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कृषि पर कोरोना बेअसर:संक्रमण की दो लहरों के बीच धान बेचने वाले दो लाख किसान बढ़े

रायपुरएक महीने पहलेलेखक: कौशल स्वर्णबेर
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43% जमीन में खेती होती है, 92 लाख टन धान खरीदी। - Dainik Bhaskar
43% जमीन में खेती होती है, 92 लाख टन धान खरीदी।
  • 22 हजार करोड़ रुपए मिले इस साल किसानों को, इसलिए बाजार में पैसा
  • 20 प्रतिशत हो चुका है जीएसडीपी में धान की इकॉनामी का हिस्सा

छत्तीसगढ़ में धान का उत्पादन आज सबसे अधिक लाभ देने वाला कारोबार बन गया है। यह ट्रेंड तीन साल से नजर आ रहा है और हर साल बढ़ रहा है। पिछले तीन साल में प्रदेश में 5 लाख से ज्यादा लोग खेती-किसानी की ओर लौटे हैं। 6 साल में धान बेचने वाले किसानों की संख्या दोगुनी होने के साथ ही धान का समर्थन मूल्य भी दोगुना हो गया है। सरकार द्वारा किसानों के खाते में पिछले दो सालों में लगभग 44 हजार करोड़ रुपए जमा किए गए हैं।

जिसका असर यह हुआ है कि कोरोना संक्रमण होने के बाद प्रदेश के बाजारों में रौनक बनी रही। प्रदेश में 2019 में 18 लाख किसानों ने धान बेचा था। उसके बाद कोरोना संक्रमण शुरू हुआ और दो लहरों के बाद इस साल 20 लाख से ज्यादा किसानों ने धान बेचा है। छह साल पहले धान की कीमत 1310 रु. क्विंटल थी, जो अब बढ़कर 25 सौ रुपए क्विंटल हो गई है। 2015-16 में जहां 11 लाख 5 हजार किसानों ने धान बेचा, तो पिछले खरीफ सीजन में 21 लाख किसानों से सरकार ने धान खरीदा है।

भास्कर की पड़ताल के मुताबिक इन छह सालों में खेती का रकबा साढ़े 6 लाख हेक्टेयर बढ़ा भी है। राज्य की 43% कृषि योग्य भूमि में धान ही मुख्य फसल है और यहां की लगभग 80% आबादी कृषि से जुड़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि और उससे संबंधित क्षेत्रों का राज्य के जीएसडीपी में 20% से अधिक योगदान है। छत्तीसगढ़ में सरकारें बनने में इसीलिए किसानों बड़ा योगदान रहा है।

इस बार 5703 करोड़ का प्रावधान
प्रदेश में किसानों की कर्जमाफी, सिंचाई कर माफी के साथ ही राजीव गांधी किसान न्याय योजना ने खेती को और अधिक बढ़ावा दिया है। न्याय योजना में प्रति एकड़ 10 हजार रुपए की सहायता भी दी जा रही है। किसानों काे यह राशि चार किस्तों में दी जा रही है। पिछले साल इस योजना से 5627 करोड़ रूपए दिए गए थे जबकि इस बार 5703 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसकी पहली किस्त 21 मई को 15 सौ करोड़ रूपए दी जा चुकी है। दूसरी किस्त की राशि 20 अगस्त को एवं तीसरी एक नवंबर राज्य स्थापना दिवस के मौके पर तथा चौथे किस्त की राशि 21 मार्च 2022 को दी जाएगी।

24 लाख सेंट्रल, 25 लाख स्टेट पूल में
कुल 25 लाख टन चावल पीडीएस सिस्टम के माध्यम से प्रदेश के लोगों को दिया जा रहा है। 24 लाख टन सेंट्रल पूल में लिया गया है। इस तरह लगभग 72 लाख टन धान की खपत हो चुकी है। वर्तमान में सरकार के पास 20 लाख टन धान शेष है जिनमें से 10 लाख टन धान की मिलिंग राज्य के उपयोग के लिए करवाई जा रही है जबकि 10 में से 9 लाख टन धान की नीलामी की जा चुकी है।

खेती ही ऐसा पेशा जिसपर कोरोना का असर नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि धान की खेती पर कोरोना का बिल्कुल भी असर नहीं पड़ा क्योंकि खेती किसानी के साथ ही इससे जुड़े सभी कामों को लॉकडाउन से मुक्त रखा गया था। यही वजह है कि 2020 में कोरोना के शुरु होने के बाद भी 20 लाख से ज्यादा किसानों ने धान बेचा। इस साल किसानों से 17 हजार करोड़ रुपए का धान खरीदा गया है जबकि न्याय योजना के 5628 करोड़ रूपए भी किसानों के खाते में डाले गए। यानी हर साल लगभग 22 हजार करोड़ रूपए से ज्यादा कैश किसानों के खाते में जा रहे हैं। धान के इन्हीं पैसों का ही असर है कि काेराेना के कारण अर्थव्यवस्था की गति धीमी नहीं हुई। बाजार में पैसे आए तो इससे दूसरे कारोबार भी मंदे नहीं पड़े।

पिछले 6 साल से बढ़ ही रहे धान उत्पादक
राज्य में पिछले 6 साल में धान बेचने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ी है। 2015-16 में 13.17 लाख पंजीकृत किसानों में से 11.55 लाख किसानों ने धान बेचा था। 2019-20 में पंजीकृत 19.55 लाख किसानों में से 18.38 लाख ने धान बेचा है। इन वर्षों की तुलना में 2020-21 में पंजीकृत किसानों में से 95.38% किसान धान बेचने में सफल रहे, जो राज्य बनने के बाद से अब तक का रिकार्ड है।

विशेषज्ञ बोले- धान को मिली सरकारी मदद से हुआ फायदा

अतिरिक्त पैसों से बढ़ा परचेसिंग पावर; आरके बाजपेयी, संचालक कृषि अनुसंधान
केन्द्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक राशि छत्तीसगढ़ के किसानों को दी जा रही है। किस्तों में मिल रहे इन पैसों का उपयोग वो अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए कर रहे हैं। लगातार साल भर मिल रहे पैसों के कारण किसानों की परचेसिंग पॉवर बढ़ रही है। इससे बाजार में पैसा आ रहा है। यही वजह है कि कोरोना होने के बाद भी बाजार में मंदी का असर नहीं दिखा।

गांव समृद्ध पर फसल बदलना जरूरी; डा. संकेत ठाकुर, कृषि विशेषज्ञ
धान की फसलों का 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल मिलने से किसान आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे हैं। इसी का नतीजा है कि गांवों में सब्जी की खेती करने वाले किसान भी धान की फसल उगा रहे हैं। हालांकि सिर्फ धान उत्पादन राज्य के लिए घातक हो सकता है। सरकार दूसरी फसल लगाने वाले किसानों को आश्वस्त करे कि दलहन, तिहलन, कोदो ,कुटकी रागी, कृषि वानिकी की खेती करने वालों को भी धान जैसा लाभ दिया जाएगा।

धान के किसान बढ़ेइस साल भी वृद्धि
पिछले साल की तरह इस साल भी धान बेचने वाले किसानों की संख्या कम नहीं हुई, बल्कि बढ़ी है। खेती अब लाभ का व्यवसाय है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के कारण युवा भी खेती की ओर लौट रहे हैं। बल्कि अन्य फसलों के किसान बढ़ेंगे। खरीफ के आने वाले सीजन में भी पिछली बार जितने किसान ही धान उगाएंगे।
-रविन्द्र चौबे, कृषि मंत्री एवं प्रवक्ता-छग सरकार

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