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भास्कर एक्सक्लूसिव:हाउसिंग बोर्ड के मकान फ्री-होल्ड पर पेपर में मालिक का नाम नहीं, नतीजा- बैंकों का फाइनेंस से इंकार, इसलिए बिकेगा भी नहीं

रायपुर2 महीने पहलेलेखक: असगर खान
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फ्री होल्ड होने के बावजूद बैंक सरकारी एजेंसियों के मकानों की खरीदी के लिए फायनेंस नहीं कर रहे हैं। - Dainik Bhaskar
फ्री होल्ड होने के बावजूद बैंक सरकारी एजेंसियों के मकानों की खरीदी के लिए फायनेंस नहीं कर रहे हैं।

लोगों को राहत देने के लिए छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड और रायपुर विकास प्राधिकरण ने अपने मकानों को फ्री होल्ड कर दिया है, ताकि लोग उनकी आसानी से खरीदी-बिक्री कर सके, लेकिन मकानों के फ्री होल्ड होने के बाद लोगों की परेशानी कम होने के बजाय बढ़ गई है। फ्री होल्ड होने के बावजूद बैंक सरकारी एजेंसियों के मकानों की खरीदी के लिए फाइनेंस नहीं कर रहे हैं। अधिकतर बैंकों का कहना है कि जिसके नाम से मकान, फ्लैट या बंगला है, उनका सरकारी रिकॉर्ड यानी बी-वन में नाम नहीं चढ़ा है। जब तक बी-वन में मालिक के नाम की कॉपी नहीं मिलती, बैंक से लोन नहीं मिल सकता।

बैंकों के इस नए नियम और सरकारी एजेंसियों की लापरवाही का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। केवल रायपुर तहसील में छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड और रायपुर विकास प्राधिकरण में प्रॉपर्टी खरीदने के बाद 500 से ज्यादा लोगों ने बी-वन में नाम चढ़ाने के लिए आवेदन किया है। सरकारी एजेंसियों से प्रॉपर्टी खरीदने के बावजूद नामांतरण के लिए लोगों को कई हफ्तों का समय लग रहा है।

इनमें से कई ऐसे भी हैं जो पटवारी रिपोर्ट या दूसरे कारणों से छह महीने से नामांतरण नहीं करवा पाए हैं। इस वजह से ऐसे लोगों को प्रॉपर्टी बिक ही नहीं पा रही है, क्योंकि खरीदने वाले लोगों को बैंक फाइनेंस नहीं कर रही है। जिन्होंने फ्री होल्ड नहीं कराया, वो ज्यादा फायदे में हाउसिंग बोर्ड के मकानों को फ्री होल्ड नहीं कराने वाले लोग अभी ज्यादा फायदे में हैं।

ऐसे लोगों को केवल हाउसिंग बोर्ड दफ्तर और ग्राम पंचायत से एनओसी लेनी पड़ रही है। उन्होंने पुराने निर्माण में किसी भी तरह का कोई परिवर्तन नहीं किया है। यह एनओसी एक हफ्ते से भी कम समय में जारी हो जाती है। इस एनओसी के आधार पर बैंक वाले सरकारी एजेंसियों के मकानों की खरीदी-बिक्री के लिए फाइनेंस भी कर देते हैं, लेकिन फ्री होल्ड के दस्तावेज जमा होने के साथ ही परेशानी और बढ़ जाती है।

प्रापर्टी बेचने या बैंक लोन के आवेदनों का तहसीलों में ढेर, रजिस्ट्री अटकी बी-वन में मालिक का नाम, डायवर्जन न होने के आधार पर लोन से इंकार

अब कृषि जमीन का नया विवाद

सरकारी एजेंसियों के मकानों की खरीदी-बिक्री के लिए बैंक फाइनेंस करवाने में अब एक और नया विवाद खड़े हो गया है। राज्य के कई सहकारी और ग्रामीण बैंक ऐसे हैं जो लोगों से बी-वन के साथ ही हाउसिंग बोर्ड की जमीन का डायवर्जन भी मांग रहे हैं। उनका कहना है कि बोर्ड ने जब मकान बनाए थे उस समय जमीन कृषि थी। इसलिए बी-वन के साथ ही जमीन का डायवर्जन दस्तावेज भी होना चाहिए। हाउसिंग बोर्ड और रायपुर विकास प्राधिकरण के कई प्रोजेक्ट की जमीन आज भी तहसील दस्तावेजों में कृषि ही है, क्योंकि अफसरों ने भी कभी भी इन जमीनों का डायवर्सन करवाया ही नहीं है।

सरकारी एजेंसी का निर्माण होने की वजह से कभी किसी सरकारी विभाग ने इस पर आपत्ति भी नहीं की। लेकिन सरकारी अफसरों की लापरवाही का खामियाजा अब वहां मकान बेचने वालों को झेलना पड़ रहा है। सरकारी जमीन का रकबा एक ही होने की वजह से डायवर्जन एक साथ ही सबका होगा, अफसरों को ही जमीन के डायवर्जन के लिए आवेदन संबंधित तहसील में देना होगा। यही वजह है कि अभी तक हाउसिंग बोर्ड की सेजबहार, परसुली, दोंदे, शंकरनगर समेत कई प्रोजेक्ट की जमीन दस्तावेजों में कृषि ही दिखाई देती है।

सीधी बात- डॉ. अयाज तंबोली, कमिश्नर छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड

सवाल: हाउसिंग बोर्ड की प्रॉपर्टी फ्री होल्ड होने के बाद भी बैंक फाइनेंस नहीं कर रहे, बी-वन मांग रहे हैं।
जवाब: फ्री होल्ड होने के बाद बैंक फाइनेंस कर सकता है। इसके लिए बोर्ड लोगों को दस्तावेज भी देता है।
सवाल: बैंकों के इस नए नियम से लोग परेशान हैं। बी-1 में नाम चढ़ाने के लिए तहसील में भी भटक रहे।
जवाब: सीधे हाउसिंग बोर्ड कार्यालय में आएं। सभी अफसरों से कहा है इस तरह की परेशानी तुरंत दूर करें।
सवाल: मकान फ्री होल्ड, बी-1 होने के बाद कई बैंक ऐसे हैं जो जमीन के डायवर्जन के दस्तावेज मांग रहे।
जवाब: मकानों का पूरा भुगतान होने के बाद फ्री होल्ड होता है। ऐसे लोगों को डायवर्जन के दस्तावेज भी दे रहे।

कलेक्टर तक पहुंची शिकायत आज जाएंगे तहसील

हाउसिंग बोर्ड के मकानों के नामांतरण में हो रही देरी की शिकायत कलेक्टर तक भी पहुंची है। नामांतरण के लिए जरूरी पटवारी रिपोर्ट मिलने में देरी होने की वजह से भी नामांतरण नहीं हो पा रहा है। इस तरह की कई और शिकायतों के बाद कलेक्टर सौरभ कुमार शुक्रवार को रायपुर तहसील का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान वे तहसील में लंबित मामलों की समीक्षा करने के साथ राजस्व अफसरों से पूछेंगे कि नामांतरण, बटांकन, सीमांकन के आवेदन लंबित क्यों हैं। तहसील में कौन से मामले कितने साल पुराने और क्यों हैं इसकी भी समीक्षा की जाएगी।