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कोरोना के दौर में प्रॉपर्टी बिजनेस में बड़ी उछाल:सिर्फ राजधानी में ही प्रापर्टी की इतनी खरीदी-बिक्री कि टारगेट 487 करोड़ का और रजिस्ट्री हुई 543 करोड़ की

रायपुर6 महीने पहलेलेखक: असगर खान
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पिछले मार्च-अप्रैल के मुकाबले दोगुनी रजिस्ट्री। - Dainik Bhaskar
पिछले मार्च-अप्रैल के मुकाबले दोगुनी रजिस्ट्री।
  • लॉकडाउन में टारगेट से 14.36% ज्यादा रजिस्ट्री

प्रदेश में राजधानी रायपुर कोरोना से दोनों लहरों में बुरी तरह प्रभावित रहा, मरीज सबसे ज्यादा हैं और मौतें भी सर्वाधिक हुईं। लेकिन इस दहशत के बीच पांच साल में पहली बार रियल एस्टेट यानी प्रापर्टी की खरीदी-बिक्री का काम भी खामोशी से फलता-फूलता रहा।

एक वित्तीय वर्ष में दो बार कोरोना लहरें तथा करीब साढ़े 4 महीने के कुल लाॅकडाउन के बावजूद राजधानी में चार साल बाद पंजीयन दफ्तर ने न सिर्फ रजिस्ट्री का 487 करोड़ रुपए का टारगेट पूरा किया, बल्कि इससे 50 करोड़ रुपए से ऊपर की और रजिस्ट्री हो गईं। खास बात यह है कि पिछले साल मार्च-अप्रैल में जब कोरोना की दहशत नहीं के बराबर थी। तब जितनी रजिस्ट्री हुई, इस साल मार्च-अप्रैल में जबर्दस्त दहशत के बावजूद उससे दोगुनी रजिस्ट्री हो गई। जिला पंजीयन दफ्तर से मिली जानकारी के अनुसार 2020-21 में रजिस्ट्री का टारगेट 487 करोड़ था।

अप्रैल-मई के लॉकडाउन के बावजूद इस साल टारगेट से 14.36 फीसदी ज्यादा यानी 543 करोड़ की रजिस्ट्री हुई। अफसरों का दावा है कि पिछले पांच साल में रजिस्ट्री कराने के लिए सबसे ज्यादा लगभग 100 करोड़ के स्टांप इसी वित्तीय वर्ष में बिके हैं। पिछले वित्तीय वर्ष यानी 2019-20 में 35837 दस्तावेज रजिस्टर्ड हुए थे, लेकिन इस साल 2020-21 में 35763 दस्तावेजों का पंजीयन किया गया। राजधानी में 9 अप्रैल से लॉकडाउन लगाया गया। उस समय रजिस्ट्री दफ्तर भी बंद कर दिया गया था। लेकिन बाद में ऑनलाइन रजिस्ट्री कराने की छूट दे दी गई। रजिस्ट्री शुरू होने के बाद केवल आखिरी के हफ्तों में ही 500 लोगों ने रजिस्ट्री कराई।

पिछले लॉकडाउन को पछाड़ा
पिछले साल मार्च 2020 में लॉकडाउन के दौरान केवल 2273 दस्तावेज जमा हुए थे। लेकिन इस साल मार्च में आंशिक कोरोना बंदी के बावजूद 6647 लोगों ने दस्तावेज पंजीकृत करवाए। यानी पिछले साल की तुलना में 4374 रजिस्ट्री ज्यादा हुई। इसी तरह मई 2020 में भी केवल 980 लोग रजिस्ट्री दफ्तर पहुंचे, लेकिन 2021 मई में 1707 दस्तावेज पंजीकृत हुए। यानी पिछले साल की तुलना में 727 ज्यादा रजिस्ट्री हुई। इस साल केवल शहरी इलाके में ही नहीं बल्कि आरंग, अभनपुर और तिल्दा-नेवरा में भी पिछले साल की तुलना में ज्यादा रजिस्ट्री हुई। राज्य सरकार की ओर से लगातार दूसरा साल था जब रजिस्ट्री की कीमतें नहीं बढ़ाई गई। इतना ही नहीं जमीन की सरकारी कीमतों में 30 फीसदी की कमी इस साल भी जारी रखी गई। इस वजह से लोगों ने जमीन-मकान की खरीदी-बिक्री में जमकर दिलचस्पी दिखाई।

रेट दूसरे साल भी नहीं बढ़ा और 30% की छूट भी जारी

  • जमीन की सरकारी कीमत लगातार दूसरे साल नहीं बढ़ी। जमीन की कीमत मेंं 30 फीसदी की कमी इस साल भी लागू रही।
  • किराये के मकान में रहने वाले लोगों को घर की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस हुई। इसलिए निजी-सरकारी मकान खूब बिके।
  • बैंकों में पिछले दो साल में होम लोन पर ब्याज की दर सबसे कम वसूल की जा रही है। वित्तीय पैकेज भी मिल रहा।
  • बिल्डिंग मटेरियल की कीमतें बढ़ने के बावजूद मकानों की कीमत नहीं बढ़ी। इस साल महंगा न हो जाए इसलिए भी खरीदी।
  • ग्रामीण एरिया के लोग अब शहरी क्षेत्र में आ रहे हैं। यहां सभी तरह की सुविधा होने की वजह से वे लोग घर खरीद रहे हैं।
  • भविष्य की संभावनाओं की वजह से बाहरी राज्यों और अन्य शहरों में रहने वालों ने भी इस बार यहां ज्यादा निवेश किया।

हर महीने बढ़ रही रजिस्ट्री
लॉकडाउन के बावजूद इस साल टारगेट से ज्यादा रजिस्ट्री हुई। जमीन की कीमतों में 30% कम करने का फैसला दूसरे साल भी लागू रखने से रजिस्ट्री ज्यादा हुई।
-बीएस नायक, जिला पंजीयक रायपुर

घर की जरूरत ज्यादा
कोरोना काल में लोगों को खुद के घर की ही जरूरत महसूस हुई। किराए से बचने या वर्क फ्रॉम होम का नया कल्चर समेत कई कारणों से लोगों ने लॉकडाउन में भी अपनी जमा पूंजी रियल एस्टेट में ही लगाई।
-आनंद सिंघानिया, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष क्रेडाई