भास्कर एक्सक्लूसिव:रायपुर में फिर सफाई घोटाला; आठ वार्डों में कर्मचारियों की जांच, एक-तिहाई गायब पर रजिस्टर में सब हाजिर

रायपुर4 महीने पहले
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भुगतान पूरे का लेकिन 70 वार्डों के 2900 कर्मियों में औसतन 986 रोज अनुपस्थित। - Dainik Bhaskar
भुगतान पूरे का लेकिन 70 वार्डों के 2900 कर्मियों में औसतन 986 रोज अनुपस्थित।

नगर निगम के हेल्थ अफसरों ने पिछले पांच दिन में शहर के अलग-अलग जोन के 8 वार्डों के सफाई सिस्टम की गुपचुप जांच की तो एक बार फिर बड़ा सफाई घोटाला सामने आ गया है। सभी वार्डों को मिलाकर जांच में 34 फीसदी सफाई कर्मचारी वार्ड के रजिस्टर में तो हाजिर दिखाए गए लेकिन ड्यूटी पर मिले ही नहीं। एक वार्ड में तो दर्ज संख्या 50 सफाईकर्मियों की थी, लेकिन मौके पर 24 ही मौजूद पाए गए।

जिन आठ वार्डों की जांच की गई, उनमें औसतन 350 कर्मचारी रजिस्टर में हाजिर दिखाए गए, लेकिन मौके पर 117 कर्मचारी ही काम करते मिले, अर्थात 34 फीसदी सफाईकर्मी मौके पर थे ही नहीं। राजधानी में इसी गोलमाल को गंदगी की बड़ी वजह माना जा रहा है। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि जिन वार्डों में जांच की गई, वहां इससे पूर्व हाजिरी रजिस्टर में दर्ज उपस्थिति के आधार पर ही भुगतान होता रहा है, अर्थात सफाई घोटाला महीनों से चल रहा है। आला अफसरों ने माना कि वार्डों में कुल 2900 सफाईकर्मियों की तैनाती है, लेकिन जांच के औसत के आधार पर इनमें से लगभग हजार कर्मचारी रोज गायब ही हैं। निगम में पहले 1900 कर्मचारियों से शहर के 70 वार्डों की सफाई होती थी। पिछली महापौर परिषद ने 300 कर्मचारी बढ़ाए थे। फिर भी जनप्रतिनिधि वार्डों की लचर सफाई व्यवस्था के लिए कर्मचारियों की कमी को जिम्मेदार बताते रहे।

नई परिषद में 900 कर्मचारियों की मंजूरी राज्य सरकार ने दी। इस समय शहर की सफाई व्यवस्था के लिए निगम के पास प्लेसमेंट के 3200 कर्मचारी हैं। इनमें से 2900 कर्मचारी वार्डों में तैनात हैं। हर वार्ड को न्यूनतम 40 कर्मचारी आबंटित किए गए हैं। बड़े वार्डों में 50 कर्मचारी दिए गए। यह इसलिए ताकि नालियां और सड़क-गलियों की सफाई अच्छी रहे। पिछले तीन-चार माह से शहर में गंदगी की शिकायतें बढ़ी हैं। बरसाती पानी भरने के बाद निगम की काफी किरकिरी हुई तो हेल्थ अमले ने वार्डों में नालियां और सड़कों की सफाई की गुपचुप जांच शुरू कर दी। उसी में यह घोटाला फिर सामने आ गया।

हाजिरी रजिस्टर में दर्ज संख्या पर ही पेमेंट, इसलिए गायब लोगों का पैसा सीधे जेब में
इनसाइड स्टोरी: निगम के सभी जोनों ने वार्डों में सफाई कर्मचारियों के लिए अलग-अलग टेंडर निकाला है। प्लेसमेंट पर कर्मचारी उपलब्ध कराने वाले ठेकेदारों ने न्यूनतम लाभांश पर ठेका हासिल किया। लाभांश यानी कर्मचारियों के कुल भुगतान पर ठेकेदारों को मिलने वाला प्रतिफल है। दरअसल यही उनकी कमाई है। वार्डों में ज्यादातर लोगों को सफाई ठेके राजनीतिक पहुंच के आधार पर ही मिले हुए हैं। वे कम लाभांश पर भी ठेके ले रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि मामूली गड़बड़ियां करके ही घाटा कवर तो होता ही है, यह अतिरिक्त आय में भी बदलता है।

यह गड़बड़ी इस तरह की जा रही है कि ठेकेदार अपनी आमदनी निकालने के लिए वार्ड में कम कर्मचारी तैनात कर रहे हैं। कर्मचारियों की उपस्थिति को हाजिरी रजिस्टर के आधार पर मंजूर किया जा रहा है, जबकि मौके पर यह जांच ही नहीं की जाती। इस वजह से हाजिरी की तुलना में कर्मचारी बहुत कम रहते हैं, लेकिन रजिस्टर के आधार पर ठेकेदारों को पूरा पेमेंट किया जा रहा है। कुछ सफाई ठेकेदारों ने बताया कि निगम सफाई कर्मचारियों को कलेक्टर दर पर भुगतान करता है। इस समय कलेक्टर दर साढ़े आठ हजार रुपए महीना है। जैसे किसी वार्ड में 50 कर्मचारी आबंटित हैं तो निगम हर महीने में उस वार्ड के लिए 425000 का भुगतान करता है। वार्ड में महीनेभर 50 के बजाए सिर्फ 24 कर्मचारियों ने ही काम किया और 26 गायब रहे। अनुपस्थित 26 कर्मचारियों का भुगतान निगम से हो गया, जो सीधे ठेकेदार की जेब में जा रहा है।

ये टीम कर रही है जांच
निगम के स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष नागभूषण राव यादव, स्वास्थ्य अधिकारी विजय पांडे, सहायक स्वास्थ्य अधिकारी डा. तृप्ति पाणिग्रही के साथ सेंट्रल की टीम वार्डों में सफाई कर्मचारियों की गिनती कर रहे हैं। कर्मचारी कम मिलने पर ठेकेदारों से 10 से 20 हजार जुर्माना कर रहे हैं।

ब्लैकलिस्ट किए जाएंगे
सेंट्रल टीम वार्डों में जांच कर रही है और जहां भी कर्मचारी कम मिल रहे हैं, ठेकेदारों पर जुर्माने के साथ कड़ी चेतावनी दी जा रही है। जिन वार्डों में जांच में दोबारा गड़बड़ी मिली, वहां ठेका ही रद्द कर देंगे और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट भी करेंगे।
-एजाज ढेबर, महापौर रायपुर

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