सीएम भूपेश बघेल ने ली जानकारी:नौकरी में प्रमोशन पर आरक्षण का सिस्टम तैयार, शीघ्र कैबिनेट में

रायपुर2 महीने पहलेलेखक: जॉन राजेश पॉल
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  • प्रमोशन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी

प्रदेश में सरकारी विभागों में पदोन्नतियों में एससी-एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण में क्या भूमिका होगी, इसे लेकर रिपोर्ट शनिवार को बनकर तैयार हो गई। इसके लिए राज्य सरकार ने 2019 में प्रमुख सचिव मनोज पिंगुवा की अध्यक्षता में 8 सदस्यीय कमेटी बनाई थी। कमेटी ने गहन रिसर्च के बाद क्वांटीफायेबल डाटा कलेक्ट किया। इसमें पदोन्नति के पदों पर आरक्षण के बाद इनकी दक्षता व प्रतिनिधित्व पर पड़ने वाले असर का जिक्र है।

मंत्रालयीन सूत्रों के मुताबिक पिंगुवा ने आज मुख्य सचिव अमिताभ जैन को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। इस मौके पर कमेटी के सचिव डीडी सिंह, सदस्य डॉ. कमलप्रीत सिंह व शम्मी आबिदी भी मौजूद थे। बताते हैं कि रिपोर्ट करीब 210 पेज की है। इसे बनाने में ट्राइबल पर शोध करने वाले सरकारी विंगों की भी मदद ली गई। कमेटी ने यह पता लगाया है कि सरकारी विभागों में आरक्षित पदों के लिए कितने पद मंजूर हैं। इनमें से कितने भरे व खाली हैं। ये पद तय आरक्षण के अनुसार हैं या नहीं? यदि इनमें से खाली पदों पर एसटी-एससी वर्गों को निर्धारित आरक्षण दिया जाता है उससे इनके प्रतिनिधित्व व सरकारी कामकाज की क्षमता पर क्या असर पड़ेगा। इसका आंकलन किया गया है।

जैसे डिप्टी कलेक्टर के पद पर 50 फीसदी पद पदोन्नति से भरे जाने हैं। तो ये आरक्षित पदों में से कितने भरे व रिक्त हैं। व इससे क्या असर पड़ रहा है। जीएडी इस रिपोर्ट को केबिनेट में रखेगी। संकेत है कि पुराने आरक्षण यानी 2019 के पूर्व का पालन करते हुए पदोन्नति में आरक्षण देगी। इससे हाईकोर्ट को अवगत कराया जाएगा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन कर लिया है। सीएम भूपेश बघेल ने शनिवार पिंगुवा कमेटी की रिपोर्ट की जानकारी ली।

नतीजा - अध्यादेश के खिलाफ हाइकोर्ट में कई याचिकाएं लगीं। हाईकोर्ट ने अध्यादेश के अनुसार आरक्षण पर रोक (स्टे) लगा दी। ये स्टे अब तक लागू है। नए रोस्टर के अनुसार किसी को लाभ नहीं मिल रहा है। जीएडी के सचिव डीडी सिंह के अनुसार अध्यादेश लैप्स हो गया था क्योंकि इसकी इसे लागू करने की अवधि छह महीने की रहती है।

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