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  • The Official Record Of Deaths Due To Corona Infection Is 13594 And So Far The Application Is 18725 I.e. The Data Has Revealed The Truth Of The Deaths.

आंकड़ों से सामने आया मौतों का सच:कोरोना संक्रमण से मौतों का सरकारी रिकॉर्ड 13594, अभी तक 18725 आवेदन

रायपुरएक महीने पहले
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कोरोना मौतें सरकारी आंकड़ों से ज्यादा हैं, इस सच का पता कोरोना मुआवजे के आवेदनों से हुआ है। पूरे प्रदेश में कोरोना मृत्यु के लिए मुआवजे के अब तक आए आवेदनों की संख्या 18725 है, जो कोविड मौतों के सरकारी आंकड़ों से 5131 से अधिक है। 11 दिसंबर तक प्रदेश में 18725 कोरोना मृत्यु मुआवजे के लिए आवेदन आए हैं, जिनमें से करीब साढ़े 11 हजार से अधिक प्रकरणों में मुआवजा राशि 50 हजार प्रति केस के हिसाब से 57.50 करोड़ रुपए वितरित की जा चुकी है।

पूरे कोरोना काल में सर्वाधिक मौत वाले जिलों रायपुर और दुर्ग में तो 8094 से अधिक आवेदन आ चुके हैं। तो राजनांदगांव जिले में भी 1300 से अधिक आवेदन आए हैं। पड़ताल में रायपुर में कोरोना मौत के आंकड़े और आवेदन में 953, दुर्ग में 2197 और राजनांदगांव में 784 से अधिक का अंतर आ रहा है। आवेदन की प्रक्रिया लगातार चल रही है, यानी ये फासला अभी और बढ़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने रोजाना के बुलेटिन में रविवार रात जो आंकड़ें जारी किए हैं, उन्हीं के मुताबिक प्रदेश में अभी भी कोरोना मृत्यु की दर्ज संख्या 13594 ही बताई जा रही है।

कोरोना मौत के वास्तविक आंकड़ों में अंतर की पड़ताल के लिए दूसरी लहर के बाद प्रदेश में कोविड डेथ ऑडिट कमेटी भी बनाई गई थी, जिसने करीब तीन माह पहले कोरोना डेथ ऑडिट कमेटी ने प्रदेश में 13 हजार से मौत के आंकड़ों को सही बताकर फाइल बंद कर दी थी। कमेटी ने उस दौरान दावा किया था कि प्रदेश में कोरोना मौत के वही सही आंकड़े हैं, जो सरकारी तौर पर जारी किए गए हैं। अधिक संख्या मंे आवेदन अब ऐसे तमाम दावों की कलई खोल रहे हैं।

दूसरी लहर में ही 8878 से ज्यादा मौत हुई थी
प्रदेश में कोरोना मृत्यु के दर्ज आंकड़ों के मुताबिक 8878 से अधिक कोविड मौतें केवल अप्रैल और मई के दौरान दूसरी लहर के पीक में दर्ज हुई थी। तब भास्कर ने जमीनी पड़ताल के बाद खुलासा किया था कि उस वक्त घोषित सरकारी मौतों के मुताबिक पीक के तीन माह में रायपुर जिले में 2994 मौत का अंतर था। दरअसल, प्रदेश में कोरोना मौत के प्रकरणों की डेथ इंनेस्टिगेशन के जरिए पुष्टि की जा रही है। मुआवजा राशि के दौरान भी हर जिले में कोविड डेथ आडिट कमेटी बनाई गई है। पड़ताल में ये भी पता चला है कि कोरोना मृत्यु मुआवजे के लिए आए आवेदन सही है या नहीं इसके लिए कोविड पॉजिटिव प्रमाणपत्र देखे जा रहे हैं। डेथ सर्टिफिकेट में मौत की वजह अगर निमोनिया है, तो उसे भी कोविड जैसा मानकर मृत्यु मुआवजा दिया जा रहा है।

ज्यादातर मौतें घरों में हुई
भास्कर ने पूरी तह तक जाकर पड़ताल की तो कई हैरान वाली बातें सामने आई। दर्ज नहीं हो पाईं कोविड मौतों के ज्यादातर मामले घर में हुई मौतों के है। अर्थात कि बहुत सारे लोगों ने कोरोना होने की बात छिपाई, मृत्यु के बाद ही ऐसी मौतों का सच सामने आ पाया है। उधर, स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के मुताबिक कोरोना मृत्यु मुआवजे के लिए जो आवेदन की संख्या अधिक आ रही है, उसका सबसे बड़ा कारण ये है कि सुप्रीम कोर्ट के नियम के मुताबिक कोरोना पॉजिटिव हुए शख्स की एक माह के भीतर हुई मौत पर भी मुआवजा दिया जाना है। इसके चलते मुआवजा आवेदन के आधार पर प्रदेश में हर दिन कोरोना मृत्यु की संख्या बढ़ रही है।

विधानसभा में प्रश्न
छत्तीसगढ़ में अब तक 10.06 लाख लोग कोरोना पॉजिटिव हुए हैं। 15913 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। इनमें 11761 लोगों की मौत इस साल एक मार्च से 30 नवंबर के बीच हुई है। सबसे ज्यादा 2637 मौतें राजधानी रायपुर में हुई है। कांग्रेस विधायक अरुण वोरा, धनेंद्र साहू व भाजपा के पुन्नूलाल मोहले के सवालों के लिखित जवाब में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने यह जानकारी दी।

मुआवजे की राशि देने के लिए चल रहा काम
^इसमें आंकड़े छिपाने की कोई बात ही नहीं है। कोरोना पॉजिटिव की मृत्यु के एक माह के भीतर मुआवजा दिया जा रहा है। इसी से साफ है कि आंकड़ों में अंतर लगातार आता रहेगा। पात्र को मुआवजा राशि मिले इसके लिए सभी जिलों में लगातार काम कर रहा है।
-डॉ. सुभाष मिश्रा, डायरेक्टर-एपिडेमिक

आंकड़े अपडेट हो रहे, इसलिए बढ़ रही संख्या
^सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक कोरोना पॉजिटिव आने के 30 दिन के भीतर मौत होने पर मुआवजा राशि देने का प्रावधान है। 13 दिसंबर तक 12780 मृतक के परिजनों को मुआवजा दिया जा चुका है। आंकड़े लगातार अपडेट हो रहे हैं, इसलिए आवेदनों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
-टीएस सिंहदेव, स्वास्थ्य मंत्री, छत्तीसगढ़

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