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लॉकडाउन का साइड इफेक्ट:ट्रेन-बसें बंद इसलिए रातभर सफर कर रहे लोग, नींद में हो रहे हादसे; बॉर्डर पर पूछताछ के बाद एंट्री

रायपुरएक महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो।
  • पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों की पुलिस को दिए निर्देश
  • पहले पूछताछ की जाएगी, ड्राइवर की स्थिति ठीक होने के बाद ही आगे जाने की अनुमति दी जाएगी

अब रातभर सफर कर दूसरे राज्य से आने वाले गाड़ियों को बॉर्डर पर रोककर जांच की जाएगी। ड्राइवर की स्थिति ठीक होने पर ही आगे जाने दिया जाएगा, अन्यथा कुछ देर रुकने के बाद ही अनुमति दी जाएगी। देर रात होने वाले हादसों को रोकने के लिए पुलिस मुख्यालय से सभी जिलों को यह निर्देश दिए गए हैं। कोरोना की वजह से देश में ट्रेन-बसें नहीं चल रही हैं, इसलिए लोग दोपहिया से पूरी रात सफर कर दूसरे राज्य जा रहे हैं। इस वजह से रात दो बजे से सुबह 5 बजे तक ज्यादा हादसे हो रहे हैं। नींद के कारण खड़े ट्रक या डिवाइडर से भी गाड़ियां टकरा रही हैं। इसे रोकने के लिए पुलिस मुख्यालय ने दूसरे राज्यों से जुड़े जिलों को बॉर्डर पर जांच करने के निर्देश दिए हैं। ड्राइवर की स्थिति ठीक होने पर ही आगे जाने दिया जाएगा। बता दें कि लॉकडाउन के दौरान हादसों की संख्या काफी कम हो गई थी, लेकिन अनलॉक के बाद कई बड़े हादसे हुए हैं। इस पर रोक लगाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने सभी एसपी को खास सावधानी बरतने के लिए कहा है।

केस - 1
7 अगस्त को पिथौरा के पास रात दो बजे हुए हादसे में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि 5 लोग घायल हो गए। ये सभी पश्चिम बंगाल से महाराष्ट्र जा रहे थे।

केस - 2
कोरबा बांगो के पास 2 अगस्त को तड़के चार बजे हुए हादसे में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन बच्चे घायल हो गए। ये सभी बिहार से आ रहे थे।
हादसे के बाद टीम जा रही जांच करने : राज्य में गंभीर सड़क हादसे के बाद लीड एजेंसी के सदस्य जांच करने के लिए जाते हैं। इसमें पुलिस, पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, स्कूल शिक्षा विभाग सहित कई विभागों के सदस्य होते हैं, जो घटनास्थल का दौरा करने के बाद संबंधित एजेंसियों को अपने सुझाव देते हैं। सड़क निर्माण में गड़बड़ी, खराब सड़क, बेजा-कब्जा आदि कारण सामने आने पर पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई को सुधार के लिए कहा जाता है।

अप्रैल में 127, जबकि मई और जून महीने में 661 लोगों की हुई की मौत
पुलिस के मुताबिक लॉकडाउन की वजह से पिछले साल के मुकाबले हादसों में 25 फीसदी की कमी आई है। 2019 के पहले 6 महीने की तुलना में 2020 में 2017 घटनाएं कम हुई हैं। मार्च में हादसों में 371 लोगों की जान गई, जबकि अप्रैल में लॉकडाउन के कारण सिर्फ जरूरी सेवाओं के लिए ही गाड़ियां चल रही थीं। इस बीच 127 लोगों की मौत हुई। इसके विपरीत मई में 283 और जून में 378 लोगों की हादसे में मौत हो गई।

दुर्घटनाएं रोकने हाइवे पेट्रोलिंग की संख्या और बढ़ाने की तैयारी
पुलिस मुख्यालय ने हादसों में कमी लाने के लिए हाइवे पेट्रोलिंग बढ़ाने की तैयारी की है। इसके लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है। इसके अलावा ब्रीथ एनालाइजर, एल्कोमीटर आदि भी उपलब्ध कराए जाएंगे। एआईजी ट्रैफिक संजय शर्मा के मुताबिक हादसों में कमी लाने के लिए कई स्तर पर कोशिश की जा रही है। लीड एजेंसी के जरिए सभी एजेंसियों व जिलों को सुझाव भेजे जा रहे हैं, जिससे घटनाओं में कमी लाई जा सके।

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