वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट मांगा जा रहा है। वैक्सीनेशन के पहले डोज के सर्टिफिकेट हों तो देश के किसी भी राज्य में दूसरा डोज लगवाया जा सकता है। इसलिए टीके का सर्टिफिकेट अभी जरूरी दस्तावेज बन गया है।

हेल्प डेस्क में रोजाना पहुंच रहे 50 से ज्यादा लोग

जिन लोगों को टीका लगवाने के कई दिन बाद भी पोर्टल से सर्टिफिकेट या मैसेज नहीं मिल पा रहा है। उनकी मदद के लिए जिला स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में हेल्पडेस्क बनाई गई है। बुधवार को यहां दिनभर में 50 से अधिक लोग अपने सर्टिफिकेट लेने या इसमें संशोधन के लिए पहुंचे। इनमें से 30 से ज्यादा लोगों की शिकायत यह थी कि उन्हें अब तक पहला डोज लगवाने का कंफर्मेशन मोबाइल पर नहीं आया है। बहुत सारे लोग ऐसे टीका सर्टिफिकेट लेकर पहुंचे जिनमें नाम, पते, उम्र और लिंग दर्ज करने में गलती हुई।

सीएमओ दफ्तर में हेल्प डेस्क 7869019063 नंबर भी जारी

अगर 18 प्लस श्रेणी में टीका लगवाने के बाद अभी तक प्रमाणपत्र नहीं बना है, तो सीएमओ दफ्तर में बनाई गई हेल्पडेस्क में पहुंचकर आप इस समस्या का निदान कर सकते हैं। सर्टिफिकेट में किसी तरह की त्रुटि है तो इसका संशोधन भी यहां बनाई गई हेल्पडेस्क में जाकर करवाया जा सकता है। यही नहीं हेल्पलाइन नंबर - 7869019063 पर भी टीके से जुड़ी किसी भी परेशानी के लिए फोन किया जा सकता है।

छोटी-छोटी खामियां और लापरवाही में रुका टीका सर्टिफिकेट

कई वीआईपी को बिना पंजीयन के टीका

भास्कर पड़ताल में पता चला है कि राजधानी में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिन्होंने सीजी टीका पोर्टल में एंट्री करवाए बिना ही वैक्सीन लगवा ली। उनका कोई आईडी नहीं था, इसलिए सर्टिफिकेट ही जारी नहीं हुआ। ऐसे कई लोग अब सर्टिफिकेट के लिए घूम रहे हैं। यही नहीं, बहुत लोगों ने वैक्सीन लगवाने के दौरान वास्तविक मोबाइल नंबर नहीं दिए, इसलिए उन्हें सर्टिफिकेट नहीं मिल पाया।

रजिस्टर और पोर्टल में एंट्री करने वाले अलग

सेंटर में रजिस्टर में नाम लिखने वाले और बाद में उन नामों को पोर्टल में लिखने वाले लोग अलग-अलग रहे। इसके कारण बहुत सारे नाम लिखावट अस्पष्ट होने की वजह से या फिर स्पेलिंग मिस्टेक के कारण नहीं जुड़ पाए। डबल एंट्री के इस प्रोसेस में भी मोबाइल नंबर को फीड करने भी गलतियां हुई। उस स्थिति में भी संबंधित तक मैसेज या सर्टिफिकेट नहीं पहुंच पाया।

नाम-पते में स्पेलिंग की गलती भारी पड़ी

जिन युवाओं को टीका प्रमाणपत्र के लिए भटकना पड़ रहा है, उनमें बहुत से युवाओं ने सीजी टीका पोर्टल में पंजीयन के वक्त हिंदी टाइपिंग के जरिए नाम पता आदि जानकारियां दर्ज की। इसमें कई सारे नामों की जब इंग्लिश में एंट्री की गई तो उसमें कई में स्पेलिंग त्रुटियां हुई। ऐसे में कोई व्यक्ति पोर्टल में अपना नाम टाइप करता है, तो स्पेलिंग गलत रहने से कोई जानकारी नहीं मिलती।

सीजी टीका पोर्टल की शुरुआती खामियां

सीजी टीका पोर्टल के शुरू में ही तकनीकी खामियां रहीं, खासकर रजिस्ट्रेशन संबंधी जानकारियों को लेकर। दूसरा ये भी कि शुरुआत में पोर्टल सही ढंग से काम ही नहीं कर रहा था। उस दौरान शेड्यूलिंग-स्लॉटिंग तक नहीं हो पा रही थी। चार रजिस्टर तक बनाए गए। तो सेंटर पर वेरिफिकेशन डेस्क पर दिए गए टेबलेट पर भी पोर्टल नहीं खुल पाता था। इसलिए ऑफलाइन एंट्री करनी पड़ी।