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जवानों की जुबानी हमले के दिन की कहानी:रायपुर में भर्ती जवानों ने बताया आखिर उस दिन क्या हुआ, बोले- नौ घंटे तक फायरिंग चली, बैकअप नहीं था

रायपुर14 दिन पहले
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जवान देवप्रकाश (बाएं) और बलराज सिंह (दाएं)। - Dainik Bhaskar
जवान देवप्रकाश (बाएं) और बलराज सिंह (दाएं)।

एसटीएफ के जवान देवप्रकाश ने भास्कर से बातचीत में कहा कि पूरा गांव खाली था, हमने घायलों का इलाज शुरू किया, तभी गोलियां चलीं। नागुड़ा और टेकलगुड़ा की ओर बढ़ रहे थे, तभी सामने की ओर से ही अचानक फायरिंग शुरू हो गई। नक्सली बम भी फेंक रहे थे। अचानक फायरिंग से सभी हड़बड़ा गए। कुछ साथियों को गोलियां लगीं। जोनागुड़ा या टेकलगुड़ा गांव की ओर बढ़ना सही लगा। जवान बंट गए। आधे टेकलगुड़ा की ओर और हम लोग कुछ घायल साथियों को लेकर डेढ़ किलोमीटर दूर जोनागुड़ा पहुंचे।

इस बीच फायरिंग कम हो गई। गांव पहुंचे तो वहां सन्नाटा था। घरों में ताला लटका हुआ था। इंसान तो दूर मवेशी भी नहीं दिख रहे थे। गांव के आधा किलोमीटर तक कोई नहीं मिला। घायल साथियों को मकान की आड़ में लेटाकर इलाज शुरू किया गया।

​​​​​​जितने साथी थे उनमें से आधे ने मोर्चा संभाल लिया था। घायल साथी दर्द से कराह रहे थे। उन्हें दर्द का इंजेक्शन दिया गया। इलाज चल ही रहा था कि अचानक चारों ओर से फायरिंग की आवाज आने लगी। हमारी ओर भी गोलियां आईं। कुछ दूर बम धमाके हुए। घायल जवानों का इलाज कर रहे साथियों ने दवाइयां छोड़ी और बंदूक थाम ली। दोनों ओर से फायरिंग होने लगी। चार घंटे तक गोली चली। उसके बाद नक्सली भाग गए। इसके बाद हम लोग बड़ी मुश्किल से सिलगेर पहुंचे।

कोबरा बटालियन के बलराज सिंह की जुबानी: जिस समय फायरिंग थमी, तब अंधेरा हो गया था, कुछ दिख नहीं रहा था

सागुड़ा से 2 अप्रैल की रात 9 बजे गाड़ियों से निकले और तर्रेम पहुंचे। टेकलगुड़ा और जोनागुड़ा तक फोर्स को जाना था। वहां नक्सलियों के होने की सूचना थी। वहां से सर्चिंग करते हुए वापस आना था। 700 जवानों की टीम अलग-अलग दिशा से निकले थी। जंगल में सर्चिंग करते हुए 12 किलोमीटर की दूर तय कर 3 अप्रैल की सुबह लगभग 8 बजे जोनागुड़ा की पहाड़ियों के पास पहुंचे थे।

वहां से टेकलगुड़ा और जोनागुड़ा गांव नजदीक था। फोर्स वहीं रुक गई। लगभग 400 जवान थे। दो घंटे रुकने के बाद वापस लौटना था। इसी दौरान अचानक फायरिंग शुरू हुई। पेड़ और टीले की आड़ लेकर जवानों ने भी जवाबी फायरिंग शुरू की। फिर चारों ओर से फायरिंग शुरू हो गई।

जिस दौरान नक्सली बम भी फेंक रहे थे। मौके पर ही कई जवान घायल हो गए थे। कुछ शहीद भी हो गए। तब फोर्स ने जोनागुड़ा की ओर बढ़ने का फैसला लिया। कुछ को टेकलगुड़ा भेजा गया। लगभग 200 जवान दोपहर 1 बजे जोनागुड़ा पहुंचे। वहां घायलों का इलाज कर रहे थे, तभी फिर हमला हुआ।

नक्सलियों ने बम फेंके। हमारी ओर से लगातार जवाबी फायरिंग की जा रही थी। अंतत: नक्सली भाग गए। अंधेरा हो रहा था। कोई टीम नहीं पहुंच पाई। किसी तरह तीन किलोमीटर दूर सिलगेर पहुंचे। वहां हेलिकॉप्टर से हमें रेस्क्यू किया गया।

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