12 मिनट बाद रुपयों से भरा बैग चुराकर ले भागा:केनरा बैंक में 4 लाख की उठाईगिरी कैशियर के 45 सेकंड बाद घुसा चोर

रायपुरएक महीने पहले
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काउंटर पर पर्ची जमा करता कैशियर (बाएं) और सोफे से बैग उठाता चोर(घेरे में)। - Dainik Bhaskar
काउंटर पर पर्ची जमा करता कैशियर (बाएं) और सोफे से बैग उठाता चोर(घेरे में)।

तेलीबांधा तालाब के सामने स्थित केनरा बैंक की शाखा में मंगलवार सुबह 11.52 बजे 4 लाख की उठाईगिरी हो गई है। निजी कंपनी का मुंशी 11 बजकर 35 मिनट पर बैंक में पैसा जमा करवाने आया। उसके 45 सेकंड बाद ही चेहरे को गमछे में ढंककर चोर बैंक में घुसा और मुंशी जिस सोफे में बैठा था, वहीं खड़ा हो गया। थोड़ी देर बाद मुंशी रुपयों से भरा बैग सोफे में छोड़कर पर्ची जमा करने जैसे ही काउंटर पर पहुंचा चोर इसी मौके की ताक में था। वह करीब 11.52 मिनट पर बैग लेकर फरार हो गया। उसके बाद बैंक में हड़कंप मच गया।

थोड़ी देर में पुलिस पहुंच गई। आस-पास खोजबीन करने के बाद कटोरातालाब से गुजरने वाली केनाल रोड पर फुटेज के रूप में चोर क्लू मिला। फुटेज में दिख रहा है कि चोर एक बाइक से राजेंद्रनगर की ओर जा रहा है। पुलिस और साइबर सेल की टीम उसकी तलाश कर रही है। चोर ने गमछे को इस तरह बांध रखा है कि उसका चेहरा नहीं दिख रहा है। बैंक के भीतर लगे कैमरे में उसकी एक-एक गतिविधि रिकार्ड हो गई है। चोर जिस तरह बैंक में गमछा बांधकर घुसा और जितनी तेजी से बैग लेकर फरार हो गया, उससे संकेत मिल रहे हैं कि उसे मालूम था कि मुंशी प्रभात नायक के बैग में मोटी रकम है।

उसने पूरी प्लानिंग के साथ चोरी की है। उठाईगिरी का शिकार तेइस वर्षीय प्रभात भरत कंस्ट्रक्शन में मुंशी है। कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक ज्ञानेश गुप्ता ने पुलिस को बताया उनका अवंति विहार में शो रूम है। प्रभात नायक (23) मूलत: खरोरा का रहने वाला है। पिछले साढ़े 3 साल से वह कंपनी में मुंशी है। वह विजय नगर में किराए पर रहता है। प्रभात अक्सर कंपनी का पैसा जमा करने या निकलने बैंक आता-जाता है। उन्होंने बताया कि प्रभात पहले भी इससे बड़ी रकम लेकर बैंक आता-जाता रहा है। वह कंपनी का भरोसेमंद कर्मचारी हैं। मुंशी प्रभात ने बताया कि वह काले रंग के बैग में पैसा लेकर आया था। उसने बैग को वहीं भीतर सोफा पर रखा और उसमें से चेक और पर्ची निकालकर काउंटर पर चला गया।

11.35 बजे बैंक में एंट्री और 12.52 बजे हुआ फरार
तेलीबांधा के टीआई सोनल ग्वाला ने बैंक के अफसरों के बयान और वहां से मिले सीसीटीवी कैमरे के फुटेज देखने के बाद बताया कि कंपनी का मुंशी प्रभात 11.35 बजे बैंक के भीतर आया है। 45 सेकंड के बाद उसके पीछे उठाईगिरी करने वाला युवक घुसा। युवक ने नारंगी रंग का कपड़ा चेहरे में बांध रखा था। वह काले रंग का बैग लेकर आया, ठीक वैसा ही बैग मुंशी के पास था। वह सोफे के पास जाकर खड़ा हो गया। लगभग 11.51 बजे मुंशी पर्ची जमा करने काउंटर पर गया। ठीक उसी समय चोर सोफे पर बैग के पास बैठ गया। उसने पहले इधर-उधर देखा फिर मुंशी का बैग उठाया और उसके ऊपर अपना बैग रखा। दोनों बैग लेकर करीब 11.52 बजे वह बैंक से निकल गया।

लॉकर से गहनों की चोरी का मामला

डुप्लीकेट चाबी से खुल सकता है लॉकर रिटायर पुलिस अफसर को स्टाफ पर शक
आश्रम तिराहा स्थित सेंट्रल बैंक के लॉकर से रिटायर्ड एडिशनल एसपी के 50 लाख के जेवर चोरी मामले में आजाद चौक पुलिस ने मंगलवार को अज्ञात चोर के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि लॉकर से किसी तरह का छेड़छाड़ नहीं की गई है। लॉकर रूम में लगे कैमरे से 90 दिन का फुटेज जब्त कर उसे भी खंगाला जा रहा है। रिटायर्ड अधिकारी मुकेश खरे का आरोप है कि चोरी में बैंक के किसी न किसी कर्मचारी की संलिप्तता हो सकती है, क्योंकि लॉकर की एक चाबी उनके पास है और दूसरी बैंक के पास है। इसके अलावा एक मास्टर की भी है, जो बैंक के पास है। चाबी की क्लोनिंग या डुप्लीकेसी कर गहने निकाले होंगे। उनके पहले लॉकर किसी और व्यक्ति के पास था। उन्हें जब लॉकर दिया गया तो चाबी नहीं बदली गई। पिछले साल मार्च को जब उन्होंने लॉकर खोला तो अधिकारी दूसरे थे। अभी बदल गए हैं। बैंक के ब्रांच मैनेजर का दावा है कि उनकी ओर से किसी तरह की चूक या लापरवाही नहीं हुई है। लॉकर की चाबी सुरक्षित है। किसी ने खोला नहीं है। उन्होंने चाबी की क्लोनिंग से इंकार किया है।

लॉकर से चोरी की संभावनाएं कम क्योंकि : किसी भी बैंक लॉकर से चोरी की संभावनाएं कम होती है, क्योंकि लॉकर रूम में सुरक्षा सख्त होती है। लॉकर की तीन चाबी होती है। एक चाबी लॉकर होल्डर, दूसरी बैंक के पास होती है। तीसरी मास्टर की होती है। लॉकर खोलने के लिए दो चाबी जरूरी है। एक चाबी गुमने पर ही मास्टर की का उपयोग किया जाता है। हर लॉकर होल्डर को एक पासवर्ड दिया जाता है, जो हमेशा बताना होता है। हस्ताक्षर का मिलान किया जाता है। फिर चाबी का मिलान होता है।

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