पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

बड़े निर्माण कार्य:टाॅवर के लिए दो साल अटका अंडरब्रिज, इसे बचाने अब टनों वजनी बाॅक्स खिसकेगा, इस साल पुल रेडी

रायपुर2 महीने पहलेलेखक: अमनेश दुबे
  • कॉपी लिंक
अंडरब्रिज के बॉक्स को खिसकाकर लाया जाएगा टावर के नीचे। - Dainik Bhaskar
अंडरब्रिज के बॉक्स को खिसकाकर लाया जाएगा टावर के नीचे।
  • छोटे कारणों से अटके तेलघानी पुल, गोगांव अंडरब्रिज और नहरपारा रोड की बाधाएं दूर

कोरोना काल में राजधानी में सभी बड़े निर्माण कार्य या तो रुके हुए हैं या प्रभावित हैं, लेकिन इसी दौरान तीन ऐसे प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया गया है, जो छोटे-छोटे कारणों से 2 से 4 साल रुके रहे। यह चर्चाएं भी छिड़ गई थीं कि इन प्रोजेक्ट का प्लान कैंसिल हो सकता है, लेकिन सरकारी एजेंसियों ने इनकी बाधाएं दूर कर ली हैं।

सबसे बड़ी बाधा गोगांव अंडरब्रिज से लगा 100 फीट ऊंचा हाई-टेंशन लाइन का टावर था। इसके बराबर से खुदाई कर सड़क बनाई जाती तो इंजीनियरों को डर था कि टाॅवर गिर सकता है, और अपने साथ तीन और टावर लेकर गिरेगा। तीनों ही टाॅवर आबादी में हैं। अब बड़े टाॅवर के बचाने के लिए पहली बार अंडरब्रिज का 300 टन से ज्यादा वजनी कंक्रीट बाॅक्स 20 फीट दूरी से खिसकाकर टावर के किनारे ले जाया जाएगा। इस बाॅक्स के एक सिरे को दीवार की तरह इस्तेमाल कर मटेरियल भरा जाएगा, ताकि टाॅवर का बेस मजबूत हो जाए। बाॅक्स को विशाल क्रेन से खिसकाने का काम शुरू कर दिया गया है और इसी साल अंडरब्रिज शुरू करने की तैयारी है।

भास्कर टीम को मौके पर इंजीनियरों ने बताया कि अंडरब्रिज का कंक्रीट बाॅक्स बन चुका है। उसे खिसकाना तकनीकी विशेषज्ञता का काम है, इसलिए नई एजेंसी को काम सौंपा गया है। इस एजेंसी ने 300 टन वजनी ढांचे को खींचकर टावर तक लाने का काम शुरू भी कर दिया है। इसे विशालकाय क्रेन कई मोटी चेन और जैक के जरिए खींच रही है। राजधानी में पहली बार ऐसा हो रहा है, जब नींव खोदे बिना टावर को सेफ करने के लिए रीटेनिंग वाॅल के रूप में बाॅक्स ही इसके नजदीक लाया जा रहा है। इंजीनियरों ने बताया कि सड़क बनाने के लिए टाॅवर के करीब खुदाई नहीं की जा सकती, क्योंकि यह गिर सकता है। सिर्फ इसीलिए यह काम 2 साल से रुका था, क्योंकि पीडब्ल्यूडी महकमे ने ठेकेदार को इस तरह का रिस्क लेने से रोक दिया था। पिछली एजेंसी ने खुदाई किए बिना अंडरब्रिज बनाने में असमर्थता जताई, तभी दूसरी एजेंसी लाई गई।

नहरपारा फोरलेन 4 साल से अटकी एफएआर फार्मूले ने बढ़ाई संभावना
केके रोड से नहरपारा होते हुए रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाली फोरलेन का प्रोजेक्ट 5 साल पहले शुरू हुआ और एक साल में देवेंद्र नगर चौक से सुभाषनगर होते हुए केके रोड तक बाईपास भी बन गया। यह मामला संजय गांधी चौक के पास रुक गया, क्योंकि 100 मीटर हिस्से में दोनों ओर मकानों को 10-10 फीट तोड़ना था और मुआवजे में बात 4 साल से फंसी है। प्रशासन ने वहां सर्वे के बाद करीब 10 करोड़ रुपए का मुआवजा तय किया, लेकिन प्रभावितों ने नामंजूर कर दिया। इस वजह से अब तक यह बाइपास स्टेशन से नहीं जुड़ पाया है। तीन दिन पहले आला प्रशासनिक अफसरों ने एक बार फिर इस जगह का मुआयना किया और लोगों से बात की। नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रभावितों को मुआवजे के बजाय एफएआर ऑफर किया है। माना जा रहा है कि इस ऑफर के बाद इस प्रोजेक्ट की बाधा दूर होगी और काम जल्दी शुरू कर दिया जाएगा। बता दें कि संजय गांधी चौक के पास लगने वाली सब्जी मार्केट को यहां से शिफ्ट करने की योजना है।

खबरें और भी हैं...