CG में पहली बार ऐसी सर्जरी:दिल में जन्म से छेद था, ऑक्सीजन की कमी से नीला पड़ने लगा था शरीर; डॉक्टरों ने बचा ली जान

रायपुर5 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ में पहली बार इस बीमारी की सफल सर्जरी हो पाई है। - Dainik Bhaskar
छत्तीसगढ़ में पहली बार इस बीमारी की सफल सर्जरी हो पाई है।

पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों ने दिल की एक दुर्लभ बीमारी से 26 वर्षीय महिला की जान बचाई है। दिल की दुर्लभ बीमारी एब्सटीन एनोमली की शिकार यह महिला पिछले कुछ महीनों से काफी परेशान थी। ऑक्सीजन की कमी से उसका शरीर नीला पड़ने लगा था। डॉक्टरों का दावा है कि छत्तीसगढ़ में संभवत: पहली बार इस बीमारी की सफल सर्जरी हुई है।

बताया गया, करीब 26 साल की महिला मरीज का शरीर पिछले कुछ समय से नीला पड़ने लगा था। उसका ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल 70% तक पहुंच गया था और वह कई बार बेहोश हाे चुकी थी। कुछ दिन पहले ही उसे ACI के कार्डियोलॉजी विभाग में लाया गया था।

विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने ईकोकार्डियोग्राफी से एब्सटीन एनोमली की पुष्टि की। वहां से उसे कार्डियक सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू के पास भेजा गया। डॉ. साहू ने बीमारी की रिपोर्ट देखने के बाद मरीज के रिश्तेदारों को बताया कि यह बहुत ही दुर्लभ बीमारी है। इस बीमारी में ऑपरेशन की सफलता 10% से भी कम है। यह भी बताया, अगर ऑपरेशन नहीं हुआ तो मरीज का मरना तय है। मरीज के रिश्तेदार उसे दूसरे अस्पताल में परामर्श के लिए ले गए। इस बीच वे मुंबई और चेन्नई के अस्पतालों से भी ऑपरेशन के लिए परामर्श करने गए। वहां भी उनको यही जवाब मिला। उसके बाद परिवार के लोगों ने रायपुर में ही ऑपरेशन कराने का मन बनाया। ऑपरेशन के बाद ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल 98% हो गया है। अभी वह बिल्कुल ठीक है और डिस्चार्ज लेकर घर जाने की तैयारी कर रही है।

विशेष तकनीक के प्रयोग से किया गया ऑपरेशन

डॉ. कृष्णकांत ने मरीज एवं रिश्तेदारों को बताया कि इस मरीज में हार्ट के ऑपरेशन में बोवाइन टिश्यु वाल्व की आवश्यकता होगी। ऑपरेशन में मरीज को मुख्यमंत्री विशेष सहायता योजना से 4.5 लाख रुपए मिल गए। इस मरीज का जो ऑपरेशन हुआ उसको मेडिकल भाषा में एएसडी क्लोजर विद डीवीडी पैच प्लस ट्राईकस्पिड वाल्व रिप्लेसमेंट विद 29 एमएम बोवाइन टिश्यु वाल्व प्लस आरवीओटी कहते हैं। इस सर्जरी टीम में हार्ट सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू, डॉ. निशांत चंदेल, कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. तान्या छौड़ा, नर्सिंग स्टाफ राजेन्द्र साहू, चोवा, मुनेश, एनेस्थेसिया टेक्नीशियन भूपेन्द्र चंद्रा शामिल थे।

ऑपरेशन की चुनौतियां बड़ी थीं

डॉक्टरों ने बताया, इस ऑपरेशन में सफलता के 10% से भी कम चांस होते हैं। सर्जरी के बाद मरीज को पेसमेकर लगने के चांस 50% होता है। ऐसा इसलिए कि मरीज को ट्राईकस्पिड वाल्व लगाया जाता है इससे उसकी धड़कन को नियंत्रित करने वाले सर्किट को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। अगर दिल के अंदर का यह सर्किट खराब हो गया तो मरीज की धड़कन अत्यंत कम हो जाती है। इसको मेडिकल भाषा में ब्रेडीकार्डिया कहा जाता है। पेसमेकर ही इसका एक मात्र इलाज है। इस ऑपरेशन में इस सर्किट को बचाने के लिए विशेष तकनीक का उपयोग किया गया था। ऑपरेशन के बाद मरीज को बहुत ही सघन ICU की आवश्यकता होती है। ACI की कॉर्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. तान्या छौड़ा ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।

क्या है एब्सटीन एनोमली बीमारी

डॉक्टरों ने बताया,जब बच्चा मां के पेट में होता है उस समय पहले 6 सप्ताह में बच्चे के हृदय का विकास होता है। इसी दौरान किन्हीं बाहरी अथवा आनुवांशिक वजहों से विकास में बाधा पहुंची तो हृदय असामान्य हो जाता है। इस बीमारी में मरीज के हृदय का ट्राइकस्पिड वाल्व ठीक से नहीं बन पाता। दायां निलय ठीक से विकसित नहीं हो पाता एवं हृदय के ऊपर वाले चैम्बर में छेद रहता है। इसकी वजह से मरीज के फेफड़े में शुद्ध होने के लिए (ऑक्सीजेनेसन) के लिए पर्याप्त मात्रा में खून नहीं जाता। ऐसे में मरीज का शरीर नीला पड़ जाता है। दो लाख बच्चों में से किसी एक को यह बीमारी होती है।

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