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सर्व आदिवासी समाज में दो फाड़:पूर्व सांसद सोहन पोटाई की अध्यक्षता वाले गुट ने छेड़ा है सरकार के खिलाफ आंदोलन, दूसरे गुट ने रिटायर्ड आईपीएस भारत सिंह को घोषित किया अध्यक्ष

रायपुर3 महीने पहले
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पिछले महीने सोहन पोटाई गुट की बैठक में राज्य सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन की घोषणा हुई थी। - Dainik Bhaskar
पिछले महीने सोहन पोटाई गुट की बैठक में राज्य सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन की घोषणा हुई थी।

छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक संगठन छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज दो फाड़ हो गया है। पूर्व सांसद सोहन पोटाई की अध्यक्षता वाले धड़े ने 19 जुलाई से राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन की घोषणा कर रखी है। इससे दो दिन पहले दूसरे धड़े ने सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी भारत सिंह की अध्यक्षता में एक नई कार्यकारिणी घोषित कर दी है।

जल्द ही समझ आएगा कौन समाज के साथ- नेताम

संगठन में दो कार्यकारिणी को लेकर खासा विवाद है। सर्व आदिवासी समाज संरक्षक और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने कहा, अभी जो कार्यकारिणी घोषित हुई है उसमें पूर्व अफसर लोग हैं। जो जीवनभर सरकार की यस सर किए हैं, आगे भी वैसा ही करके कुछ पद आदि लेना चाहते हैं। जल्दी ही समझ में आ जाएगा कि कौन लोग समाज के साथ हैं, उनके मुद्दों पर संघर्ष कर रहे हैं। पहले घोषित कार्यकारिणी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बीएस रावटे ने कहा, सिलगेर, पदोन्नति में आरक्षण और स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में आरक्षण रोस्टर के उल्लंघन जैसे मुद्दों पर हम लोगों ने आंदोलन घोषित किया है। अब यह पूर्व अफसरों का गुट इसमें सरकार की मदद करने आ गया है। आदिवासी समाज इनके साथ नहीं है। रावटे ने आरोप लगाया, इस गुट ने सरकार से उन वादों पर कभी सवाल नहीं पूछे जो उनके सम्मेलन के मंच से किए गए थे।

इधर नई कार्यकारिणी लाने वाले सर्व आदिवासी समाज के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बीपीएस नेताम ने दावा किया, अरविंद नेताम, नंद कुमार साय और सोहन पोटाई के गुट ने 21 फरवरी को नवा रायपुर के बंजारी धाम में हुई आम सभा में जबरदस्ती चुनाव की कोशिश की। उस दिन चुनाव रद्द हो गया, लेकिन गलत तरीके से उन लोगों ने कार्यकारिणी मनोनीत करा ली। जबकि समाज के संविधान में इसकी कोई व्यवस्था नहीं है। पंजीयक की सलाह पर 11 जुलाई को चुनाव रखा गया था। इसमें संगठन के संविधान का पालन किया गया है। चुनाव अधिकारियों पीआर नाइक व एनएस ठाकुर ने अलग - अलग पदों के लिए पृथक - पृथक नामांकन लिए। एक -एक पद के लिए सिंगल नामांकन ही मिले। इस वजह से जिन्होंने नामांकन भरे थे निर्वाचित घोषित किया गया। अब कार्यकारिणी की पूरी सूची पंजीयक को भेजने की तैयारी हो रही है। नेताम ने आरोप लगाया कि ये लोग समाज को बांटने का काम कर रहे हैं।

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ऐसी है पहले घोषित कार्यकारिणी

प्रांतीय अध्यक्ष – सोहन पोटाई - कांकेर से भाजपा सांसद रहे हैं।

कार्यकारी अध्यक्ष – बीएस रावटे- प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं।

महासचिव – एनएस मंडावी - सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी।

कोषाध्यक्ष – फूल सिंह नेताम

सचिव – विनोद नागवंशी और जयपाल सिंह ठाकुर

महिला प्रभाग अध्यक्ष – सविता साय

युवा प्रभाग अध्यक्ष – सुभाष सिंह परते

ऐसी है नई कार्यकारिणी

प्रांतीय अध्यक्ष - भारत सिंह - कोरबा निवासी हैं। सरगुजा आईजी, महासमुंद व धमतरी एसपी रह चुके हैं। कार्यकारी अध्यक्ष - मदन कोर्पे - रायपुर में वरिष्ठ जिला पंजीयक रहे। इंदौर, जबलपुर व सिहोर में रजिस्ट्री अधिकारी भी रहे।

महासचिव - एचएल नायक - बलरामपुर कलेक्टर, जशपुर व अंबिकापुर में जिला पंचायत सीईओ रह चुके हैं।कोषाध्यक्ष - फूलसिंह नेताम - रायपुर व बस्तर में अपर कलेक्टर रहे।

सचिव - वीएस आतराम - रायपुर निवासी। पूर्व बैंक अधिकारी हैं।

महिला प्रभाग अध्यक्ष - वंदना उइके - डॉ. वेदवती मंडावी की पुत्री व विधायक लक्ष्मी ध्रुव की बहन की बेटी। युवा प्रभाग अध्यक्ष - कुंदन सिंह ठाकुर - रायपुर निवासी हैं। शिक्षामंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम के करीबी है।

चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण रहा है संगठन

प्रदेश की 32 प्रतिशत आबादी जनजातीय है। ऐसे में सर्व आदिवासी समाज की पिछले चुनाव में बड़ी भूमिका रही। पिछले विधानसभा चुनाव में आदिवासी बहुल बस्तर व सरगुजा संभाग में भाजपा का सुपड़ा साफ हो गया था। बताते हैं कि रमन सरकार के एक फैसले से आदिवासी वर्ग नाराज हो गया था। भू-राजस्व संहिता में प्रावधान है अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी व्यक्ति की जमीन किसी दूसरे को हस्तांतरित नहीं की जा सकती। गैर अनुसूचित इलाके में कलेक्टर की सहमति या हस्ताक्षर से हस्तांतरित की जा सकती है। तत्कालीन भाजपा सरकार ने इसमें बदलाव कर आपसी सहमति से सरकार को बेचने का प्रावधान कर दिया था। इसका आदिवासियों ने जमकर विरोध किया। ब्लाकों तक सड़कों पर प्रदर्शन हुए। सीएम व राजस्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय के पुतले फूंके गए। बाद में सरकार को विधानसभा में पारित हो चुका विधेयक वापस लेना पड़ा।

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