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खेतों में जंगल उगाने की याेजना:धनखर खेतों में पेड़ लगाने वालों को 10 हजार रुपया एकड़ देगी सरकार, ऐसे पेड़ों की कटाई-ढुलाई में लाइसेंस की जरूरत भी खत्म करने की तैयारी

रायपुर21 दिन पहले
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सरकार की इस योजना के दोहरे उद्देश्य हैं। पहला कि वह धान के अति उत्पादन को हतोत्साहित करना चाहती है। दूसरा, निजी क्षेत्र में इमारती लकड़ियों के जंगल उग आने से अधिकांश औद्योगिक जरूरतों के लिए वनों की कुर्बानी से बचा जा सकेगा। - Dainik Bhaskar
सरकार की इस योजना के दोहरे उद्देश्य हैं। पहला कि वह धान के अति उत्पादन को हतोत्साहित करना चाहती है। दूसरा, निजी क्षेत्र में इमारती लकड़ियों के जंगल उग आने से अधिकांश औद्योगिक जरूरतों के लिए वनों की कुर्बानी से बचा जा सकेगा।

कभी देश की आबादी का पेट भरने के लिए जंगलों काे काटकर खेत बनाने वालों को सरकारें प्रोत्साहन देती थी। अब जरूरत से ज्यादा खाद्यान्न उत्पादन की स्थिति ने यह पहिया उल्टा घुमा दिया है। छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन के नाम से खेतों में जंगल उगाने की ऐसी ही एक योजना लेकर आई है। सरकार ने आज कलेक्टरों और वन मंडल अधिकारियों को इसके विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए।

पिछले 18 मई को राज्य मंत्रिपरिषद में मंजूर इस योजना के तहत कृषि वानिकी को प्रोत्साहन दिया जाना है। किसानों ने वर्ष 2020 के खरीफ सीजन में जिन खेतों में धान बोया था अगर इस बार उसमें पेड़ लगाते हैं तो सरकार 10 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से सहायता देगी। यह प्रोत्साहन राशि तीन वर्षों तक मिलेगा। इसी तरह ग्राम पंचायतों के पास उपलब्ध राशि से यदि वाणिज्यिक वृक्षारोपण किया जाएगा, तो एक वर्ष बाद सफल वृक्षारोपण की दशा में संबंधित ग्राम पंचायतों को 10 हजार रुपया प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के पास उपलब्ध राशि से यदि वाणिज्यिक आधार पर राजस्व भूमि पर वृक्षारोपण किया जाता है, तो पंचायत की तरह ही संबंधित समिति को एक वर्ष बाद 10 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। वृक्षों को काटने व विक्रय का अधिकार संबंधित समिति का होगा।

किस तरह के पेड़ लगाना चाहती है सरकार

मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के तहत गैर वन क्षेत्रों में ईमारती, गैर ईमारती, फलदार वृक्ष, बांस, लघु वनोपज एवं औषधीय पौधों का रोपण किया जाना है। इसके लिए उच्च गुणवत्ता के पौधे तैयार किए जाएंगे। जिस वन और राजस्व वन भूमि पर वन अधिकार पत्र दिए गए हैं, उस भूमि पर भी पट्टाधारी की सहमति से ईमारती, फलदार, बांस, लघु वनोपज एवं औषधि पौधों का रोपण किया जाएगा।

कटाई के लिए केवल सूचना देने की जरूरत

वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के दिशा-निर्देशों में कहा गया है, निजी जमीनों पर लगे हुए पेड़ों के कटान की अनुमति के प्रावधानों को सरल किया जाएगा। खुद के लगाए पेड़ को काटकर ढुलाई करने के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता से मुक्त करने का नियम बनाया जाएगा। राजस्व विभाग नियमों में ऐसा बदलाव करेगा जिससे अपनी जमीन पर पेड़ लगाने और काटने के लिए केवल सूचना देने की जरूरत है। उसके लिए किसी अधिकारी की अनुमति की जरूरत न हो।

एक उच्च स्तरीय समिति बनाएगी नियम

बताया गया है, वन विभाग, राजस्व विभाग तथा आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के अधिकारियों की समिति गठित की जाएगी। यह समिति राज्य तथा अन्य राज्यों के वर्तमान प्रावधान तथा केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का अध्ययन कर कटाई तथा परिवहन लाइसेंस की प्रक्रिया को सरल करने का सुझाव देगी। इसके आधार पर राज्य सरकार इस जटिल प्रक्रिया को सरल तथा सुगम बनाएगी। कृषि भूमि के संबंध में कृषि जोत की सीमा को वृक्षारोपण के लिए विस्तारित किया जाएगा।

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