मेडिकल कॉलेज में पहुंचा डेंगू का डंक:रायपुर में 3 नए मरीज मिले, इनमें PG हॉस्टल के एक रेजिडेंट डॉक्टर भी शामिल; 9 महीने में 404 मरीज, 2 साल में सबसे ज्यादा

रायपुर4 महीने पहले

छत्तीसगढ़ में डेंगू का डंक खतरनाक होता जा रहा है। राजधानी रायपुर इसका हॉटस्पाट बना हुआ है। रोज डेंगू के नए मरीज सामने आ रहे हैं। सोमवार को शहर में ही 3 नए मामले सामने आए। इसमें जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के पीजी हॉस्टल में रहने वाले एक रेजिडेंट डॉक्टर भी शामिल हैं। इसके अलावा एक-एक मरीज आमापारा और तेलीबांधा क्षेत्र के हैं। इनमें से आमापारा निवासी महिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती है। सभी की उम्र 30 से 36 के बीच है।

जिला मलेरिया अधिकारी के कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग ने राजेंद्र नगर वार्ड में डेंगू के रैपिड टेस्ट किट से 51 और शहर के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में 79 लोगों की जांच हुई। इनमें भी कोई डेंगू पॉजिटिव नहीं मिला है। एक जनवरी से 20 सितम्बर तक अकेले रायपुर में 404 लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से कई मरीज अभी भी सरकारी-निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। कुछ कम गंभीर मरीज घरों में भी हैं। डॉक्टरों का कहना है, कम गंभीर मरीज 3 से 4 दिन में ठीक हो जा रहे हैं।

पिछले दो वर्षों में इतने मरीज कभी नहीं मिले
राजधानी में डेंगू के कहर का अंदाजा इससे भी लगा सकते हैं, पिछले दो वर्षों में इतने मरीज किसी नहीं मिले थे। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक 2019 में साल भर के दौरान कुल 100 लोगों में डेंगू मिला था। साल 2020 में एक जनवरी से 31 दिसम्बर डेंगू के 11 मरीज मिले थे। इस साल सितम्बर का महीना पूरा होने से पहले ही 404 मरीज मिल चुके हैं।

चार मरीजों की मौत हो चुकी, प्रशासन नहीं मानता
डेंगू की वजह से रायपुर में कम से कम चार मरीजों की मौत हो चुकी है, लेकिन प्रशासन इसके लिए डेंगू को कारण नहीं मान रहा है। कुछ महीने पहले रामनगर निवासी 13 साल की एक बच्ची की मौत हुई थी। उसका एलाइजा टेस्ट भी पॉजिटिव था, लेकिन CMHO डॉ. मीरा बघेल ने कहा, वह लिवर की बीमारी से मरी। अगस्त में पेटल्स अस्पताल, और एमएमआई में भर्ती रहे तीन मरीजों की मौत हुई। परिजनों के मुताबिक आरडी किट की जांच में डेंगू की पुष्टि हुई थी। वहीं, CMHO का कहना है, उनकी एलाइजा जांच नहीं हुई थी, ऐसे में इन्हें डेंगू से मौत नहीं माना जाएगा।

क्या है यह डेंगू, जिससे बीमार हो रहे लोग
डेंगू बुखार एक फ्लू जैसी बीमारी है, जो डेंगू वायरस के कारण होती है। यह तब होता है, जब वायरस वाला एडीज मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है। डेंगू के चार वायरस हैं, डीईएनवी-1, डीईएनवी-2, डीईएनवी-3 और डीईएनवी-4। जब यह पहले से संक्रमित व्यक्ति को काटता है तो वायरस मच्छर के शरीर में प्रवेश कर जाता है।

बीमारी तब फैलती है जब वह मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है। डेंगू से ठीक हुआ व्यक्ति उस विशिष्ट वायरस से प्रतिरक्षा पा जाता है, लेकिन अन्य तीन प्रकार के वायरस से उसे सुरक्षा नहीं मिलती। अगर व्यक्ति दूसरी, तीसरी या चौथी बार संक्रमित हुआ तो डेंगू के अति गंभीर होने की आशंका बढ़ जाती है। इसमें भीतरी अंगों में रक्तस्राव होने लगता है।

इस तरह के लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं जांच
आमतौर पर डेंगू बुखार के लक्षणों में एक साधारण बुखार होता है। किशोरों और बच्चों में इसकी आसानी से पहचान नहीं की जा सकती। डेंगू में 104 फारेनहाइट डिग्री का बुखार होता है। उसके साथ सिर दर्द, मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी लगना, आंखों के पीछे दर्द, ग्रंथियों में सूजन और त्वचा पर लाल चकत्ते में से कोई भी दो लक्षण दिखे तो तुरंत जांच कराने की जरूरत है।

ऐसे कर सकते हैं डेंगू फैलाने वाले मच्छरों से बचाव

  • त्वचा को खुला न छोड़ें: पूरे शरीर को ढंकने वाले कपड़े पहनने की कोशिश करें। डेंगू के मच्छर सुबह या शाम को अधिक सक्रिय होते हैं। ऐसे समय में बाहर निकलने से बचने की कोशिश करें।
  • मच्छर रोधी क्रीम: डाइथाइलटोलुआमाइड के कम से कम 10 प्रतिशत कंसंट्रेशन वाला रेपेलेंट प्रभावी रहता है। लंबे समय तक जोखिम हो तो फिर उच्च कंसंट्रेशन वाले रेपलेंट की आवश्यकता होती है।
  • ठहरे हुए पानी को कीटाणु रहित करें: एडीज मच्छर साफ और स्थिर पानी में पनपता है। पानी के बर्तन या टंकी को हर समय ढककर रखें। बर्तनों को उलटकर रखें ताकि मच्छरों को पनपने की जगह न मिले।
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