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टीके का टोटा:तारीख गुजर गई, लेकिन प्रदेश में 3.50 लाख को नहीं लगी सेकंड डोज

रायपुर11 दिन पहले
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वैक्सीन की किल्लत से बढ़ी परेशानी। - Dainik Bhaskar
वैक्सीन की किल्लत से बढ़ी परेशानी।

प्रदेश में साढ़े तीन लाख से अधिक लोगों को सेकंड डोज नहीं लगी है, जबकि गाइडलाइन के अनुसार इनकी वैक्सीन लगवाने की मियाद गुजर चुकी है। इनमें ज्यादातर ने पहली डोज कोविशील्ड की लगवाई है। गाइडलाइन के अनुसार इन्हें 84 से 112 दिनों में दूसरी डोज लगवानी थी। हालांकि इनमें से कुछ दूसरी डोज का शेड्यूल आने पर लोग टीके लगवाने पहुंचे, लेकिन कभी वैक्सीनेशन सेंटर में भीड़ मिली तो कभी स्टॉक खत्म हो गया।

इस वजह से उन्हें डोज लगवाए बिना लौटना पड़ा। इनमें कुछ तो एक बार के बाद दोबारा सेंटर नहीं गए, कुछ गए लेकिन दूसरी बार भी डोज नहीं लगी। एक-दो बार प्रयास करने के बाद उन्होंने ने भी वैक्सीन लगवाने का प्रयास नहीं किया। धीरे-धीरे आंकड़ा बढ़ता हुआ साढ़े तीन लाख पहुंच गया है।

स्वास्थ्य विभाग के जानकारों के अनुसार जब से वैक्सीन के लिए 18 प्लस के लिए टीके ओपन किए गए, तब से सेंटरों में भीड़ उमड़ी और डोज की कमी शुरू हो गई। अभी हालांकि रोज डोज पहुंच रही है और सेंटरों में लगायी भी जा रही है, लेकिन वैक्सीनेशन करवाने वालों में पहली डोज वाले ज्यादा रहते हैं।

दूसरी डोज वाले कम ही पहुंच रहे हैं। इस वजह से सेकेंड डोज की पेंडिंग सूची कम होने की बजाए लगातार बढ़ती जा रही है। भास्कर की पड़ताल के अनुसार रायपुर में ही ऐसे लोगों की संख्या 17 हजार से अधिक है। इनमें कोविशील्ड की पहली डोज लगवाने वालों को 84 से 112 और कोवैक्सीन लगवाने वालों ने 28 से 44 दिन की मियाद बीत जाने के बावजूद दूसरा टीका नहीं लगवाया गया है।

टीके से चूके लोगों में 1.62 लाख फ्रंट लाइनर: दूसरी डोज लगवाने में पीछे रहने वालों में करीब 1.62 लाख लोग फ्रंट लाइन या हेल्थ वर्कर केटेगरी के लोग भी शामिल हैं। प्रदेश में सबसे पहले 16 जनवरी से इन्हीं दो श्रेणियों में आने वालों को टीके लगाकर अभियान शुरू किया गया था। उसके बाद से इनकी ओवर डेट माह दर माह बढ़ती जा रही है।

प्रदेश में 3.08 लाख हेल्थ वर्करों को पहला डोज लगा चुका है। इनमें से अभी केवल 2.42 लाख ने ही अपने दोनों डोज लगवाए हैं। जबकि 66 हजार से अधिक ऐसे हेल्थ केयर वर्कर है जिन्हें अभी तक दूसरी डोज नहीं लगी है। हालांकि इस तादाद में करीब 15 हजार ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने काफी बाद में टीके लगवाए।

इसी तरह फ्रंट लाइन श्रेणी जिनमें पुलिस, जिला प्रशासन और अन्य विभागों के लोग शामिल हैं उनमें 3.16 लाख लोगों को पहली डोज लग चुकी है। इनमें 2.20 लाख ने ही दोनों डोज लगवाए हैं। यानी 96 हजार से अधिक ऐसे हैं जिन्होंने अब तक दूसरी डोज नहीं ली है।

तीन वजह

1. वैक्सीन की किल्लत से बढ़ी परेशानी

2. सेंटरों में भीड़ के कारण लौट रहे लोग

3. दूसरी डोज लगवाने नहीं आ रहे हैं लोग

टीके की कमी सबसे बड़ी अड़चन
राज्य में वैक्सीनेशन में पिछड़ने की सबसे बड़ी वजह टीके की कमी बन रही है। स्वास्थ्य विभाग ने डेढ़ करोड़ टीके केंद्र से मांगे हैं। मांग पूरी होना तो दूर जरूरत और क्षमता के हिसाब से भी टीके नहीं मिल पा रहे हैं। जुलाई में 20 लाख टीके मिलने थे, अब तक 10 लाख का स्टॉक भी नहीं मिला है।

अब तक 20 लाख को ही डबल डोज
छत्तीसगढ़ में अब तक 1.14 करोड़ से अधिक लोगों को कोरोना वैक्सीन लग चुकी है। इसमें केवल 20 लाख से अधिक लोग ही ऐसे हैं जिनको अब तक दोनों डोज लगे हैं। आंकड़ों के अनुसार 45 प्लस केटेगरी में सबसे अधिक 15.74 लाख से अधिक लोगों को दोनों डोज लग चुके हैं।

अब एक-एक का रिकाॅर्ड चेक कर कोरोना टीका लगाने बुलाया जा रहा
प्रदेश में आबादी के अनुपात में अभी तक केवल 6.88 प्रतिशत को ही दोनों टीके लगे हैं। हर जिले में वैक्सीन की दूसरी डोज से चूके लोगों की ट्रेसिंग के लिए भी स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश जारी किया है। इसके तहत दूसरी डोज वाले ऐसे लोग जिनकी तारीख बीत चुकी है, उन्हें केंद्रों तक लाने के लिए जिले की टीका ट्रेसिंग टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब लोगों को फोन टीके लगवाने के लिए बुलाया जा रहा है। अकेले रायपुर में टीका ट्रेसिंग टीम रोज 500 से अधिक लोगों को फोन कर रही है।

ओवरडेट के बाद भी लगवा सकते हैं कोरोना वैक्सीन

  • अगर किसी व्यक्ति की टीकाकरण के दूसरे डोज के लिए तारीख बीत गई है। तो भी वो केंद्र पर जाकर दूसरा डोज लगवा सकता है। इससे कोई विशेष अंतर नहीं पड़ेगा। वैसे जानकारों की सलाह यही रहती है कि मैसेज का इंतजार किए बिना खुद से दूसरे डोज की तारीख को याद रखें, नियत तारीख पर टीका लगवाने जरूर जाएं। - डॉ. विश्वनाथ भगत, राज्य टीकाकरण अधिकारी
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