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पहाड़ सी जरूरत, राई सी सूरत:वैक्सीनेशन, रेंगने की मजबूरी, सावधानी ही बचाव; कंपनी से टीके इतने कम मिले कि अभी सबको संभव नहीं

रायपुर13 दिन पहले
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समझदारी: वैक्सीन के साथ भी, वैक्सीन के बाद भी ऐसे हराना होगा कोरोना को। ये तस्वीर भाठागांव की है। राशन लेने के लिए डिस्टेंस का पालन कर रहे लोग। - Dainik Bhaskar
समझदारी: वैक्सीन के साथ भी, वैक्सीन के बाद भी ऐसे हराना होगा कोरोना को। ये तस्वीर भाठागांव की है। राशन लेने के लिए डिस्टेंस का पालन कर रहे लोग।
  • केंद्र सरकार ने 18 से 44 साल तक की उम्र के लोगों को टीके का जिम्मा राज्यों पर छोड़ा
  • राज्य सरकार ने 50 लाख डोज की डिमांड की थी, पर मिले सिर्फ 1.3 लाख डोज ही
  • कंपनियां कह रहीं इतनी जल्दी वैक्सीन का बड़ी मात्रा में प्रोडक्शन बेहद कठिन

छत्तीसगढ़ में वैक्सीनेशन की प्रक्रिया इसलिए धीमी है क्योंकि जरूरत के मुताबिक वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। केंद्र ने 18 साल से ऊपर के लोगों के लिए टीके की जिम्मेदारी राज्यों पर डाल दी है। छत्तीसगढ़ ने कंपनियों से 50 लाख डोज मांगे हैं लेकिन अभी सिर्फ 1.3 लाख डोज ही मिले हैं।

फिलहाल कंपनियों का प्रोडक्शन इतनी बड़ी मात्रा में वैक्सीन देने की स्थिति में नहीं है। इसलिए वैक्सीनेशन धीमा हो रहा है। इस समय सावधानी ही बचाव है। कोराेना संक्रमण से बचाव के लिए 18 साल से अधिक उम्र के लोगों काे टीका लगाने का जिम्मा राज्य सरकारों पर छोड़ दिया गया है। केन्द्र के इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ ने इस उम्र के लोगों को मुफ्त टीका लगाने की घोषणा की। इसके लिए टीका बनाने वाली कंपनियों को 50 लाख टीके की डिमांड भी भेजी गई लेकिन राज्य सरकार के प्रयासों के बाद वैक्सीन के सिर्फ 1.3 लाख डोज ही मिल पाए। कम डोज के कारण प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले यहां के अतिगरीब लोगों को टीका लगाने का फैसला लिया गया। यही वजह है कि तीन दिनों में सिर्फ 12 हजार लोगों को ही टीका लगाया जा सका है।

आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 18 से 45 साल तक की उम्र के लगभग 1 करोड़ 30 लाख लोग हैं जिन्हें यह टीका लगना है। टीके लगाने की वर्तमान स्पीड को देखें तो इतने लोगों को शायद की साल के अंत तक टीका लग पाएगा। यानी एपीएल राशनकार्ड धारकों का नंबर 2022 में ही आ पाएगा।दरअसल कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन को सबसे सटीक उपाय माना जा रहा है। केन्द्र सरकार ने बड़े जोर-शोर से 45 साल से अधिक उम्र के लोगों के वैक्सीनेशन शुरू भी करवाए, लेकिन जैसे ही इस उम्र के लोगों का टारगेट पूरा होने लगा, सरकार ने यू-टर्न मारते हुए 18 से 45 साल तक लोगों के टीकाकरण की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकाराें पर थोप दी।

इसी तरह जून में 10 लाख तथा जुलाई में 12 लाख यानी वह 25 लाख डोज देने में ही तीन महीने का समय ले रहा है जबकि सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा काेई भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। ऐसे में सरकार भी 18 प्लस वालों के वैक्सीनेशन को लेकर चिंतित है। चूंकि केन्द्र की घोषणा के बाद राज्य सरकार ने भी एक मई से टीका लगाने का ऐलान कर दिया था, इसलिए आनन-फानन में भारत बायौटेक से एक लाख वैक्सीन मंगवाकर टीकाकरण शुरू करवा दिया गया है। लेकिन यह काफी लंबी चलने वाली प्रक्रिया नजर आ रही है।

टीकाकरण के लिए नया साॅफ्टवेयर तैयार होगा
टीकाकरण के लिए नया सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। सॉफ्टवेयर बनते तक अंत्योदय कॉर्डधारी परिवारों के पात्र लोगों का मैनुअल चिन्हांकन करने और रिकॉर्ड रखने कहा गया है। इन परिवारों के पास मोबाइल नहीं होते है तो कहीं नेटवर्क की भी समस्या है। अंत्योदय परिवारों के सदस्यों के लिए राज्य शासन अपनी खुद की व्यवस्था तैयार कर रही है।

प्रदेश में 2 करोड़ 60 लाख डोज वैक्सीन की जरूरत
छत्तीसगढ़ की 2 करोड़ 90 लाख आबादी में आंकलन के अनुसार 18 से 44 साल की उम्र के लगभग 1 करोड़ 30 लाख लोग हैं, जिन्हें कुल 2 करोड़ 60 लाख डोज़ लगनी है। 45 से अधिक आयु के 58.7 लाख लोगों में से 73 फीसदी का वैक्सीनेशन किया जा चुका है। छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन 3 लाख डोज़ वैक्सीन लगाने की क्षमता है।

केन्द्र सरकार के सहयोग से बढ़ सकती है स्पीड
विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि 45 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए हर हफ्ते या 15 दिन के भीतर तीन से पांच लाख वैक्सीन की डोज पहुंच रही है। यदि कंपनियों द्वारा पर्याप्त टीके नहीं बनाए जाते तो इस उम्र के लोगों के लिए भी टीका नहीं मिल पाता। केन्द्र सरकार के अभियान के लिए टीका आसानी से मिल जा रहा है लेकिन राज्यों के अभियान के लिए टीके की किल्लत बताई जा रही है। यही वजह है कि चाहकर भी राज्य सरकार 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों का टीकाकरण एक साथ शुरू नहीं कर पा रही है।

अभी राशनकार्ड में दर्ज होगा रिकार्ड
टीका लगवाने वालों का रजिस्टर में रिकॉर्ड रखने के साथ ही राशनकॉर्ड पर टीकाकरण की तारीख एवं अन्य प्रविष्टि करने कहा गया है जिससे टीके का दूसरा डोज लगवाने की तारीख लोगों को याद रहे। बीमार लोगों को टीका नहीं लगाया जाएगा।

केंद्र को व्यवस्था करनी थी
टीकाकरण को दो तरह से नहीं बांटना चाहिए। केन्द्र सरकार को पूरा टीकाकरण अभियान चलाना चाहिए था। इस तरह से विभाजन नहीं करना चाहिए था। केन्द्र की यह सोच कतई उचित नहीं है कि 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को वह टीका लगवाएगा आैर 18 से 44 साल वालों को राज्य सरकारें।
-टीएस सिंहदेव, स्वास्थ्य मंत्री, छत्तीसगढ़

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