शहरों को आधुनिक तरीके से संवारने की तैयारी:शहरी निकाय मास्टर प्लान में पानी खर्च करने की होगी सीमा, घरों, रेस्टोरेंट और होटलों में लगेंगे मीटर

रायपुर2 महीने पहले
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प्रदेश में करीब तीन करोड़ लोगों के लिए पानी और पर्यावरण को बचाने के लिए राज्य सरकार बड़ी प्लानिंग कर रही है। पानी खर्च करने की भी राशनिंग की जाएगी। इस तय सीमा से ज्यादा पानी खर्च करने पर लोगों को पैसे देने होंगे। पानी की बर्बादी रोकने व संभलकर उपयोग को लेकर हर घर, रेस्टोरेंट, होटलों, दफ्तरों आदि में बिजली की तरह मीटर लगाने की योजना है।

स्टेट प्लानिंग कमीशन व शहरी विकास टास्क फोर्स इस काम में लगी है कि सरकार को बताए कि भविष्य में शहरों का विकास किस दिशा में कैसे होना चाहिए। इसी में पानी, पर्यावरण, टूरिज्म, रेवेन्यू कलेक्शन बढ़ाने आदि को लेकर कई अनुशंसाएं की हैं। इसमें मास्टर प्लान भी एक हिस्सा है। फोर्स जल्द सुझाव व अनुशंसाएं राज्य सरकार को सौंप देगी। टास्क फोर्स ने सरकार को बताया है कि बदलते परिवेश व आबादी के अनुसार कैसे प्रदेश का होलिस्टिक डेवलपमेंट हो। शहरों का कैसे सेटलमेंट प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, राजस्व में इजाफा व विरासत संरक्षण पर आधारित विकास हो।

इसमें यह भी कहा गया है कि जनता को लगातार अच्छी सुविधाएं देने के इसके एवज में शुल्क भी लिया जाना चाहिए, ताकि ये सुविधाएं उन्हें निरंतर और बेहतर तरीके से दी जा सकें। इसमें पानी बड़ा मुद्दा है। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति को एक दिन में पांच बाल्टी करीब 85 लीटर पानी खर्च करने की छूट मिलेगी तो परिवार में चार सदस्य होने पर 340 या 350 लीटर लीटर तक पानी पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। इससे अधिक पानी का उपयोग करने पर मीटर के अनुसार पैसे देने होंगे। प्रदेश के 169 शहरों को आधुनिक तरीके से संवारने शहरी निकाय मास्टर प्लान बनाए जा रहे हैं।

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने अब तक पहले चरण के 86 में से 43 शहरों का प्लान बना लिया है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को सभी शहरों का मास्टर प्लान बनाने कहा है। प्रदेश में पहले चरण में 86 शहरों का बनना है। मास्टर प्लानों की स्टडी करने देशभर के विशेषज्ञों का दल लगातार दौरे कर स्टेट प्लानिंग कमीशन व शहरी विकास टास्क फोर्स के साथ बैठकें कर रहे हैं। इसमें सुझाव आए हैं कि प्रदेश में शहरों-नगरों की संस्कृति और विरासतों को सहेजा जाए। इन स्थलों का जीर्णोद्धार हो। विरासत क्षेत्रों में कला, शिल्प बाजार, सांस्कृतिक और वाणिज्यिक सुविधाएं हों। शहरी बुनियादी ढांचे के विकास की कठिनाइयों की जानकारी नगरीय विकास विभाग रखे। केंद्र और राज्य प्रायोजित योजनाओं का लगातार विश्लेषण करना चाहिए, ताकि जरूरत के मुताबिक प्रस्ताव बनाए जा सकें। शहरों में सेवाओं के स्तर के बेंचमार्क में सुधार करने का भी सुझाव आया है।

43 शहरों का बना लिया गया है प्लान
प्रदेश के 169 शहरों को आधुनिक तरीके से संवारने शहरी निकाय मास्टर प्लान बनाए जा रहे हैं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने अब तक पहले चरण के 86 में से 43 शहरों का प्लान बना लिया है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को सभी शहरों का मास्टर प्लान बनाने कहा है। प्रदेश में पहले चरण में 86 शहरों का बनना है।

कस्बों में निवेश की जरूरत
टास्क फोर्स ने राजस्व सृजन और वृद्धि के लिए विभिन्न उपाय करने तथा कस्बों में अधिक निवेश की आवश्यकता बताई है। छोटे शहरों में राजस्व क्षमता सीमित है। इसलिए छोटे शहरों में वित्तीय बाधाओं को दूर करने कहा गया है। मलिन बस्तियों में ओडिशा का जागा मिशन की तरह काम करने और छोटे शहरों और क्षेत्रीय संपर्क के लिए छोटी बसों का उपयोग करने का सुझाव दिया गया है। तीन साल में सभी नगर निगम, नगरपालिकाएं व नगर पंचायतों का मास्टर प्लान बनाना है।

प्रभाव डालने वाले बिंदु
छत्तीसगढ़ के सभी शहरों व नगरों के विकास के ज्यादातर मुद्दे व विषय कॉमन हैं। इसके बावजूद निकायवार राजनीतिक मुद्दे, मौसम-जलवायु परिवर्तन, सीवरेज लाइनों का प्लान, जमीनों के पुराने रेट, लगातार परिवर्तित हो रहे जमीनों व मकानों के रेट, सरकारी रेट, पर्यावरण प्रदूषण, ऑक्सीजोन की जरूरत, पेसा कानून, बिल्डिंगों की ऊंचाई, मकानों की छतों पर गर्मी का प्रभाव, यातायात की समस्या आदि मास्टर प्लानों में असरकारक साबित हो रहे हैं।

रोड मैप बनाने सरकार को दिया जा रहा सुझाव, आधुनिक टेक्नालॉजी का उपयोग
इसमें मास्टर प्लान में अमल में आने वाली दिक्कतों व दीर्घकाल के लिए रोडमैप बनाने सरकार को सुझाव दिया जा रहा है। बताया गया कि इस बार आधुनिक टेक्नालॉजी से मास्टर प्लान बनाए जाने की वजह से जनता के लिए योजनों बनाने में आसानी होगी। सेटेलाइट की वजह से वार्डों व शहरों की सरहद व जमीन का सटीक लोकेशन व सामने आया है। पूर्व में सटीक लोकेशन के लिए सेना में ही ऐसी टेक्नालॉजी का उपयोग होता रहा है, अब विकास के लिए भी किया जा रहा है। यहां तक कि शहर का विस्तार किस दिशा में हो इसका भी उल्लेख जरूरी है।

योजना; इन शहरों का मास्टर प्लान भी तैयार
रायपुर विकास योजना -2021, आरंग, अभनपुर, नवा रायपुर डेवलपमेंट अथारिटी तथा माना कैंप (एनआरडी में शामिल)। बलौदाबाजार, भाटापारा, कसडोल, महासमुंद, बागबहरा, पिथौरा, सरायपाली, बसना। धमतरी, कुरुद, दुर्ग, भिलाई, चरौदा, जामुल, कुम्हारी, उतई, अहिवारा, बेमेतरा। बालौद, राजनांदगांव, डोंगरगढ़, खैरागढ़, कवर्धा, जगदलपुर, नारायणपुर, बीजापुर, कोंडागांव। कांकेर, भानूप्रतापुर। बिलासपुर - बोदरी, तिफरा व सकरी वाह्य विद निवेश क्षेत्र, रतनपुर, अरपा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण, मुंगेली, कोरबा व दीपका, जांजगीर-नैला, चांपा, रायगढ़, खरसिया व सारंगढ़। जशपुर, अंबिकापुर, बलरामपुर।

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