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कोरोना का दर्द:ये तस्वीर बेटे से ही मुक्ति के मिथक को तोड़ने; बेटियों ने किया मृत पिता का पिंडदान-अस्थि विसर्जन, पॉजिटिव मां आइसोलेट

नवापारा राजिम9 महीने पहले
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कोरोना से हो रही मौैत और उसके बाद उत्पन्न हालातों को रोज एक नए आयाम को अंजाम दे रही है। न्यायिक सेवा से जुड़े दुर्ग के 46 वर्षीय अनुराग हरिहरनो की कोरोना से असमय मौत हो गई। उनका बेटा न था, सो दो बेटियां अनन्या (19) और अक्षरा (14) रुढ़िवादी परंपरा से परे बेटे से ही मुक्ति के मिथक को तोड़ सोमवार को दुर्ग से राजिम पहुंचीं और मुक्ति तट पर पिंडदान-अस्थि विसर्जन की पूरी प्रक्रिया का विधान किया।

उनकी मां भी पॉजिटिव होकर होम आइसोलेशन में हैं। अपने हाथों से मुखाग्नि नहीं दे पाने का उन्हें दुख अंदर ही अंदर खाए जा रहा था, भास्कर से बात करते वे बिलख पड़ीं। उसके बाद हुई अकाल मौत से मृतात्मा की शांति के लिए अपने पापा की अस्थियां और अनुष्ठान सामग्री, अवशेष समेटे विसर्जन के लिए नदी में उतरीं। दोनों बेटियों के नाना प्रभातभूषण हरिहरनो नगर के निज़ी महाविद्यालय के प्रशासक हैं।

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