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ऐसी अफसरशाही कि 250 KM पैदल जाएंगे ग्रामीण:बस्तर से पदयात्रा करते रायपुर आए थे, राज्यपाल के आदेश के बावजूद लौटने की व्यवस्था नहीं

रायपुर3 महीने पहले
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अंतागढ़ के दूरस्थ गांवों से आए ये लोग रात में भी इनडोर स्टेडियम में ही ठहरे हुए थे। - Dainik Bhaskar
अंतागढ़ के दूरस्थ गांवों से आए ये लोग रात में भी इनडोर स्टेडियम में ही ठहरे हुए थे।

छत्तीसगढ़ में अफसरशाही मनमानी चल रही है। राज्यपाल अनुसूईया उइके ने मंगलवार को अंतागढ़ के ग्रामीणों को सरकारी व्यवस्था से घर छोड़ने का आदेश दिया था। ग्रामीण दोपहर बाद तक बस का इंतजार करते रहे। फिर पैदल ही 250 किमी के सफर पर निकल गए। ये ग्रामीण अपने गांवों को नारायणपुर जिले में शामिल करने की मांग लेकर पदयात्रा करते हुए रायपुर पहुंचे थे।

ग्रामीणों के प्रतिनिधि सोमनाथ उसेंडी ने बताया, मंगलवार को राज्यपाल अनुसूईया उइके उनकी मांग सुनने रायपुर के इनडोर स्टेडियम पहुंची थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि उन लोगों के घर वापस जाने का इंतजाम सरकार की ओर से किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन को इसके लिए निर्देशित कर दिया है। इस आश्वासन के बाद उन लोगों ने राशन और अन्य सामान लेकर चल रही गाड़ियों में महिलाओं-बच्चों को बिठाकर गांव भेज दिया। रात को सभी लोग इनडोर स्टेडियम में ही रुके।

सुबह से ग्रामीण उनकी घर वापसी के लिए प्रशासन की ओर से किसी इंतजाम की प्रतीक्षा करने लगे। दिन चढ़ने के साथ उनकी बेचैनी भी बढ़ी। उनके नेताओं ने अधिकारियों को फोन लगाना शुरू किया, लेकिन कहीं से जवाब नहीं मिला। बताया जा रहा है, प्रशासन की ओर से कोई जवाब नहीं मिलता देख ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। इनडोर स्टेडियम में अफरातफरी की स्थिति बनी। बाद में सभी ने पैदल ही घर जाने का फैसला किया। उसेंडी ने कहा, हम लोग फिर पैदल ही गांव के लिए निकल रहे हैं।

राजभवन को पता हीं नहीं

इस संबंध में पूछे जाने पर राजभवन के अधिकारियों ने जानकारी से ही इनकार कर दिया। राजभवन के अधिकारियों ने कुछ ग्रामीणों का फोन नंबर लिया है। उनका कहना है, इन लोगों से बात कर कोई व्यवस्था कराई जाएगी।

सरकार ने मान ली है इनकी मांग

ये ग्रामीण कांकेर जिला स्थित अपने गांवों को नारायणपुर जिले में शामिल करने की मांग लेकर पैदल ही राजधानी पहुंचे थे। इनकी मांग सरकार ने मान भी ली है। राज्य सरकार का दावा है कि उसने 53 गांवों को नारायणपुर जिले में शामिल करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। केंद्र सरकार की अनुमति मिली तो अंतागढ़ ब्लॉक के ये 53 गांव नारायणपुर जिले का हिस्सा बन जाएंगे।

सवाल बाकी, पहले ही भेज दिया तो बताया क्यों नहीं

इस मामले में सवाल अब भी बाकी हैं। अगर राज्य सरकार ने इन 53 गांवों को नारायणपुर में शामिल करने का प्रस्ताव पहले ही केंद्र सरकार को भेज दिया तो ग्रामीणों को बताया क्यों नहीं। किसी अधिकारी अथवा मंत्री-विधायक ने 250 किमी की कठिन पदयात्रा पर निकले ग्रामीणों से रास्ते में ही बात क्यों नहीं की। उन्हें क्यों नहीं बताया, उनकी मांग पूरी हो रही है, अब उन्हें पैदल चलने की जरूरत नहीं है।